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पलसौरा केस: पुलिस सतर्क होती तो बेबी जिंदा होती

Thu, 05 Dec 2013 09:24 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 05 Dec 2013 09:24 AM IST
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patient in terror over murder case in palsora
पलसौरा बेबी मर्डर केस का यहां के लोगों और अन्य सेक्टर के लोगों पर असर देखा जा रहा है। पलसौरा में रहने वाले लोगों ने अब अपने बच्चों पर घर के बाहर खेलने पर भी पाबंदी लगा दी है।
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पहले जो बच्चे रिक्शा या बस से स्कूल जाते थे, अब कई अभिभावक उन्हें खुद स्कूल छोड़कर आ रहे हैं। बुधवार को पलसौरा के सभी पार्कों और उनके झूलों में सन्नाटा पसरा रहा।
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वीरवार को पलसौरा निवासियों की ओर से मर्डर केस के आरोपियों को पकड़ने का पुलिस को दिया हुआ अल्टीमेटम समाप्त हो रहा है।

पलसौरा कॉलोनी के मकान नंबर-6318 निवासी रेखा रानी का कहना है कि उनके दो बच्चे हैं। जब से नाबालिग के साथ वारदात हुई है तब से वे अपने बच्चों को लेकर सतर्क हो गई हैं।
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बच्चों को बाहर खेलने जाने पर पाबंदी लगा दी है। रवि कुमार का कहना है कि नाबालिग बेबी अपने अभिभावकों के साथ उनके घर के पास ही रहती थी।

बच्ची उनके घर भी उनकी नन्ही बच्ची के साथ आकर खेलती थी। उनके परिवार के सदस्य इस वारदात से काफी दुखी है। उनका कहना है कि अब प्ले ग्राउंड में बच्चों ने खेलना भी बंद कर दिया है।
वार्ड पार्षद दर्शन गर्ग का कहना है कि अभी गांव में दुख का माहौल है।

अभिभावक अपने बच्चों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए है। उनका कहना है कि पुलिस को जल्द से जल्द हत्यारों को गिरफ्तार कर इस मामले का पर्दाफाश कर देना चाहिए। उनका कहन है कि हर घर में सिर्फ बच्ची को ही याद किया जा रहा है।

सेक्टर-15 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा का कहना है पलसौरा बेबी मर्डर केस ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। वारदात के बाद से शहर के अभिभावक सतर्क हो गए हैं।

पुराने अपराधियों से भी पूछताछ
एसआईटी की टीम ने पलसौरा और उसके आसपास के सभी उन लोगों का रिकार्ड खंगाला लिया है जो पहले किसी न किसी वारदात में शामिल रहे हैं।

ऐसे लोगों से पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही बुधवार को भी पलसौरा में पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। बेबी के घर के पास जितने भी किराएदार रह रहे हैं उनसे पूछताछ की गई है। सूत्रों का कहना है कि तीन पेठे का कारोबार करने वालों से भी पूछताछ की गई है।

पहले पुलिस ने नहीं दिखाई तेजी
गांव निवासियों के अनुसार, बच्ची के गायब होने से पुलिस ने तेजी नहीं दिखाई। 27 नवंबर से बच्ची के गायब होने की पलसौरा पुलिस चौकी ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन उस दिन घर के पास कहीं पर भी सर्च नहीं की न ही आसपास के घरों में तलाशी ली।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि जितना पुलिस हत्या होने के बाद जांच में तेजी ला रही है अगर इतनी तेज गायब होने के बाद लाई जाती तो शायद आज उनकी बच्ची जिंदा होती


गांव में ही रखा था बच्ची को
पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि बच्ची को गायब करने के बाद पलसौरा में ही कहीं पर छुपा कर रखा गया था। गांव वालों के अनुसार जब तीन दिन बाद गांव में जगह-जगह बच्ची के गुम होन के इश्तहार लगाए गए तो आरोपी ने वारदात की।
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