{"_id":"5831bb974f1c1bbc06b398b2","slug":"notebandi-death-hospital-did-not-accepts-old-note-patient-death","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी का साइड इफेक्ट: अस्पताल ने नहीं लिए बड़े नोट, मरीज की मौत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नोटबंदी का साइड इफेक्ट: अस्पताल ने नहीं लिए बड़े नोट, मरीज की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sun, 20 Nov 2016 09:59 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : Demo Pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के कारण अस्पताल वालों ने बड़े नोट लेने से इंकार कर दिया और रविवार सुबह एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक का परिवार पिछले तीन दिन से बैंकों के चक्कर लगा रहा था, लेकिन उन्हें पैसे नहीं मिले। अस्पताल प्रशासन ने पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। जब मरीज के परिजन दवाई की दुकान पर गए तो उन्होंने भी पुरानी करेंसी लेने से साफ तौर पर मना कर दिया।
समय पर इलाज और दवा न मिलने के कारण मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान बस्ती जोधेवाल के न्यू कुलदीप नगर इलाके में रहने वाले बलबीर सिंह के रुप में हुई है।
बलबीर के पड़ोसी परगन ने कहा कि वह दिहाड़ी पर मजदूरी करता था और हार्ट का पेशेंट था। पिछले तीन दिन से वह बीमार चल रहा था। परिजन उसे निजी अस्पताल में ले गए तो वहा डाक्टरों ने पहले तो कहा कि पांच सौ और हजार रुपये के नोट नहीं चलेंगे। उनका बेटा पवन कुमार और पत्नी बलबीर कौर किसी तरह नई करेंसी का इंतजाम कर आए और इलाज के लिए पैसे जमा करा लिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
समय पर इलाज और दवा न मिलने के कारण मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान बस्ती जोधेवाल के न्यू कुलदीप नगर इलाके में रहने वाले बलबीर सिंह के रुप में हुई है।
विज्ञापन
बलबीर के पड़ोसी परगन ने कहा कि वह दिहाड़ी पर मजदूरी करता था और हार्ट का पेशेंट था। पिछले तीन दिन से वह बीमार चल रहा था। परिजन उसे निजी अस्पताल में ले गए तो वहा डाक्टरों ने पहले तो कहा कि पांच सौ और हजार रुपये के नोट नहीं चलेंगे। उनका बेटा पवन कुमार और पत्नी बलबीर कौर किसी तरह नई करेंसी का इंतजाम कर आए और इलाज के लिए पैसे जमा करा लिए।
विज्ञापन
नीला कार्ड लेकर भी अस्पतालों में गए, लेकिन अस्पतालों ने नहीं किया इलाज
मौत
- फोटो : Demo Pic
जब वह ज्यादा पैसे जमा नहीं करा सके तो अस्पताल प्रशासन ने उन्हें कहा कि इसका इलाज उनके पास नहीं है लिहाजा वह उसे डीएमसी अस्पताल में ले जाए। डीएमसी अस्पताल वालों ने भी पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेने से साफ तौर पर मना कर दिया। जब वह दवाई लेने गए तो वहां भी उनके नोट नहीं चले। परिवार वालों ने अपने रिश्तेदार और अन्य लोगों से नई करेंसी का जुगाड़ कर अस्पताल में जमा कराए, लेकिन इसके बाद अस्पताल वालों ने ज्यादा पैसों की मांग की।
परगन ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों से बलबीर के परिजन बैंक की लाइनों में खड़े हो रहे थे, लेकिन उन्हें पैसे नहीं मिले। जिस कारण बलबीर का इलाज नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई।
सभी आरोप बेबुनियाद है। अस्पताल में किसी को भी इलाज के लिए मना नहीं किया गया है। बड़े नोट लेने के लिए 24 नवंबर की तारीख तय है तो मना करने का सवाल ही नहीं उठता।
डॉ. संदीप, एमसी, डीएमसी अस्पताल
परगन ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों से बलबीर के परिजन बैंक की लाइनों में खड़े हो रहे थे, लेकिन उन्हें पैसे नहीं मिले। जिस कारण बलबीर का इलाज नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई।
सभी आरोप बेबुनियाद है। अस्पताल में किसी को भी इलाज के लिए मना नहीं किया गया है। बड़े नोट लेने के लिए 24 नवंबर की तारीख तय है तो मना करने का सवाल ही नहीं उठता।
डॉ. संदीप, एमसी, डीएमसी अस्पताल