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खुलासाः मोटे मुनाफे के लालच में लाखों रुपये गवां रहे लोग
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 27 Jun 2016 10:01 AM IST
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इंश्योरेंस कंपनी
- फोटो : demo
एक अनुमान के मुताबिक देश में इंश्योरेंस में करीब हर साल तीन हजार करोड़ रुपये की ठगी होती है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आईआरडीए) में हर साल इंश्योरेंस से जुड़े ठगी की लाखों शिकायतें पहुंचती हैं। जानकारों का मानना है कि सिर्फ सावधानियां बरतकर ही बचा जा सकता है। जितने मामले दर्ज होते से उससे ज्यादा मामले तो सामने ही नहीं आते। एक बार अगर रकम चली जाती है तो पैसे मिलने की कम ही उम्मीद होती है।
पिछले साल 1 लाख 45 हजार शिकायतें
साल 2014-15 में देशभर से आईआरडीए को इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी 1.45 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं। जबकि 2013-14 में आईआरडीए को 2.11 लाख शिकायतें मिलीं। वहीं 2012-13 में 1.68 लाख इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी शिकायतें आईआरडीए को प्राप्त हुईं। इस समय यूटी पुलिस के ईओडब्ल्यू विंग और साइबर सेल के पास करीब 45 इंश्योरेंस से जुड़े ठगी के मामलों के जांच चल रही है।
बुजुर्गों को बनाते हैं शिकार
इंश्योरेंस से जुड़े ठगी के मामले देख रहे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील बीएस मक्कड़ बताते हैं कि ज्यादातर बुजुर्गों व रिटायर्ड लोगों को ठग अपनी बातों में फंसाते हैं और उनसे लाखों रुपये लेते है। पहले से किसी कंपनी में बंद इंश्योरेंस की डिटेल्स लेकर उन्हें फोन करते हैं। उन्हें लगता है कि सामने से बोलने वाला इंश्योरेंस कंपनी से ही बात कर रहा है। जिससे वह बातों आकर लाखों गवां बैठते हैं।
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बोनस व मोटे मुनाफे का झांसा देकर फंसाते हैं
जालसाज आईआरडीए, इंश्योरेंस कंपनी, बैंक कर्मचारी बनकर फोन करते हैं। ज्यादातर इन जालसाजों के झांसें में फंसे लोगों का कहना है कि ये ठग पुरानी अनक्लेम्ड पॉलिसी वापस दिलाने व अधिक बोनस देने का झांसा देकर लोगों को फंसाते हैं। एक बार जब कोई पैसे दे देता है तो उसके बाद वह उन पैसों को वापस लेने के लिए पैसे देता रहता है। ऐसे ही ठगी के शिकार हुए सेक्टर 49 के राजिंदर सिंह के साथ एक करोड़ चालीस लाख रुपये की ठगी हुई। पीड़ित को जालसाजों ने पॉलिसी पर ज्यादा मुनाफा व बोनस देने का लालच देकर ठग लिया। उन्होंने दिल्ली के एक ब्रोकर के जरिये पैसा इन्वेस्ट किया था। सेक्टर 45 के बलबीर सिंह के साथ 40 लाख रुपये की ठगी भी इसी तरह हुई थी। वह उनके कहने पर पॉलिसी में पैसे जमा कराते गए। जिसके बाद अब उन्होंने ईओडब्ल्यू में केस दर्ज कराया है।
ये बरतें सावधानियां
किसी पर विश्वास करके पैसे ट्रांसफर न करें। याद रखें कि आईआरडीए व अन्य कोई भी सरकारी कंपनी किसी को फोन कॉल नहीं करती।
अगर कोई ज्यादा बोनस व मुनाफा देने की बात कहे तो उस पर विश्वास न करें। बिना जरूरत व लालच में आकर कभी कोई पॉलिसी न लें।
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पिछले साल 1 लाख 45 हजार शिकायतें
साल 2014-15 में देशभर से आईआरडीए को इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी 1.45 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं। जबकि 2013-14 में आईआरडीए को 2.11 लाख शिकायतें मिलीं। वहीं 2012-13 में 1.68 लाख इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी शिकायतें आईआरडीए को प्राप्त हुईं। इस समय यूटी पुलिस के ईओडब्ल्यू विंग और साइबर सेल के पास करीब 45 इंश्योरेंस से जुड़े ठगी के मामलों के जांच चल रही है।
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बुजुर्गों को बनाते हैं शिकार
इंश्योरेंस से जुड़े ठगी के मामले देख रहे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील बीएस मक्कड़ बताते हैं कि ज्यादातर बुजुर्गों व रिटायर्ड लोगों को ठग अपनी बातों में फंसाते हैं और उनसे लाखों रुपये लेते है। पहले से किसी कंपनी में बंद इंश्योरेंस की डिटेल्स लेकर उन्हें फोन करते हैं। उन्हें लगता है कि सामने से बोलने वाला इंश्योरेंस कंपनी से ही बात कर रहा है। जिससे वह बातों आकर लाखों गवां बैठते हैं।
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बोनस व मोटे मुनाफे का झांसा देकर फंसाते हैं
जालसाज आईआरडीए, इंश्योरेंस कंपनी, बैंक कर्मचारी बनकर फोन करते हैं। ज्यादातर इन जालसाजों के झांसें में फंसे लोगों का कहना है कि ये ठग पुरानी अनक्लेम्ड पॉलिसी वापस दिलाने व अधिक बोनस देने का झांसा देकर लोगों को फंसाते हैं। एक बार जब कोई पैसे दे देता है तो उसके बाद वह उन पैसों को वापस लेने के लिए पैसे देता रहता है। ऐसे ही ठगी के शिकार हुए सेक्टर 49 के राजिंदर सिंह के साथ एक करोड़ चालीस लाख रुपये की ठगी हुई। पीड़ित को जालसाजों ने पॉलिसी पर ज्यादा मुनाफा व बोनस देने का लालच देकर ठग लिया। उन्होंने दिल्ली के एक ब्रोकर के जरिये पैसा इन्वेस्ट किया था। सेक्टर 45 के बलबीर सिंह के साथ 40 लाख रुपये की ठगी भी इसी तरह हुई थी। वह उनके कहने पर पॉलिसी में पैसे जमा कराते गए। जिसके बाद अब उन्होंने ईओडब्ल्यू में केस दर्ज कराया है।
ये बरतें सावधानियां
किसी पर विश्वास करके पैसे ट्रांसफर न करें। याद रखें कि आईआरडीए व अन्य कोई भी सरकारी कंपनी किसी को फोन कॉल नहीं करती।
अगर कोई ज्यादा बोनस व मुनाफा देने की बात कहे तो उस पर विश्वास न करें। बिना जरूरत व लालच में आकर कभी कोई पॉलिसी न लें।