मानवाधिकार आयोग पहुंची चंडीगढ़ रेप की गूंज
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दुराचारी और छेड़छाड़ करने वाले पुलिस कांस्टेबल गैंग की करतूत उजागर करने वाली पीड़ित नाबालिग छात्रा के हो रहे उत्पीड़न पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हस्तक्षेप किया है।
आयोग ने चंडीगढ़ पुलिस से जवाब तलब करते हुए चार सप्ताह में मामले की डिटेल रिपोर्ट मांगी है। शुरू से ही इस मामले को दबाने के आरोप पुलिस अधिकारियों पर लग रहे हैं।
पुलिस अफसरों ने बाबा रामदेव और उनके सैकड़ों समर्थकों के साथ पीड़िता के घर जाकर उसकी पहचान पूरे शहर में उजागर कर दी थी। हालत अब यह है कि पीड़िता और उसके परिवार को शहर में अब कोई किराए का मकान देने को राजी नहीं है। इस मामले की शिकायत एबीवीपी की पंजाब इकाई के सह सचिव हरमनजोत सिंह ने एक जनवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी थी। इसी के आधार पर आयोग ने चंडीगढ़ पुलिस से जवाब तलब किया है।
आयोग को भेजी शिकायत में ये कहा था हरमनजोत ने
-पुलिस ने वेबसाइट पर इस मामले की एफआईआर डाउनलोड कर दी। इसमें पीड़िता का नाम और पूरा पता था। इससे उसकी पहचान उजागर हुई।
-पीड़िता द्वारा मामले को उजागर करने पर कुछ पुलिस अधिकारियों ने उसे धमकाया और मेडिकल में भी चार घंटे की देरी की गई।
-यह मामला दिल्ली गैंगरेप कांड जितना ही गंभीर है, उसमें कुछ शराबी और अनपढ़ लोग शामिल थे, जबकि इसमें पांच पढ़े-लिखे पुलिस कर्मचारी।
-पहचान उजागर होने के बाद परिवार को खुडा लाहौरा का अपना मकान बेचना पड़ा मगर दूसरी जगह वह जहां किराए पर गए हैं वहां मकान मालिक घर खाली करा रहा है।
बाबा रामदेव के आने से हुई अपमानित
पीड़ित पक्ष का कहना है कि बाबा रामदेव को लाकर छात्रा की पहचान उजागर करने के पीछे कुछ पुलिस अधिकारियों का हाथ हो सकता है। यही वजह है कि शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने बाबा रामदेव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़िता के भाई ने आरोप लगाया कि बाबा रामदेव ने पहचान सार्वजनिक कर हमारी मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि हमें अपना मकान बेचना पड़ा।
अब जहां रह रहे हैं उसका मकान मालिक ने सोमवार तक हमसे मकान खाली करने को कह दिया है। पुलिस के भय से कोई भी किराये पर मकान देने को राजी नहीं है। पीड़ित बहन स्कूल जाने से भी घबरा रही है। उसकी परीक्षाएं नजदीक हैं।
रामदेव पर आपराधिक मामला दर्ज हो
युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष हरमेल केसरी ने मांग की है कि पीड़िता की पहचान उजागर कर रामदेव ने पीड़ित पक्ष को और प्रताड़ित करने में भूमिका निभाई है। उन पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। अगर पुलिस मामला दर्ज नहीं करती है तो वे अदालत में अर्जी दाखिल करेंगे। बाबा की संस्था की ओर से अभी तक पीड़िता की कोई मदद नहीं की गई है। इससे बाबा के पीड़िता के घर आने का मकसद भी संदेह के घेरे में आता है।
एसआईटी भी ढीली, डेढ़ माह में चालान पेश नहीं
