400 लोगों के नपुंसकता केस में राम रहीम पर FIR
सीबीआई ने जबरन नपुंसक बनाने के मामले में डेरा सच्चा सौदा और उसके प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बुधवार को दर्ज एफआईआर में राम रहीम के साथ उनके तथाकथित धार्मिक संस्था के डॉक्टर व अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि राम रहीम के आदेश पर हरियाणा के सिरसा आश्रम में 400 भक्तों का जबरन नपुंसक बना दिया गया था।
सीबीआई के मुताबिक राम रहीम ने भक्तों से कहा था कि अगर वह नपुंसक बन जाते हैं तो उन्हें सीधे ईश्वर की प्राप्ति होगी और खुद राम रहीम उनके वाहक होंगे। उन्हीं भक्तों में से एक हंसराज चौहान उर्फ हक्की ने राम रहीम के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने 23 दिसंबर को सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में दर्ज कराई थी शिकायत
राम रहीम को सीबीआई का झटका उस समय लगा है, जब उन पर करोड़ों की लागत से बनी बहुचर्चित फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड रिलीज होने को तैयार है।
सीबीआई के मुताबिक एजेंसी ने याचिकाकर्ता हंसराज की ओर से कोर्ट में दाखिल याचिका को ही एफआईआर का आधार बनाया है। एजेंसी ने हरियाणा पुलिस में दायर मामलों और संबंधित सभी कागजातों को अपने कब्जे में ले लिया है। अदालत के आदेश पर हंसराज की मेडिकल जांच भी की गई थी, जिसमें उसे नपुंसक पाया गया।
एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 417, 326, 506 और 120बी के तहत दर्ज की गई है। गौरतलब है कि राम रहीम पर एक पत्रकार और डेरा के भक्त की हत्या का मुकदमा पहले से चल रहा है। इसके अलावा उन पर एक महिला भक्त के यौन उत्पीड़न का मुकदमा भी चल रहा है।
डेरा प्रमुख ने CBI के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती
डेरा सच्चा सौदा सिरसा में कथित तौर पर साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में सीबीआई जांच के एकल बेंच के फैसले को संत गुरमीत राम रहीम सिंह ने अपील के माध्यम से पंजाब-हरियाणा चुनौती दी है।
इस अपील पर एक्टिंग चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार और जस्टिस एजी मसीह की डिवीजन बेंच बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी। राम रहीम ने अपील में कहा है कि यदि कोई मर्जी से नपुंसक बनता है तो यह मानवाधिकार का हनन नहीं है। इसके अलावा हंसराज चौहान ने यह मामला 14 वर्ष बाद उठाया, वह भी सीधे हाईकोर्ट में। इससे पहले पुलिस से कोई शिकायत नहीं की गई।
यह भी कहा गया है कि जिस वक्त चौहान नपुंसक बनाए जाने का दावा कर रहा है, उस वक्त वह वयस्क था। ऐसे में यह उसकी मर्जी में ही हुआ। अपील में मांग की गई है कि एकल बेंच का फैसला निरस्त किया जाए और अपील की सुनवाई तक फैसले पर रोक लगाई जाए।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस के कानन की एकल बेंच ने हंसराज चौहान की याचिका को गंभीरता से लेते हुए मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। यह भी कहा था कि राज्य सरकार इस मामले की जांच नहीं कर सकी है, जबकि इस संबंधी आदेश भी दिया गया था।
साधुओं को नपुंसक बनाने पर केस दर्ज
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह ने साध्वियों की सुरक्षा के लिए अच्छे-भले लोगों को नपुंसक बनवा दिया। इस बात का खुलासा डेरे के ही एक पूर्व साधु हंसराज चौहान ने किया। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें भी डेरे के ही अस्पताल में ऑपरेशन कर नपुंसक बना दिया गया।
हंसराज चौहान ने 17 जुलाई 2012 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कहा था कि डेरा प्रमुख ने उन जैसे करीब 400 युवाओं को ‘भगवान के दर्शन’ के नाम पर नपुंसक बनाया है। उन्होंने 166 लोगों की नाम सहित सूची भी सार्वजनिक की है। हाईकोर्ट के आदेश पर शिकायतकर्ता हंसराज का चिकित्सीय परीक्षण भी हो चुका है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जस्टिस के. कानन ने प्रदेश सरकार को जांच के आदेश दिए थे। सरकार को जांच के लिए एक माह का समय दिया गया था। 17 दिसंबर 2014 को सरकार ने जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी।
सरकार के जवाब से असंतुष्ट न्यायाधीश ने कड़ी फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणियां कीं और 23 दिसंबर 2014 को इस मामले की जांच भी सीबीआई को सौंप दी। सोमवार को सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।
राम रहीम का विवादों से चोली दामन का साथ
इससे पहले भी डेरा सच्चा सौदा का विवादों से चोली दामन का साथ रहा है। डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा पर साध्वी यौन शोषण, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और रणजीत हत्याकांड का केस सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन है। अब अहम बात यह है कि पांचों मामलों में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की जांच से असंतुष्ट होकर जांच सीबीआई को सौंपी है।
साध्वी यौन शोषण से शुरू हुआ विवाद
डेरा सच्चा सौदा वर्ष मई 2002 से विवादों में आना शुरू हो गया था। मई 2002 में डेरा सच्चा सौदा में रहने वाली एक साध्वी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण का आरोप लगाया था।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए 24 सितंबर 2002 को मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी। जांच के बाद सीबीआई ने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण का केस दर्ज कर लिया था। यह मामला सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन है।
पत्रकार छत्रपति की हत्या का मामला
साध्वी यौन शोषण से संबंधित समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर डेरा श्रद्धालुओं ने 24 अक्तूबर 2002 को गालियां चलाईं। पुलिस चौकी के पास हुए इस हमले के दो आरोपियों को खैरपुर चौकी पुलिस ने मौके से ही दबोच लिया था।
हमले में गंभीर रूप से घायल हुए रामचंद्र को पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया था। यहां कुछ दिन इलाज करने के बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया था। वहां 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई थी।
हत्या करवाने का आरोप डेरा प्रमुख पर लगा था। बाद में हाईकोर्ट ने 10 नवंबर 2003 को पत्रकार छत्रपति और डेरे के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी। यह दोनों मामले भी सीबीआई कोर्ट में विचाराधीन हैं।
फकीरचंद मामले में भी हुई एफआईआर
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 22 फरवरी 2010 को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख पर एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 27 फरवरी 2010 को डेरा श्रद्धालुओं ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में बसों को आग लगाना शुरू कर दिया। सिरसा जिले में तीन बसों को फूंक दिया गया था।
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