फूड इंस्पेक्टर ने निगला जहर, अस्पताल में हुई मौत, सुसाइड नोट में लिखी मरने की पूरी वजह
विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप लगाकर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक इंस्पेक्टर ने जहरीला पदार्थ निगलकर आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें मृतक ने डीएफएससी एवं सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर व विभाग के दो सब इंस्पेक्टरों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा।
मूलरूप से छारा निवासी राकेश कुमार शर्मा (54) पिछले कुछ वर्षों से बहादुरगढ़ की कुबेर एन्क्लेव कॉलोनी में रह रहे थे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में इंस्पेक्टर राकेश बहादुरगढ़ ऑफिस में कार्यरत थे। रोजाना की तरह वह सोमवार को ड्यूटी पर आए। सुबह करीब 11 बजे राकेश कुमार ने फसलों में डाली जाने वाली दवा (जहर) निगल ली और अपने ड्राइवर को इसकी जानकारी दे दी।
इसके बाद ड्राइवर कृष्ण उसे नागरिक अस्पताल में लेकर गया। यहां डॉक्टरों ने उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया लेकिन ड्राइवर व परिचित उसे झज्जर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ले गए। यहां उसका उपचार शुरू किया गया।
दोपहर बाद करीब दो बजे राकेश ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही पुलिस अस्पताल में पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। राकेश तीन बच्चों के पिता थे। उनकी दो बेटियों की शादी हो चुकी है, छोटा बेटा बीएससी कर रहा है।
सुसाइड नोट लिख व्हाट्सएप के जरिए परिचितों का भेजा
आत्महत्या करने से पहले इंस्पेक्टर राकेश ने एक सुसाइड नोट लिखा। इस नोट को अपने कुछ परिचितों के पास व्हाट्सएप के जरिये भेज दिया। एक पेज के इस सुसाइड नोट में डीएफएससी अशोक शर्मा, उप निरीक्षण रण सिंह, उप निरीक्षक शरद कुमार व सेवानिवृत्त निरीक्षक महावीर सिंह का नाम सामने आया है। अशोक शर्मा पर मेडिकल अवकाश रद्द करने, कार्यभार से मुक्त करने व मारपीट करने के आरोप हैं।
रण सिंह पर जान से मारने की धमकी देने व अभद्र व्यवहार करने का आरोप है। सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि शरद कुमार व महावीर सिंह ने गेहूं और सिलिंडर के घोटाले किए। जब मैंने आरटीआई मांगी तो मुझे जान से मारने की धमकी दी। इन चारों ने मुझे मरने को मजबूर कर दिया है। ये चारों मेरी मौत के जिम्मेदार हैं।
दिव्यांग थे इंस्पेक्टर राकेश, पांच महीने पहले सांपला से बहादुरगढ़ हुई बदली
करीब तीन साल पहले बीमारी के चलते इंस्पेक्टर राकेश का एक पांव डॉक्टरों ने काट दिया था। मृतक के भतीजे रजनीश का आरोप है कि उस दौरान उन्होंने जो छुट्टियां ली थीं, उस वजह से उन्हें निलंबित कर दिया था। बाद में कानूनी लड़ाई लड़ी तो वह बहाल हो सके। करीब पांच महीने पहले ही सांपला से बहादुरगढ़ उनकी बदली हुई थी।
परिजन बोले- अधिकारियों को रास नहीं आई ईमानदारी
अस्पताल में पहुंचे मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। राकेश की पत्नी सुषमा देवी ने कहा कि पिछले काफी समय से उनके पति को परेशान किया जा रहा था। अधिकारियों द्वारा धमकी दी जाती थी। इतना प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने यह कदम उठा लिया। भतीजे रजनीश ने कहा कि उनके चाचा राकेश ईमानदार थे।
ये ईमानदारी कुछ अधिकारियों को रास नहीं आ रही थी, अक्सर उन्हें परेशान किया जाता था। पुलिस प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच करे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
अधिकारी का फोन बंद
राकेश की मौत के दौरान अस्पताल परिसर में विभाग से केवल एक-दो ही कर्मचारी नजर आए। बाकी कोई अधिकारी नहीं आया था। उधर, जब इस संबंध में डीएफएससी से बात करनी चाही तो उनका मोबाइल बंद था।
चारों आरोपियों पर केस दर्ज
परिजनों की शिकायत पर चारों आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया गया है। गंभीरता से मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। -दिनकर यादव, एसएचओ, लाइनपार थाना