पुलिस की ये करतूत पढ़कर शर्म आएगी आपको
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जिले में छह अगस्त को एक बच्चे को अपहरण करने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। सौभाग्य से चालीस घंटे बाद बच्चा मिल गया। पुलिस ने इस मामले में बच्चे के स्कूल की दो बसों के तीन कर्मचारियों, एक महिला सहायक और उसकी छोटी बच्ची को भी उठा लिया।
महिला को हवालात में यातना देने के साथ उसकी बेटी को बिना पानी तड़पाया गया। पुलिस ने एक दिन बाद एक दिन के बाद दोनों को छोड़ दिया।
पुलिस पर आरोप है कि स्कूल की दो बसों के उठाए गए तीन कर्मचारियों को पुलिस ने करेंट लगाए, उल्टा लटकाया और टांगों में डंडे फंसाकर उनके ऊपर खड़े होकर पीटा गया।
मानवाधिकार आयोग से न्याय दिलाने की मांग
पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने अमृतसर में पुलिस द्वारा तीन लोगों को अमानवीय यातनाएं देने के आरोप में उनका मुंह बंद करने के लिए दबाव बनाने की निंदा की है। उन्होंने गहरी चिंता जताई है।
प्रो. चावला ने पंजाब मानवाधिकार आयोग को एक पत्र भी भेजा है। प्रो. चावला ने आयोग से मांग की है कि पीड़ितों को न्याय दिया जाए। तीन युवकों को करेंट लगाने की घटना की जांच पंजाब पुलिस से नहीं, किसी अन्य एजेंसी द्वारा करवाई जाए।
असली अपराधियों को ढूंढ नहीं पाई पुलिस
प्रो. चावला ने अपने पत्र में कहा कि लगभग चालीस घंटे बाद वह बच्चा घर पहुंच गया। बच्चे को अपहरणकर्ता छोड़ गए या क्या हुआ, अब तक पुलिस नहीं बता सकी। असली अपराधियों को आज तक पुलिस ढूंढ नहीं पाई।
बच्चा मिलने के बाद इन तीनों को थाने से छोड़ दिया। कुछ दिन तक इनका अस्पताल में इलाज हुआ। अब भी वे उन मानसिक चोट से बाहर नहीं निकले, जो पुलिस ने इन्हें दी गई थी।