{"_id":"5a35f25f4f1c1bc1678c1f76","slug":"pgi-chandigarh-ambulence-racket","type":"story","status":"publish","title_hn":"PGI चंडीगढ़ में एंबुलेंस रैकेट का मुखिया ‘फौजी’ भगौड़ा करार, जानिए मामला?","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
PGI चंडीगढ़ में एंबुलेंस रैकेट का मुखिया ‘फौजी’ भगौड़ा करार, जानिए मामला?
अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Dec 2017 09:58 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई में एंबुलेंस रैकेट मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल ट्रांसपोर्टर गगनदीप मान उर्फ फौजी को जिला अदालत ने भगौड़ा (पीओ) करार दिया है। रैकेट के खुलासे के बाद से वह फरार चल रहा था। थाना पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई थी तो पीओ प्रक्रिया शुरू करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। इस पर अदालत ने उसे भगौड़ा करार देने की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दी थी। प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने मामले में शनिवार को स्टेटस रिपोर्ट फाइल की।
इस पर अदालत ने गगनदीप मान उर्फ फौजी को भगौड़ा करार दे दिया। इससे पहले पुलिस की ओर से अदालत में कहा गया था कि पीजीआई एंबुलेंस रैकेट में पुलिस अब तक अरुण, सुलेमान, अवतार के अलावा पीजीआई में बतौर सिक्योरिटी गार्ड तैनात खुड्डा लाहौरा निवासी विनोद कुमार, शशि, गुरकिरपाल और शव बांधने का काम करने वाले अश्विनी, तीरथपाल और अश्विनी कुमार के अलावा मोर्चरी में तैनात विक्की को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एक ट्रांसपोर्टर सतिंदर सत्ती और राजू को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
लेकिन, ट्रांसपोर्टर गगनदीप मान की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पुलिस ने उसकी तलाश में लुधियाना और सहारनपुर के अलावा कई अन्य जगह छापेमारी की, लेकिन उसका सुराग नहीं लगा। इसलिए उसे भगौड़ा करार दिया जाए। इस पर अदालत में फौजी को भगौड़ा करार देने की पुलिस की याचिका मंजूर कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने फौजी के वांटेड के पोस्टर पब्लिक प्लेस पर चस्पा किए। साथ ही देशभर के सभी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों समेत सभी संभावित जगह पर अलर्ट भेजा। शनिवार को केस की स्टेटस रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अदालत ने फौजी को भगौड़ा करार दे दिया।
विज्ञापन
यह है मामला
जून 2016 को पीजीआई में एंबुलेंस सेवा देने वाले दो गुटों में मारपीट की शिकायत सामने आई थी। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मौके से तीन एंबुलेंस चालकों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी बिना परमिशन के पीजीआई में एंबुलेंस चला रहे थे। इस पर पुलिस ने मौके से दो एंबुलेंस जब्त की थी। बाद में पुलिस ने पीजीआई प्रशासन को पत्र लिख फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस के पास पहले भी शिकायत आई थी कि ये एंबुलेंस चालक अन्य टैक्सी चालकों को वहां अपनी गाड़ियां नहीं लगाने देते थे।
इससे अवैध रूप से चल रहे एंबुलेंस चालक लोगों से मनमाना किराया वसूलते थे। जांच में सामने आया कि इन एंबुलेंस चालकों का नेटवर्क इतना तेज था कि जैसे ही किसी मरीज की मौत होती थी या पोस्टमार्टम होता था तो ये तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने तीन दिन में कुल 12 फर्जी एंबुलेंस जब्त की थी। तीन चालकों के अलावा पीजीआई के सात कर्मचारियों, एक ट्रांसपार्टर व एक अन्य को गिरफ्तार किया था। पीजीआई कर्मियों पर फर्जी एंबुलेंस चालकों को सूचना देने और बदले में उनसे कमीशन लेने का आरोप था।
विज्ञापन
इस पर अदालत ने गगनदीप मान उर्फ फौजी को भगौड़ा करार दे दिया। इससे पहले पुलिस की ओर से अदालत में कहा गया था कि पीजीआई एंबुलेंस रैकेट में पुलिस अब तक अरुण, सुलेमान, अवतार के अलावा पीजीआई में बतौर सिक्योरिटी गार्ड तैनात खुड्डा लाहौरा निवासी विनोद कुमार, शशि, गुरकिरपाल और शव बांधने का काम करने वाले अश्विनी, तीरथपाल और अश्विनी कुमार के अलावा मोर्चरी में तैनात विक्की को गिरफ्तार किया था। इसके बाद एक ट्रांसपोर्टर सतिंदर सत्ती और राजू को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
विज्ञापन
लेकिन, ट्रांसपोर्टर गगनदीप मान की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। पुलिस ने उसकी तलाश में लुधियाना और सहारनपुर के अलावा कई अन्य जगह छापेमारी की, लेकिन उसका सुराग नहीं लगा। इसलिए उसे भगौड़ा करार दिया जाए। इस पर अदालत में फौजी को भगौड़ा करार देने की पुलिस की याचिका मंजूर कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने फौजी के वांटेड के पोस्टर पब्लिक प्लेस पर चस्पा किए। साथ ही देशभर के सभी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों समेत सभी संभावित जगह पर अलर्ट भेजा। शनिवार को केस की स्टेटस रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अदालत ने फौजी को भगौड़ा करार दे दिया।
विज्ञापन
यह है मामला
जून 2016 को पीजीआई में एंबुलेंस सेवा देने वाले दो गुटों में मारपीट की शिकायत सामने आई थी। सेक्टर-11 थाना पुलिस ने मौके से तीन एंबुलेंस चालकों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी बिना परमिशन के पीजीआई में एंबुलेंस चला रहे थे। इस पर पुलिस ने मौके से दो एंबुलेंस जब्त की थी। बाद में पुलिस ने पीजीआई प्रशासन को पत्र लिख फर्जी एंबुलेंस चालकों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। पुलिस के पास पहले भी शिकायत आई थी कि ये एंबुलेंस चालक अन्य टैक्सी चालकों को वहां अपनी गाड़ियां नहीं लगाने देते थे।
इससे अवैध रूप से चल रहे एंबुलेंस चालक लोगों से मनमाना किराया वसूलते थे। जांच में सामने आया कि इन एंबुलेंस चालकों का नेटवर्क इतना तेज था कि जैसे ही किसी मरीज की मौत होती थी या पोस्टमार्टम होता था तो ये तुरंत उसके पास पहुंच जाते थे। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने तीन दिन में कुल 12 फर्जी एंबुलेंस जब्त की थी। तीन चालकों के अलावा पीजीआई के सात कर्मचारियों, एक ट्रांसपार्टर व एक अन्य को गिरफ्तार किया था। पीजीआई कर्मियों पर फर्जी एंबुलेंस चालकों को सूचना देने और बदले में उनसे कमीशन लेने का आरोप था।