पुलिस की एक दलील ने बढ़ाया रामपाल का रिमांड
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रामपाल के आश्रम में असलहों को एकत्र करने और भीड़ प्रबंधन का काम उसके दो बेटे और दो दामाद संभाल रहे थे। यही चारों लोग भीड़ को रामपाल के समर्थन में तैयार कर रहे थे और लोगों को गुमराह कर प्रशासन के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार कर रहे थे। पुलिस ने यह खुलासा मंगलवार को उस वक्त किया जब रामपाल को ड्यूटी मजिस्ट्रेट सोहनलाल की अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने इन्हीं चारों को गिरफ्तार करने का आधार बनाकर कोर्ट से रामपाल की फिर रिमांड मांगी। जिस पर कोर्ट ने रामपाल को छह दिन के लिए पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस की तरफ से रामपाल का सात दिन का रिमांड मांगा था।
करीब 23 मिनट कोर्ट के अंदर रहा रामपाल
एडवोकेट ने कहा कि रामपाल से मध्यप्रदेश के बैतूल आश्रम से भी असलाह बरामद करवाने के लिए निशानदेही करवानी है। पुलिस निशानदेही के लिए रामपाल को बैतूल मध्यप्रदेश में लेकर जा सकती है।
24 नवंबर को रामपाल की रिमांड पूरी होने के बाद 25 नवंबर को उसे फिर कोर्ट में करीब 4 बजकर 28 मिनट पर पेश किया गया। इससे पहले उसका सामान्य अस्पताल में मेडिकल टेस्ट करवाया गया। कोर्ट के समक्ष जब रामपाल पेश किया गया तो दरवाजा बंद कर दिया गया। वह करीब 23 मिनट कोर्ट के अंदर रहा और 4 बजकर 51 मिनट पर कोर्ट से बाहर निकला गया।
सरकार से खुलकर लेंगे पंगा
कोर्ट में पांच दिन के रिमांड के बाद दोबारा पेश हुए रामपाल के लिए पुलिस की तरफ से एडवोकेट ने कहा कि रामपाल ने अनुयायियों को गुमराह किया था। उसने अपने अनुयायियों को कहा था कि मेरे लिए मरोगे तो सीधे सतलोक में जाओगे, हम सरकार से खुलकर पंगा लेंगे।
आरएसएसएस के लेफ्ट राइट हैं रामपाल के बेटे
पुलिस के अनुसार रामपाल के बेटे मनोज व विरेंद्र आरएसएसएस (राष्ट्रीय समाज सेवा समिति) के लेफ्ट व राइट हैंड हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर रामकंवर उर्फ रामकुमार ढाका को आरएसएसएस का मुखिया बनाया हुआ है लेकिन, असल में दोनों बेटे व दोनों दामाद का ही इस पर पूरा नियंत्रण रखते थे।
पुलिस ने सात दिन का रिमांड मांगा था। कोर्ट ने रामपाल को छह दिन के रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने इस केस की कुछ अधूरी कड़ियों को जोड़ने के लिए रामपाल का कोर्ट से रिमांड हासिल किया है।
राजेश चौधरी, सरकारी वकील