वर्दी ने दिए जख्म, कोर्ट का मरहम...फिर भी गम
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पत्नी को नाबालिग बता उसे पुलिस ने 6 माह जेल में रखा। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने न्याय दिया, लेकिन पत्नी की शादी कहीं और हो गई है। ये सनसनीखेज मामला सामने आया रोहतक में। पुलिस की गलती के कारण साढ़े 6 माह जेल में रहे बेकसूर युवक को बरी कर दिया गया।
साथ ही कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि पीड़ित को 2 लाख रुपये मुआवजे दिया जाए। साबित हो गया कि पुलिस की गलत जांच के कारण बेकसूर जेल में रहा और उसकी पत्नी की और कहीं शादी कर दी गई।
एडीजे सीमा सिंहल की अदालत ने एसपी को मामले के जांच अधिकारी रहे एएसआई जयदीप सिंह के खिलाफ भी विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने माना कि पुलिस जिस विवाहित लड़की को नाबालिग बता रही है, वह बालिग है और दोनों ने अपनी मर्जी से शादी की थी।
वकील विक्रम ओहल्याण ने बताया कि झज्जर जिले के गांव काहड़ी निवासी प्रवीण कुमार लाखनमाजरा की एक लड़की से प्रेम करता था। दोनों घर से चले गए और फरवरी 2014 में झज्जर कोर्ट में शादी कर ली। लड़की ने अदालत में शपथ पत्र दिया कि उसने अपनी मर्जी से प्रवीण के साथ शादी की है। युगल ने खुद को परिजनों से खतरा बताया तो कोर्ट ने दोनों को झज्जर पुलिस के सैफ हाउस भेज दिया।
ट्रैक कोर्ट में यूं साबित हुई पुलिस की गलती
13 फरवरी 2014 को लड़की के पिता ने लाखनमाजरा थाने में शिकायत दी कि उसकी लड़की को प्रवीण शादी करने की नियत से भगा कर ले गया है। लड़की की जन्मतिथि 2 फरवरी 1997 है, जिसके आधार पर उसकी उम्र 18 साल से कम है। स्कूल के माइग्रेशन प्रमाण पत्र में भी यहीं उम्र है।
पुलिस ने प्रवीण के खिलाफ लड़की को बहला-फुसलाने और शादी की नियत से नाबालिग को ले जाने की धारा 363-366ए के तहत केस दर्ज कर लिया। युवक को गिरफ्तार कर सुनारिया जेल भेज दिया। तभी से एडीजे सीमा सिंहल की महिला फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।
बचाव पक्ष ने अदालत में आंगनबाड़ी का रिकॉर्ड पेश किया। वकील ने बताया कि जिस दिन लड़की ने शादी की, रिकॉर्ड के आधार पर उस दिन उसकी उम्र 18 साल 10 माह रही। लड़की ने झज्जर कोर्ट में शपथ पत्र दिया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से शादी कर रही है।
जब पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत लड़की के मजिस्ट्रेट बयान दर्ज करवाए, तब भी उसने यही कहा कि उसने अपनी मर्जी से प्रवीण के साथ शादी की है। वह उसे अपना पति मानती है और वह बेकसूर है।
न्याय मिला लेकिन देर हो चुकी थी
जांच अधिकारी पुलिसकर्मी की ओर से कोर्ट में चालान पेश किया गया। इसमें लड़की के पिता के बयान व उसके द्वारा दिए गए लड़की के माइग्रेशन प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया। इसमें दर्ज डेट ऑफ बर्थ के आधार पर लड़की की उम्र शादी के समय 18 साल से कम बनती है। लेकिन पुलिस ने प्रमाण पत्र के साथ जारी करने वाले अधिकारी का शपथ पत्र नहीं लगाया। न ही प्रमाण पत्र के संबंध में कोई रिकॉर्ड पेश किया।
अदालत ने प्रमाण पत्र को मानने से इंकार कर दिया और प्रवीण को बरी कर दिया। माना कि जांच अधिकारी ने सही ढंग से जांच न करके एक निर्दोष को फंसाया है। एसपी को जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने व डीसी के माध्यम से सरकार को दो लाख रुपये मुआवजा पीड़ित युवक को देने की हिदायत दी है।
केस में मजिस्ट्रेट के सामने पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 164 के बयान दर्ज करवाए। इसमें लड़की ने कहा कि वह अपनी मर्जी से प्रवीण के साथ गई और शादी की। केस में पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 161 के तहत भी बयान दर्ज किए कि लड़की ने कहा कि प्रवीण शादी की नियत से उसे बहका-फुसला कर ले गया है। यहां पर कोर्ट ने माना कि पुलिस का मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज होने के बाद खुद बयान लिखना, गैर जरूरी है।
कोर्ट के फैसले से पहले लड़की की दूसरी जगह शादी
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि प्रवीण साढ़े छह माह जेल में रहा। पीछे से लड़की के परिजनों ने उसकी शादी दूसरी जगह कर दी। जबकि उसकी लव मैरिज का केस अदालत में चल रहा था। कोर्ट ने माना कि पुलिस की गलती से कानूनी तरीके से शादी करने वाला युगल न केवल अलग हो गया, बल्कि सामाजिक तौर पर भी युगल को शर्मिंदा होना पड़ा। कानूनी तौर पर अब भी लड़की प्रवीण की पत्नी है, क्योंकि बिना तलाक वह अपनी मर्जी से भी दूसरी जगह शादी नहीं कर सकती।