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शह और मात का खेल: कभी विजिलेंस को चलाते थे पूर्व डीजीपी सैनी, आज खुद विजिलेंस की गिरफ्त में
Thu, 19 Aug 2021 11:33 AM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 19 Aug 2021 11:33 AM IST
सार
अगस्त के पहले सप्ताह में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज हुई तो वे घिर गए। इस मामले में पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी इंजीनियर निम्रतदीप सिंह, सुरिंदर जीत सिंह, अजय कौशल, प्रद्युम्न सिंह और अमित सिंगला भी आरोपी हैं।
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विजिलेंस की गिरफ्त में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
54 साल की उम्र में भारत के सबसे कम उम्र के डीजीपी बनने का रिकार्ड बनाने वाले सुमेध सिंह सैनी को बुधवार को उसी विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने गिरफ्तार किया, जिसके कभी वे चीफ हुआ करते थे। उनकी इजाजत के बिना इसका पत्ता तक नहीं हिलता था। सैनी विजिलेंस के हर कदम और तमाम दाव पेंच के माहिर थे, लेकिन शतरंज की शह और मात के इस खेल में वे बुरी तरह से घिर गए और उसी विजिलेंस टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया, जो कभी उन्हें सैल्यूट करती थी।
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शह और मात का खेल पंजाब विजिलेंस ब्यूरो व डीजीपी सैनी के बीच एक साल पहले सितंबर 2020 में शुरू हुआ था। सैनी विजिलेंस की जांच टीम को हर मोड़ पर पटखनी देते आ रहे थे, लेकिन इस साल अगस्त के पहले सप्ताह में उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज हुई तो वे घिर गए।
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इस मामले में पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी इंजीनियर निम्रतदीप सिंह, सुरिंदर जीत सिंह, अजय कौशल, प्रद्युम्न सिंह और अमित सिंगला भी आरोपी हैं। विजिलेंस की टीम ने उसी दिन दबिश दी, लेकिन सैनी घर पर नहीं मिले। सितंबर 2020 में विजिलेंस ब्यूरो ने एक रियल इस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े कंपनी प्रबंधकों निम्रतदीप सिंह और सुरिंदरजीत सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में केस दर्ज किया था। इन पर आरोप था कि चो (पानी निकलने वाली जमीन) के रास्ते में रिहायशी कॉलोनी बसा दी गई। जिला अदालत ने चंडीगढ़ स्थित उस कोठी को अस्थायी रूप से अटैच करने के आदेश दिए थे, जहां पर सैनी किराए पर रह रहे हैं। इसके साथ ही अदालत ने यह आदेश भी दिया कि सैनी ढाई लाख रुपये का जो मासिक किराया देते हैं, वह भी सरकारी खजाने में जमा किया जाए।
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विजिलेंस की आंखों में धूल झोंकने के लिए बनाया था एग्रीमेंट
सितंबर 2020 में ही निम्रतदीप सिंह और उसके पिता को तीन नोटिस भेजे गए। इनमें उन्होंने दो का जवाब दिया और कहा कि उनका किराएदार से संपर्क नहीं हो पा रहा है, वह दिल्ली में हैं। इसके बाद एक और नोटिस उन्हें दिया गया, जिसका वे कोई उचित जवाब नहीं दे पाए। सैनी ने कोठी के किराए का एग्रीमेंट तैयार किया, लेकिन उसमें कई खामियां थीं। विजिलेंस की जांच टीम को पटखनी देने के लिए यह एग्रीमेंट पेश किया तो सैनी इसी में घिर गए। इसमें किसी भी गवाह के हस्ताक्षर नहीं थे, जबकि नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में बाकायदा एफिडेविट लगता है और उस पर ई-स्टांप लगती है। साथ ही दो गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं। इसी से साफ हो गया कि विजिलेंस की आंखों में धूल झोंकने के लिए यह एग्रीमेंट तैयार किया था।
सैनी ने स्थानीय अदालत में जमानत अर्जी दायर की, लेकिन जमानत नहीं मिली तो विजिलेंस को लगा कि सैनी को अब वह सलाखों के पीछे डाल सकती है। लेकिन 12 अगस्त को सैनी का हाथ फिर ऊपर आ गया, जब हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। इससे सैनी को लगने लगा कि उनका बचाव हो गया, पर विजिलेंस की टीम भी कहां हार मानने वाली थी। टीम ने एफआईआर में धाराएं जोड़ने का प्रयास किया तो सैनी ने दो दिन पहले आशंका जाहिर कर दोबारा हाईकोर्ट का रुख अख्तियार किया। जहां मंगलवार को उलटा डांट खानी पड़ी और अर्जी वापस लेनी पड़ी। इससे विजिलेंस ब्यूरो की टीम अचानक भारी हो गई और बुधवार को विजिलेंस की टीम ने सैनी को गिरफ्त में ले लिया।
सैनी ने स्थानीय अदालत में जमानत अर्जी दायर की, लेकिन जमानत नहीं मिली तो विजिलेंस को लगा कि सैनी को अब वह सलाखों के पीछे डाल सकती है। लेकिन 12 अगस्त को सैनी का हाथ फिर ऊपर आ गया, जब हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। इससे सैनी को लगने लगा कि उनका बचाव हो गया, पर विजिलेंस की टीम भी कहां हार मानने वाली थी। टीम ने एफआईआर में धाराएं जोड़ने का प्रयास किया तो सैनी ने दो दिन पहले आशंका जाहिर कर दोबारा हाईकोर्ट का रुख अख्तियार किया। जहां मंगलवार को उलटा डांट खानी पड़ी और अर्जी वापस लेनी पड़ी। इससे विजिलेंस ब्यूरो की टीम अचानक भारी हो गई और बुधवार को विजिलेंस की टीम ने सैनी को गिरफ्त में ले लिया।
विवाद और डीजीपी सैनी....
