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कुमार ब्रदर्स के खिलाफ धोखाधड़ी मामले में चालान दाखिल, जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 21 Jun 2017 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 21 Jun 2017 09:15 AM IST
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 Kumar Brothers fraud case, chandigarh news
गिरफ्तार - फोटो : gettty
सेक्टर-11 की चर्चित केमिस्ट शॉप ऑनर कुमार ब्रदर्स विनोद कुमार, प्रमोद कुमार और अश्वनी कुमार के खिलाफ थाना पुलिस ने जिला अदालत में चालान दाखिल कर दिया है। संबंधित केस डीसी के आदेश पर एस्टेट आफिस की शिकायत पर दर्ज किया गया था। 400 से अधिक पेज के चालान में पुलिस ने 11 गवाह बनाए हैं। पुलिस ने तीनों भाइयोें के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत आरोप लगाए हैं। अगली तारीख 28 अगस्त को तीनों भाइयों के खिलाफ आरोप तय हो सकते हैं।
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सरकारी शोरूम का प्लॉट हड़पने की जालसाजी कोर्ट में बेनकाब होने के बाद डीसी के आदेश पर सेक्टर-11 पुलिस ने तीनों भाइयों के खिलाफ 20 मार्च 2015 को धोखाधड़ी, फर्जी कागजात बनाने व एक साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचने का केस दर्ज किया था। तीनों को गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी।
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पुलिस की ओर से चालान में आरोप लगाया गया है कि तीनों भाइयों ने सोची-समझी साजिश के तहत करोड़ों की कीमत के शोरूम का प्लॉट हड़पना चाहा और इसके लिए एस्टेट ऑफिस की बिल्डिंग ब्रांच से फर्जी कागजात भी तैयार करवाए।
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400 पेज के चालान में पुलिस ने बनाए 11 गवाह

 Kumar Brothers fraud case, chandigarh news
गिरफ्तार - फोटो : file photo
ये है मामला
सेक्टर-2 निवासी कुमार ब्रदर्स ने 2012 में जिला अदालत में दायर एक याचिका में कहा था कि उनके पिता रामेश्वर दास ने मृत्यु से पहले अनरजिस्टर्ड विल में सेक्टर-11 की मार्केट के एससीओ नंबर-25 का प्लॉट उनके नाम कर दिया था। उन्होंने इससे जुड़े बिल्डिंग ब्रांच के एसडीओ की तरफ से जारी एक कागज भी पेश किया था। तत्कालीन सिविल जज ने उनकी याचिका पर 10 दिसंबर 2012 को डिक्री के आदेश कुमार ब्रदर्स के पक्ष में किए थे। इसके खिलाफ प्रशासन ने एडिशनल सेशन जज की कोर्ट में अपील की।

इसमें कहा गया कि प्लॉट कभी किसी को अलॉट ही नहीं हुआ, तो वे कैसे तीनों भाइयों के पिता की विल के आधार पर उन्हें दे दें। जिरह के बाद तत्कालीन जज रूपम सिंह ने 27 फरवरी को कुमार ब्रदर्स के प्लॉट पर क्लेम को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ये साबित हो रहा है कि कभी शोरूम के प्लॉट की अलॉटमेंट कुमार ब्रदर्स के नाम पर हुई ही नहीं है। इसके बाद डीसी मोहम्मद शाइन ने एईओ उपकार सिंह को आदेश दिए कि पूरे मामले की जांच करें। उपकार सिंह ने जांच में पाया कि कोर्ट में बिल्डिंग ब्रांच का जो कागज कुमार ब्रदर्स ने दिखाया था वह फर्जी था।

बिल्डिंग ब्रांच से ऐसा कागज जारी ही नहीं हुआ था। इस पर उन्होंने अपनी रिपोर्ट डीसी को दी और उनके आदेश पर उपकार सिंह ने खुद बतौर शिकायतकर्ता बन तीनों कुमार ब्रदर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई।
 
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