चुनाव में क्यों गर्माया नशे का मुद्दा?, जानिए पूरी कहानी
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नशा पंजाब की जवानी को दीमक की तरह खा रहा है। गांवों से लेकर शहरों के डिस्कोथेक और क्लबों तक हर जगह नशीले पदार्थ उपलब्ध हैं। पुलिस ने बीते साल अरबों के ड्रग रैकेट का पर्दाफाश कर कई लोगों को गिरफ्तार कर बड़ी तादाद में नशीले पदार्थों की रिकवरी की। इस मुददे को पंजाब में सभी विपक्षी पार्टियां भूनाने की कोशिश कर रही है। क्योंकि जांच की आंच में कई सत्ताधारी नेता भी झुलस चुके हैं। चुनाव से पहले विपक्ष बना मुद्दा अब चुनाव में भी गर्मा गया है।
अरबों के ड्रग रैकेट का खुलासा
बॉक्सर विजेंदर का नाम उछला
पूर्व डीएसपी जगदीश भोला निकला मास्टरमाइंड
एनआरआई अनूप सिंह काहलों से शुरुआती पूछताछ में ही पुलिस को पता चल गया था कि वह तो सिर्फ एक प्यादा है। रैकेट का मास्टरमाइंड अर्जुन अवार्डी पूर्व डीएसपी जगदीश भोला है।
काहलों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने भोला की मोहाली स्थित कोठी पर रेड की, पर वह नहीं मिला, सिंथेटिक ड्रग का केमिकल जरूर बरामद हुआ। भोला इतना शातिर था कि उसके काहलों जैसे कई नेटवर्क थे। वह हर नेटवर्क से बात करने के लिए अलग मोबाइल नंबर इस्तेमाल करता था। जांच के दौरान यूपी पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी किरपाल सिंह, हरप्रीत सिंह व एनआरआई कुलवंत सिंह को गिरफ्तार कर सिंथेटिक ड्रग बनाने का तीस किलो मैटीरियल बरामद किया गया। पर भोला पुलिस को चकमा देता रहा
आखिर काबू आया शातिर भोला
आखिर नवंबर-13 की शुरुआत में पुलिस ने दिल्ली के पास से जगदीश भोला को उसके चार साथियों समेत गिरफ्तार कर ही लिया। उसके पास से 18 करोड़ की ड्रग भी बरामद की गईं। जिसके बाद ड्रग रैकेट की परतें खुलती गईं। पुलिस को पता चला कि भोला का नशे का कारोबार कनाडा, नॉर्थ अमेरिका व यूरोप तक फैला हुआ है। जिसमें करीब पचास एनआरआई भी शामिल हैं। भोला ने वियतनाम और चीन के माहिर रखे हुए थे। जो खास तरीके से ड्रग्स की पैकिंग करते थे। ताकि वह जांच में पकड़ी न जाए।
बिट्टू औलख गिरफ्तार, अजनाला पर लगा दाग
जगदीश भोला से पूछताछ के दौरान पुलिस ने नौ जनवरी को इस केस में मनिंदरजीत सिंह औलख उर्फ बिट्टू और जगजीत चाहल को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग बरामद कीं। चाहल की हिमाचल में फार्मा फैक्ट्री थी। बिट्टू औलख यूथ अकाली दल का नेता था।
औलख ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने सरकारी गाड़ियों में देश के दूसरे हिस्सों में ड्रग्स सप्लाई कीं। माना जाता है कि जो एस्कॉर्ट वाहन अजनाला और उनके बेटे व मुख्य संसदीय सचिव बोनी अजनाला को मिले थे, औलख ने उन्हीं का इस्तेमाल नशों की सप्लाई के लिए किया। इस खुलासे के बाद पंजाब की सियासत गर्मा गई। हालांकि अजनाला ने कहा उनका औलख से कोई संबंध नहीं है। चुनाव में अजनाला की टिकट कट गई।
भोला ने फोड़ा मजीठिया बम, उबली सियासत
जगदीश भोला ने मोहाली अदालत में पेशी के दौरान पहले यह कह कर सनसनी फैला दी कि तीन अकाली कैबिनेट मंत्री नशे के इस कारोबार में लिप्त हैं। फिर आरोप लगाया कि कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ही नशे के इस कारोबार के पीछे हैं। जिसके बाद पंजाब की सियासत उबल गई। मजीठिया का नाम आते ही विपक्ष ने जोरदार हमला बोल दिया। सीएम, डिप्टी सीएम से लेकर डीजीपी सुमेध सैनी तक मजीठिया के बचाव में आ गए।
कैबिनेट मंत्री के बेटे का नाम, पंजाब कांग्रेस ने आंदोलन छेड़ा
एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट की पूछताछ में भोला ने मजीठिया का नाम लेने के साथ ही कैबिनेट मंत्री सरवन सिंह फिल्लौर के बेटे दमनवीर सिंह भी नशे के कारोबार में मददगार बता दिया। इसके बाद ईडी ने दमनवीर को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया भी था। बिक्रम सिंह मजीठिया का नाम आने के बाद कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने इस केस की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा की अगुवाई में आंदोलन छेड़ा गया। सरकार पुलिस जांच पर ही अड़ी रही। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी पुलिस जांच की हिमायत की।
क्या पक्ष्ा क्या विपक्ष्ा, चुनाव प्रचार में खुब चल रहे सियासी तीर
- आप कनवीनर अरविंद केजरीवाल ने लुधियाना में रोड शो के दौरान नशों के मुद्दे को लेकर बिक्रम मजीठिया पर सीधा निशाना साधा।
- कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नशों के मुद्दे पर अकालियों पर जम कर वार कर रहे हैं।
- प्रताप सिंह बाजवा ने भी चुनाव प्रचार के दौरान अकालियों पर नशों के मुद्दे को लेकर हमला बोला।
- अरुण जेटली ने भी माना कि नशों का मुद्दा अहम है।
बेलन ब्रिगेड भी मैदान में
नशों के खिलाफ कई समाजसेवी संगठन चुनाव के दौरान सक्रिय हैं। लुधियाना में आर्किटेक्ट अनीता शर्मा की अगुवाई में बनी बेलन ब्रिगेड ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। बेलन ब्रिगेड सभी उम्मीदवारों से वादा ले रही है कि वे चुनाव में नशीले पदार्थ नहीं बांटेंगे। नशों को किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं देंगे। साथ नशों के खिलाफ महिलाओं को भी लामबंद कर रही है।