{"_id":"646306ba57ebb8cb9706aa45","slug":"new-update-in-si-injured-in-firing-by-falling-pistol-in-chandigarh-2023-05-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh: पिस्टल गिरने से चली गोली से घायल SI की कहानी में मोड़-घटना के दिन हुई थी दो राउंड फायरिंग","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
Chandigarh: पिस्टल गिरने से चली गोली से घायल SI की कहानी में मोड़-घटना के दिन हुई थी दो राउंड फायरिंग
Tue, 16 May 2023 10:00 AM IST
निवेदिता वर्मा
परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
परीक्षित सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 16 May 2023 10:00 AM IST
सार
चंडीगढ़ पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह और वर्तमान में कार्यरत गैजेटेड अधिकारियों ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस के पास अधिकतर 9 एमएम पिस्टल है। इस पिस्टल की खासियत यह है कि जब तक इसकी मैगजीन को चार्ज (फायरिंग के लिए तैयार) न किया जाए, तब तक ट्रिगर दबाने पर भी गोली नहीं चलेगी।
विज्ञापन
चंडीगढ़ पुलिस
- फोटो : demo pics
विस्तार
चंडीगढ़ सेक्टर-26 पुलिस लाइन में बीते दिनों सब इंस्पेक्टर की सरकारी पिस्टल गिरने से चली गोली से घायल होने की घटना को अधिकारी हादसा बताने में कामयाब रहे लेकिन साक्ष्य बताते हैं कि यह महज एक हादसा नहीं बल्कि गोली जानबूझकर चलाई गई थी।
विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक सिक्योरिटी विंग में तैनात सब इंस्पेक्टर के वर्दी बदलने के दौरान सरकारी पिस्टल गिरने के बाद अचानक गोली चलने से यह घटना हुई और उस वक्त एक राउंड फायर हुआ था जबकि साक्ष्य बताते हैं कि सरकारी पिस्टल से एक नहीं बल्कि दो राउंड फायरिंग हुई थी, जिसके सबूत घटनास्थल पर भी मौजूद थे। मौके पर पहुंची पुलिस को एक की जगह दो कारतूस के खोल, 8 कारतूस समेत 9 एमएम पिस्टल मैगजीन के साथ मिली थी।
विज्ञापन
पुलिस की कहानी को सही मान भी लिया जाए कि पिस्टल गिरने से गोली चली थी, तो भी सवाल उठता है कि आखिर पिस्टल गिरने पर एक के बाद एक दो राउंड फायर कैसे हो सकते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं की घटना के दिन पिस्टल गिरने से नहीं बल्कि जानबूझकर किसी ने फायर किया, जोकि हादसा नहीं बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है। इसके तहत बेवजह सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल करते हुए आपराधिक कृत्य करने वाले व्यक्ति पर आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए। हालांकि, इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।
विज्ञापन
मैगजीन चार्ज किए बगैर ट्रिगर दबाने पर भी नहीं हो सकता फायर
चंडीगढ़ पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी जगबीर सिंह और वर्तमान में कार्यरत गैजेटेड अधिकारियों ने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस के पास अधिकतर 9 एमएम पिस्टल है। इस पिस्टल की खासियत यह है कि जब तक इसकी मैगजीन को चार्ज (फायरिंग के लिए तैयार) न किया जाए, तब तक ट्रिगर दबाने पर भी गोली नहीं चलेगी। पिस्टल से फायर करने के लिए सबसे पहले गन के बैरल के ऊपर लगे हैमर को पीछे खींचना होता है। ऐसा करने के साथ ही मैगजीन चार्ज हो जाती है और एक बार ट्रिगर दबाने पर एक ही फायर होगा दूसरे फायर के लिए फिर से ट्रिगर को दबाना होगा जबकि रिवाल्वर में किसी भी हैमर को खींचने या मैगजीन को चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। ट्रिगर दबाने के साथ ही बंदूक से फायर हो जाता है।
अधिकारियों के गले की फांस बनी कहानी
घटना को लेकर बताई गई पुलिस की कहानी अब अधिकारियों के गले की फांस बन गई है। दरअसल अमर उजाला पड़ताल की भनक अधिकारियों को भी लग गई जिसके बाद घटना के दौरान चली गोलियां और बरामद कारतूस के खोल की संख्या ने पुलिस के सामने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी हैं। पुलिस यदि अभी भी एक गोली चलने की बात पर कायम रहती है तो उन सबूतों और गवाहों का क्या जो पूरी घटना का ब्यौरा साक्ष्य के साथ रख चुके हैं। वहीं, पुलिस इस बात को मान लेती है कि घटना के दिन दो गोलियां चली थीं, तो गोली चलाने वाले पर एफआईआर दर्ज न करने की वजह बताना मुश्किल हो जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम में एक सवाल यह भी उठता है कि मौका ए वारदात पर पहुंचे अधिकारियों के सामने ऐसी क्या वजह या दबाव था जो पूरे घटनाक्रम को गोलमाल कर लीपापोती करने की आवश्यकता पड़ गई।
एसएसपी के आदेश का किया उल्लंघन
घटना के महज 5 दिन पहले 19 अप्रैल को एसएसपी सिक्योरिटी मनीषा चौधरी ने आदेश जारी किया था कि पुलिस के सिक्योरिटी विंग का कोई भी सुरक्षा अधिकारी, पायलट, एस्कॉर्ट, चौकीदार, गार्ड और अन्य ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी हथियार और गोला बारूद को सरकारी ड्यूटी के अलावा न तो अपने घर ले जाएंगे और न ही किसी अन्य स्थान पर। आदेश में कहा गया है कि अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद हथियार को पुलिस लाइन में या किसी थाने के नजदीकी स्टोर रूम (मालखाना) में हस्ताक्षर और रसीद के साथ जमा कराना होगा।