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चंडीगढ़ रेप: पीसीआर यानी 'प्लीज कॉल फार रेप'
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 22 Dec 2013 12:48 AM IST
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चंडीगढ़ में दसवीं की नाबालिग छात्रा के साथ पुलिस कर्मियों के बलात्कार किए जाने के मामले में लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है।
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राजनीतिक दलों से लेकर आम नागरिकों में पुलिस को लेकर तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
इसी बीच भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि पीसीआर का नाम बदल देना चाहिए। पार्षद ने शनिवार को सेक्टर 15 में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि पीसीआर का मतलब अब हो गया है कि प्लीज काल फार रेप।
पीसीआर को बुलाने में शहरवासियों को डर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि अभी तक प्रशासन और पुलिस का कोई भी अधिकारी पीड़िता और उसके परिवार का हालचाल पूछने के लिए नहीं आया जबकि प्रशासक शिवराज पाटिल जगह जगह समारोह में मुख्य अतिथि बनकर जा रहे हैं।
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भाजपा पार्षद ने कहा कि पीड़ित लड़की और उसके भाई पर दबाव बनाने वाले पुलिसकर्मियों की जांच होनी चाहिए। जोशी के साथ पीड़िता का भाई भी मौजूद था।
भाई ने बताया कि जिस समय पुलिस को मौखिक तौर बताया जा रहा था तो जांच अधिकारी ने मौके पर ही आरोपी कर्मचारी सुनील और अक्षय को बुला लिया था। उनके परिवार पर निरंतर शादी का दबाव बनाया जा रहा था।
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इस पर जोशी ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। जोशी का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच या तो सीबीआई करे या फिर दूसरे राज्य की पुलिस।
जोशी ने कहा कि अभी तक पीड़िता को पुलिस की ओर से एफआईआर की प्रति भी उपलब्ध नहीं करवाई गई है, जबकि जिला अदालत ने भी पुलिस को कहा था।
उधर चंडीगढ़ के सांसद पवन कुमार बंसल ने कहा कि इस मामले को फास्ट ट्रैक में मामला चलाया जाए ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा हो। उन्हें ऐसी सजा मिले कि भविष्य में कोई ऐसा काम न कर सके।
चंडीगढ़ के सोशल वेलफेयर बोर्ड के चेयरपर्सन कमलेश ने कहा कि महिलाएं और लड़कियां रक्षा करने वालों के पास ही सुरक्षित नहीं है। ऐसे काम करने वालों को सीधे फांसी होनी चाहिए। उन्हें किसी भी कीमत पर माफी नहीं देनी चाहिए।