मामला दर्ज किए हुए डेढ़ माह होने वाला है लेकिन अभी तक एसआईटी की ओर से चालान पेश नहीं किया गया है। चालान पेश करने के बाद मामला फास्ट ट्रेक कोर्ट में चलेगा। सोमवार को इस मामले में सुनवाई होनी है।
पीड़िता के वकील ब्रजेश्वर जसवाल ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि वह पीड़ित परिवार को आश्रय और मकान उपलब्ध कराए। पीड़िता की पढ़ाई का पूरा खर्च भी उठाया जाना चाहिए। इस संबंध में प्रशासक को पत्र लिखकर मांग की जाएगी। अगर अदालत में जाना पड़ा तो नहीं हिचकेंगे।
एसएसपी, चंडीगढ़ डॉ. सुखचैन सिंह गिल ने कहा कि जल्द ही चालान पेश कर दिया जाएगा। मेडिकल के साथ फोरेंसिक रिपोर्ट भी चालान के साथ पेश की जाएगी।
सुनिए पीड़िता ने जो पुलिस को दिया था बयान
मेरी उम्र 17 साल है। मैं दसवीं कक्षा में पढ़ती हूं। मेरे साथ पुलिस वालों ने जबरदस्ती की। उन्होंने मुझे और मेरे मां-बाप को मारने की धमकी दी। पांच पुलिस वाले थे। दो पुलिस वालों ने मेरा बलात्कार किया। एक ने कहा कि तू मेरे साथ छह महीने तक रिलेशन रख नहीं तो मैं तुझे मार डालूंगा।
बाकी तीन पुलिस वाले मुझे ब्लैक मेल करते और धमकी देते हम पुलिस वालों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मुझे जबरदस्ती गाड़ी में बिठाया और सुनसान जगह पर ले गए। मैंने बलात्कार से पहले भागने की कोशिश की तो मुझे मारा और सिर पर रिवाल्वर लगा दी। ...बीच रास्ते में पीसीआर वाले पीछे लग जाते थे और रेप करने के बाद मुझे दवाई खिलाते थे।
न खाने पर मार डालने की धमकी दी जाती। इस डर से में खुदकुशी करने चली थी मगर मेरे भाई ने मुझे बचा लिया। मैं चाहती हूं कि मुझे इंसाफ मिले। पुलिस वालों के नाम जगतार, अक्षय, हिम्मत, सुनील हैं पांचवे पुलिस वाले को में शक्ल से पहचान सकती हूं।
छात्रा ऐसे फंसी वर्दी वाले बलात्कारियों के चंगुल में
पीड़िता काफी गरीब परिवार से है। स्कूल से आने के बाद सेक्टर-15 में एक दुकान पर भी काम करती है। गत अक्तूबर में पिता ने शराब पीकर घर में झगड़ा किया तो पीसीआर को कॉल किया गया था।
उसके बाद दशहरे से एक दिन पहले जब लड़की रामलीला देखकर लौट रही थी तो पीसीआर पर तैनात अक्षय ने उससे फोन नंबर लिया तब उसे कोई शक नहीं हुआ। उसके बाद अक्षय उसे निरंतर तंग करने लगा। उसने अन्य कर्मचारियों को भी लड़की का मोबाइल नंबर बांट दिया।
भाई ने बताया कि एक बार सितंबर में अक्षय पीसीआर की गाड़ी लेकर उनके घर पर आया था। पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी अक्षय और सुनील ने उसके साथ अपने कमरे, पीसीआर गाड़ी के साथ एक निजी गाड़ी में भी दुराचार किया।
एक बार आरोपी उसे मुलापुर के जंगलों में भी ले गए और दुराचार किया। लड़की ने पुलिस को बताया कि सेक्टर-15 से जब काम से वह वापस लौटती थी तो आरोपी कर्मचारी उसे अपने साथ दुराचार के लिए ले जाते थे। कई बार दुकान के बाहार से और स्कूल के बाद भी ले जाते थे। कई बार पीड़ित लड़की का अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लेती थी। अब पुलिस लड़की के मोबाइल नंबर की भी जांच कर रही है जिससे यह पता चल सके कि किस किस कर्मचारी ने कब कब फोन किया है।