ट्रेन में डकैती डालने वाला गिरोह हत्थे चढ़ा, हैरतअंगेज सच आया सामने, लूट के लिए अपनाते थे ये तरीका
चलती ट्रेन में यात्रियों के साथ लूटपाट और डकैती करने वाले एक गिरोह को रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने काबू किया है। गिरोह के चार सदस्य पुलिस के हत्थे चढ़ गए जबकि सरगना सहित तीन सदस्य फरार हो गए।
हालांकि पिछले छह महीने में लूटपाट की पांच घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन पिछले महीने हुई एक घटना ने आरपीएफ को चौकस कर दिया और इसके बाद आरपीएफ की दी गई दबिश में गिरोह को काबू कर लिया गया।
हैरानी की बात यह है कि यह गिरोह ट्रेन रोकने के लिए सिग्नल तक से छेड़छाड़ करते थे। सिग्नल रेड होने पर ट्रेन में डकैती व लूटपाट की घटना को अंजाम दिया जाता था। आरपीएफ जींद थाना प्रभारी सुरेश कुमार के अनुसार सात मई को दिल्ली से पठानकोट जा रही धोलाधार एक्सप्रेस में बरसोला गांव के पास कुछ लोगों ने लूटपाट की थी।
इसकी शिकायत हिमाचल प्रदेश के चंबा निवासी रमेश ने पठानकोट में दी थी। इस पर कार्रवाई करते हुए आरपीएफ ने सतर्कता बढ़ा दी। आरपीएफ को सूचना मिली कि सोमवार सुबह करीब चार बजे दिल्ली की ओर जाने वाली अवध-असम एक्सप्रेस ट्रेन में कुछ युवक लूट की घटना को अंजाम देने की तैयारी में है।
इस पर आरपीएफ की टीम को तैयार कर दिया गया। जैसे ही युवकों ने लूटपाट कर गांव बरसोला के पास चेन खींच कर ट्रेन को रुकवाया और उतर कर भागने लगे। इस पर ट्रेन में पहले से ही तैनात आरपीएफ के जवान नीरज व विनीत ने पीछा कर दबोच लिया।
सात मई की घटना को कभी नहीं भूल पाएंगे रमेश
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिला के गांव प्रियुगल निवासी रमेश कुमार दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। रमेश कुमार के अनुसार उन्होंने अपने घर जाने के लिए एसी कोच के बी-तीन में तीन सीट आरक्षित करवाई थी।
रात करीब डेढ़ बजे गेट के ठीक पास उनकी पत्नी व डेढ साल का बेटा सो रहे थे। एक सीट पर उनकी आठ साल की बेटी और एक सीट पर वे खुद सो रहे थे।
जींद से चलने के करीब दस मिनट बाद गाड़ी रुक गई। इसी दौरान एक व्यक्ति ने चाकू की नोक पर उनकी पत्नी के साथ लूटपाट की। किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए पत्नी ने जेवर पहले ही एक हैंड बैग में रख दिए थे।
लुटेरे यह बैग ले गए। इसके बाद उन्होंने एक दूसरी महिला के हाथ से पर्स छपटा, जिससे उसने हल्ला मचा दिया और इस पर ट्रेन में सो रहे लोग जागे तो देखा कि दो नकाबपोश युवक भाग रहे हैं।
इसके दस मिनट बाद ट्रेन चल पड़ी। उन्होंने पठानकोट पहुंच कर पुलिस को शिकायत दी। इसमें रमेश की पत्नी से लूटे गए बैग से तीन सोने की अंगूठी, एक गले की सोने की चेन, सोने के दो कानों के झुमके, 4350 रुपये की नकदी व 25 हजार रुपये के अन्य सामान से हाथ धोना पड़ा। वहीं रमेश कुमार पीड़ित ने बताया कि इस पूरे मामले में रेलवे की घोर लापरवाही सामने आई है।
मेरा परिवार खतरे में रहा है। यदि यह सब जनरल बोगी में होता तो समझ आता है लेकिन एसी कोच में सुरक्षा की कलई खुली है। मेरे बच्चे अभी तक डरे हुए हैं। इसका जवाब और भरपाई रेलवे को करना होगा।
लंबे समय से सक्रिय है गिरोह
आरपीएफ के बाद हालांकि पकड़े गए गिरोह में से एक युवक पानीपत के जाटलान रोड निवासी संदीप ने स्वीकारा है कि वह सात मई वाली घटना में शामिल था। इसके अलावा पकड़े गए सांपला के वार्ड नंबर एक निवासी विवेक, रोहतक के माता दरवाजा निवासी रमन, रोहतक की बालकनाथ कॉलोनी निवासी भारत पहले वाली घटना में शामिल नहीं रहे है।
पिछले दिनों कुछ घटनाएं हुई, जिसके बाद आरपीएफ काफी सतर्क थी। सोमवार रात को सूचना मिली कि इस प्रकार की घटना हो सकती है। इस पर आरपीएफ ने पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाया और चार आरोपियों को काबू कर लिया है। मुख्य आरोपी बड़ौदी गांव निवासी मोजी व उसके दो ओर साथी अभी फरार हैं। जल्द ही काबू कर लिया जाएगा। -सुरेश कुमार, थाना प्रभारी, आरपीएफ, जींद।