{"_id":"b3110c79b38f72d0a3b6a79ba3057f56","slug":"doing-banking-job-on-fake-arms-license-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्म्स का फर्जी लाइसेंस बना कर रहा था बैंक में नौकरी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आर्म्स का फर्जी लाइसेंस बना कर रहा था बैंक में नौकरी
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Updated Sun, 11 Oct 2015 06:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आर्म्स का फर्जी लाइसेंस बनवा एक शख्स बैंक में कर रहा था नौकरी। पुलिस जांच में हुआ मामले का खुलासा। सनसनीखेज वारदात है हरियाणा के सोनीपत थाना का।
विज्ञापन
शहर पुलिस ने शुक्रवार को कालूपुर चुंगी से एक व्यक्ति को संदिग्धावस्था में घूमते हुए काबू किया था। ऐतिहातन व्यक्ति की तलाशी ली गई, तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। उसके कब्जे से दो आर्म्स लाइसेंस बरामद किए गए। एक ही नंबर के इन लाइसेंसों में एक ऑल इंडिया परमिट का था, वहीं दूसरा हरियाणा के परमिट का था।
विज्ञापन
पूछताछ में पता चला कि फर्जी लाइसेंस की फोटोकॉपी अपने मामा को देकर उसे भी एक बैंक के एटीएम में सिक्योरिटी गार्ड लगवा दिया था। पकड़ा गया यह व्यक्ति सुरेंद्र पांची जाटान निवासी है, जबकि सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाला मामा नरेंद्र निवासी हुल्लाहेड़ी है।
विज्ञापन
पुलिस ने दोनों को धोखाधड़ी का मामला दर्ज गिरफ्तार कर लिया और शनिवार को अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने इन्हें न्यायिक हिरासत में 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया है। अपनी तरह का यह पहला मामला है, जिससे सोनीपत पुलिस की भी हवाईयां उड़ गईं हैं। आरोपी सुरेंद्र के कब्जे से पुलिस ने 32 बोर का पिस्टल भी बरामद किया है।
गनहाउस का करता था काम, उठाया फायदा
पूछताछ में आरोपी सुरेंद्र ने बताया कि वह एक गनहाउस के लिए काम करता था। इसी का फायदा उठाते हुए उसने साल 2003 में हरियाणा परमिट का पिस्टल और गन का लाइसेंस बनवाया था। गन हाउस के लिए काम करते-करते वो डीसी कार्यालय आता-जाता था।
उसने वर्ष 2012 का ऑल इंडिया परमिट का लाइसेंस तैयार किया था। लाइसेंस के लिए कॉपी तो फार्म वाले से ली और लाइसेंस में जानकारी भरने के बाद लंच टाइम में डीसी ऑफिस में पड़ी मुहर लगा ली। मुहर लगाने के बाद हस्ताक्षर भी खुद कर लिए थे।
मामा को दी कॉपी तो वो भी लग गया नौकरी
पुलिस के अनुसार सुरेंद्र ने अपने फर्जी बनाए गए लाइसेंस की एक कॉपी मामा नरेंद्र निवासी हुल्लाहेड़ी को भी दे दी। इस कॉपी में मामूली फेरबदल कर नरेंद्र ने सुरेंद्र की जगह अपना नाम चस्पा दिया और उसकी फोटोकॉपी कर सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर नौकरी पा ली।
एएसआई अशोक, जांच अधिकारी ने बताया कि सुरेंद्र की जेब से दो लाइसेंस मिले थे। जांच की तो पता चला कि दोनों के सीरियल नंबर एक ही है। इसीलिए हमें शक हुआ। पूछताछ की तो उसने बता दिया कि इंडिया परमिट वाला लाइसेंस फर्जी बनवाया है। उसके मामा नरेंद्र को भी फर्जी लाइसेंस के बल पर नौकरी करने के लिए गिरफ्तार किया है।