- 1991 में बलवंत सिंह मुल्तानी की हत्या के सिलसिले में मामला दर्ज किया गया। पूर्व आईएएस अधिकारी के बेटे की हत्या के मामले में एसआईटी ने 21 अगस्त 2020 को उनके खिलाफ हत्या का आरोप लगाया, क्योंकि इस मामले में दो अभियुक्त पूर्व पुलिसकर्मियों ने सैनी के खिलाफ गवाही दी। एसआइटी ने सैनी को इस पड़ताल में सहयोग करने के लिए बुलाया,लेकिन उन्होंने अग्रिम जमानत ले ली।
- जब 1997 में वे लंदन गए थे तब स्कॉटलैंड यार्ड ने उन पर हमले के बब्बर खालसा (परमार गुट) के प्रयास को नाकाम कर दिया था, तब से उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दे दी गई थी।
- 1994 में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल रवि वत्स की पिटाई की थी और उन्हें ‘अवैध’ रूप से हिरासत में रखा था। इस मामले ने पुलिस बनाम सेना का रूप ले लिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को इस विवाद को शांत करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
- जब वे बठिंडा के पुलिस प्रमुख थे, तब कथित तौर पर उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के साथ भी हाथापाई की थी। दोनों स्थानीय डिप्टी कमिश्नर की ओर से दी गई एक पार्टी में टकराए थे।
- 2009 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश टीएस ठाकुर, जो बाद में देश के मुख्य न्यायाधीश बने, ने भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश से शिकायत की थी कि सैनी ने कुछ न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के झूठे सबूत गढ़े हैं। आरोप लगे कि सैनी हाइकोर्ट के न्यायाधीशों के फोन भी टैप कर रहे हैं।
- 2005 में एक अंग्रेजी अखबार के पत्रकार को गिरफ्तार किया। सैनी ने इस गिरफ्तारी से पहले तत्कालीन डीजीपी एसएस विर्क या अमरिंदर सिंह से मशविरा नहीं लिया था। उन दोनों ने इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।
- सैनी के कार्यकाल में ही श्री गुरुग्रंथ साहब की बेअदबी की घटनाएं, कोटकपूरा व बहिबल कलां गोलीकांड हुआ तो 2015 में उन्हें हटा दिया गया। बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड में पूर्व डीजीपी सैनी एसआईटी के रडार पर हैं।
- जब 1997 में वे लंदन गए थे तब स्कॉटलैंड यार्ड ने उन पर हमले के बब्बर खालसा (परमार गुट) के प्रयास को नाकाम कर दिया था, तब से उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दे दी गई थी।
- 1994 में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल रवि वत्स की पिटाई की थी और उन्हें ‘अवैध’ रूप से हिरासत में रखा था। इस मामले ने पुलिस बनाम सेना का रूप ले लिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को इस विवाद को शांत करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
- जब वे बठिंडा के पुलिस प्रमुख थे, तब कथित तौर पर उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के साथ भी हाथापाई की थी। दोनों स्थानीय डिप्टी कमिश्नर की ओर से दी गई एक पार्टी में टकराए थे।
- 2009 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश टीएस ठाकुर, जो बाद में देश के मुख्य न्यायाधीश बने, ने भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश से शिकायत की थी कि सैनी ने कुछ न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार के झूठे सबूत गढ़े हैं। आरोप लगे कि सैनी हाइकोर्ट के न्यायाधीशों के फोन भी टैप कर रहे हैं।
- 2005 में एक अंग्रेजी अखबार के पत्रकार को गिरफ्तार किया। सैनी ने इस गिरफ्तारी से पहले तत्कालीन डीजीपी एसएस विर्क या अमरिंदर सिंह से मशविरा नहीं लिया था। उन दोनों ने इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।
- सैनी के कार्यकाल में ही श्री गुरुग्रंथ साहब की बेअदबी की घटनाएं, कोटकपूरा व बहिबल कलां गोलीकांड हुआ तो 2015 में उन्हें हटा दिया गया। बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड में पूर्व डीजीपी सैनी एसआईटी के रडार पर हैं।