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Hindi News ›   Chandigarh ›   Fake currency of Rs 64000 recovered from Amritsar

अमीर बनने के लिए अपनाया ऐसा तरीका, दोनों दोस्त पहुंच गए जेल

Tue, 26 Dec 2017 03:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Updated Tue, 26 Dec 2017 03:05 PM IST
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Fake currency of Rs 64000 recovered from Amritsar
two held with fake currency - फोटो : अमर उजाला
बेरोजगारी में फंसे दो दोस्त अमीर बनने के लिए घर में ही नोट छापने लगे। पुलिस ने दोनों के पास से 64 हजार की जाली करेंसी बरामद की है। बरामद करेंसी में 100, 500 और दो हजार नोट शामिल हैं।
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पुलिस अब दोनों आरोपियों को रिमांड लेकर पूछताछ में लगी है कि यह करेंसी कैसे चलाते थे और कहां-कहां इनका नेटवर्क है। पुलिस ने दोनों के पास से स्कैनर व प्रिंटर बरामद किया है। दोनों अमृतसर के गुरुनानक पुरा के रहने वाले हैं। दोनों की उम्र तीस के आसपास है।
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पुलिस कमिश्नर एसएस श्रीवास्तव कहते हैं कि जाली करेंसी बरामद होने का नोटबंदी के बाद महानगर में ऐसा पहला मामला है। जब नए नोटों की जाली करेंसी बरामद की गई हो। दोनों आरोपी बड़ी सफाई से नोट छापते थे, पहली नजर में पता ही नहीं चलता है कि नोट असली है या नकली। दोनों आरोपियों ने खुलासा किया है कि पहली बार उन्होंने सबसे पहले नोट शराब के ठेके व पेट्रोल पंप पर चलाया तो किसी को कोई शक नहीं हुआ।
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नोटों की होगो फोरेंसिक जांच

Fake currency of Rs 64000 recovered from Amritsar
2000 fake notes - फोटो : File Photo
उसके बाद उन्होंने रात में नोट छापना शुरू कर दिया। घर में ही दोनों ने प्रिंटर व स्कैनर की मदद से नोट की मशीन लगा ली। दोनों के खिलाफ थाना ए डिवीजन में मामला दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ चल रही है कि नोट छापने की उन्होंने कहां से ट्रेनिंग ली है, उनके गिरोह में कौन-कौन अन्य शामिल है।

नोटों की होगो फोरेंसिक जांच
नोटों की फोरेंसिक जांच होगी कि नोट में इस्तेमाल कागज और प्रिंट के लिए स्याही कौन सी उपयोग की गई है। पुलिस का मानना है कि नोट छापने के लिए स्पेशल कागज होता है और स्पेशल स्याही। ऐसे में नकली नोट छापने के लिए कागज कहां से आता था, और केमिकल रंग कौन से प्रयोग करते थे, इसका पता फोरेंसिक जांच में चलेगा।
 
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