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केनरा बैंक से दो करोड़ के लोन का फ्रॉड, उद्योगपति गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Thu, 10 Mar 2016 09:39 AM IST
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फर्जी कॉल
- फोटो : demo pic
केनरा बैंक से उद्योग के लिए करीब दो करोड़ रुपये का लोन लेकर यूनिट को शिफ्ट करने का प्रयास करने के मामले में नामजद एक उद्योगपति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ दिसंबर 2015 में सेक्टर-14 थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था। ये कार्रवाई केनरा बैंक के चीफ मैनेजर अशोक कुमार शर्मा की शिकायत पर हुई थी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पंचकूला निवासी उद्योगपति एनडी पराशर ने केनरा बैंक से दो करोड़ रुपये का लोन लिया था। ये लोन सेक्टर-16 ब्रांच से लिया गया था। बताया गया है कि जिस यूनिट को लगाने के लिए लोन लिया गया था, उसके लिए दो करोड़ में से एक करोड़ 13 लाख रुपये की राशि बैंक से संबंधित उद्योगपति के नाम जारी हो चुकी थी, लेकिन लोन की बकाया राशि में से अभी 87 लाख रुपये बैंक को देना था। जोकि आरोपी उद्योगपति के खाते में है। इस खाते को फिलहाल सीज कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार आरोपी उद्योगपति ने पंजाब डेराबस्सी में जिस यूनिट को लगाने के लिए लोन लिया था उस यूनिट में मशीनें लगाए जाने के बाद उसे लोन की किश्त जारी होते ही शिफ्ट कराने का काम शुरू कर दिया गया था। दो करोड़ रुपये लोन की वजह से उक्त यूनिट की मशीनरी बैंक संपत्ति थी, जिसे बैंक अनुमति के बगैर शिफ्ट नहीं किया जा सकता था।
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लिहाजा इसकी सूचना मिलते ही बैंक हरकत में आया था और बैंक के चीफ मैनेजर ने इस मामले में उद्योगपति के खिलाफ दिसंबर 2015 में केस दर्ज कराया था। इस मामले की जांच थाना सेक्टर-14 के उपनिरीक्षक मुलखराज कर रहे थे। पता ये भी चला है कि उपरोक्त संदर्भ में मामला दर्ज होने के बाद उद्योगपति शेष एक करोड़ 13 लाख रुपए बैंक के खाते में वापस जमा कराने के लिए तैयार है।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पंचकूला निवासी उद्योगपति एनडी पराशर ने केनरा बैंक से दो करोड़ रुपये का लोन लिया था। ये लोन सेक्टर-16 ब्रांच से लिया गया था। बताया गया है कि जिस यूनिट को लगाने के लिए लोन लिया गया था, उसके लिए दो करोड़ में से एक करोड़ 13 लाख रुपये की राशि बैंक से संबंधित उद्योगपति के नाम जारी हो चुकी थी, लेकिन लोन की बकाया राशि में से अभी 87 लाख रुपये बैंक को देना था। जोकि आरोपी उद्योगपति के खाते में है। इस खाते को फिलहाल सीज कर दिया गया है।
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जानकारी के अनुसार आरोपी उद्योगपति ने पंजाब डेराबस्सी में जिस यूनिट को लगाने के लिए लोन लिया था उस यूनिट में मशीनें लगाए जाने के बाद उसे लोन की किश्त जारी होते ही शिफ्ट कराने का काम शुरू कर दिया गया था। दो करोड़ रुपये लोन की वजह से उक्त यूनिट की मशीनरी बैंक संपत्ति थी, जिसे बैंक अनुमति के बगैर शिफ्ट नहीं किया जा सकता था।
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लिहाजा इसकी सूचना मिलते ही बैंक हरकत में आया था और बैंक के चीफ मैनेजर ने इस मामले में उद्योगपति के खिलाफ दिसंबर 2015 में केस दर्ज कराया था। इस मामले की जांच थाना सेक्टर-14 के उपनिरीक्षक मुलखराज कर रहे थे। पता ये भी चला है कि उपरोक्त संदर्भ में मामला दर्ज होने के बाद उद्योगपति शेष एक करोड़ 13 लाख रुपए बैंक के खाते में वापस जमा कराने के लिए तैयार है।