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पंजाब: लुधियाना में पकड़ा गया फर्जी कॉल सेंटर, 27 गिरफ्तार, यूके-यूएस के लोगों को बनाते थे शिकार

Fri, 02 Jul 2021 02:42 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 02 Jul 2021 02:42 AM IST
सार

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपियों के साथी विदेश में भी बैठे हैं। वहां के खातों के नंबर देकर पैसे ट्रांसफर करवाते थे और फिर हवाला व बिटक्वाइन के जरिये पैसे मंगवाते थे। पुलिस के अनुसार आरोपी लखन दिल्ली से इसकी ट्रेनिंग लेकर आया था। पुलिस मामले की जांच करने में जुटी है।

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Ludhiana police caught fake call center
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लुधियाना के पाश इलाके पक्खोवाल रोड पर चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर डीसीपी सिमरतपाल सिंह ढींढसा, एडीसीपी रुपिंदर कौर भट्टी की अगुवाई में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी यूके और यूएस के लोगों से बात कर हवाला और बिटक्वाइन के जरिये मोटी रकम ऐंठते थे। इनके कब्जे से विभिन्न कंपनियों के 14.5 लाख की नकदी, 31 मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान बरामद हुआ है। गिरफ्तार आरोपियों में चार अफ्रीकी भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि लखन अब्रोल, जतिन, अमित के साथ कुछ अन्य इस गिरोह का संचालन कर रहे थे। बाकी बतौर कर्मचारी काम कर रहे थे।  

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पुलिस के पास सूचना थी कि आरोपी वीआईसीआई डायल सॉफ्टवेयर की मदद से यूके, यूएसए और विभिन्न देशों में रहने वाले नागरिकों का डाटा हासिल कर लेते थे फिर डिपार्टमेंट ऑफ वर्क एंड पेंशन के फर्जी अधिकारी बनकर उनके मोबाइल नंबर पर कॉल करते। उनकी फ्रॉड रिपोर्ट का डर दिखाकर उन्हें धमकाया जाता कि उन पर टैक्स चोरी का केस दर्ज हो सकता है। इसी आड़ में वे विदेशियों से हवाला के माध्यम से लाखों रुपये की मोटी रकम पंजाब मंगाया करते थे। इस अवैध धंधे को चलाने के लिए गिरोह के सदस्य फर्जी आईडी का भी इस्तेमाल करते थे।
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पुलिस कमिश्नर ने बताया कि मुख्य आरोपियों में इस्लामिया रोड निवासी सोमल सूद, जोशी नगर गली नंबर 9 निवासी लखन अबरोल, इसा नगरी निवासी केन थापर और माधोपुरी प्रेम गली निवासी जतिन कालरा व अमित शामिल हैं। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपियों ने जिस जगह पर दफ्तर बनाया था, उसके बाहर एक निजी फोन कंपनी का बोर्ड लगा रखा था। अंदर सभी लोग कंप्यूटर पर हेडफोन लगाकर प्रोफेशनल तरीके से बात करते थे। बताया जा रहा है कि मामले का खुलासा तब हुआ जब विदेश से हवाला के जरिये 12 लाख रुपये मंगाए गए, जिसकी भनक पुलिस को लग गई।
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सॉफ्टवेयर के जरिये कॉल करते थे
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी सॉफ्टवेयर के जरिये कंप्यूटर से कॉल करते थे। जब सामने वाला बटन दबाता तो आरोपियों के पास कॉल ट्रांसफर हो जाती थी। उसके बाद ठगी का खेल शुरू होता था। कस्टमर को भरोसे में लेने के बाद आरोपी सीनियर से बात करवाने की बात करते थे। सॉफ्टवेयर ऐसे होते थे कि एक दिन का 25 हजार रुपये तक किराया देते थे। उन्होंने कहा कि विदेशियों को झांसे में लेने के बाद एक हजार डालर से लेकर सौ डालर तक सौदा करते थे। जहां वह मान जाए वहीं सौदा तय हो जाता था।

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