बुड़ैल जेल ब्रेक: जज को बोला, मैं हूं अहम गवाह
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बुड़ैल जेल ब्रेक मामले में उस समय नाटकीय स्थित पैदा हो गई जब मंगलवार को सुनवाई के दौरान पूर्व जेल वार्डन हीरानंद मिश्रा बिना नोटिस के गवाही देने सीजेएम कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने खुद को इस केस में अहम गवाह बताते हुए बयान दर्ज कराने की बात कही।
कोर्ट में दर्ज कराए बयान में उसने दावा किया कि जिस समय उसकी जेल में तैनाती थी, तब उसने हवारा और भ्योरा को जेल में सुरंग खोदने की बात सुन ली थी। उसने इसकी सूचना सभी उच्च अधिकारियों को दी, लेकिन उसकी बात पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसका कहना था कि वो इस केस में अहम गवाह है, लेकिन आज तक उसकी गवाही नहीं हुई।
इस पर अदालत में उसके बयान दर्ज किए गए। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। उस दिन बयान पर बचाव पक्ष क्रॉस एग्जामिनेशन करेगा। वहीं अदालत ने गवाह को अगली सुनवाई तक के लिए पुलिस प्रोटेक्शन दी है।
2000 से 2004 तक बुड़ैल जेल में बतौर वार्डन (डेलीवेज) तैनात रहे हीरानंद मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि वर्ष 2003 में जब उसने दोनों की बातचीत सुनी थी तब उसे यह भी पता चला था कि आरोपी वहां से फरार होने वाले हैं।
उसने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष से उसे गवाही नहीं दिए जाने के लिए धमकियां भी मिली थीं। उसे अदालत से गवाही के लिए वर्ष 2013 में समन आया था। इस पर वह दो बार कोर्ट में आया, लेकिन उसे गवाही नहीं देने दी गई।
... और लगा दिया गया लंगर ड्यूटी में
हालांकि, बचाव पक्ष ने इससे बात से इंकार किया। साथ ही पूर्व जेल वार्डन के गवाही देने की इच्छा पर कोई भी आपत्ति नहीं जताई। सीआरपीसी की धारा 161 के तहत हीरानंद मिश्रा के बयान दर्ज किए गए, जिससे अब 27 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष धारा 311 के तहत क्रॉस एग्जामिनेशन में सवाल-जवाब करेगा।
कौन हैं हीरानंद
जेल ब्रेक मामले में अभियोजन पक्ष की सूची में हीरानंद मिश्रा का नंबर 50वें गवाह के तौर पर आता है। बुड़ैल जेल ब्रेक घटना के बाद उसके साथ कुल 25 जेल वार्डन की छंटनी कर दी गई थी। वर्तमान में वह निजी कंपनी में नौकरी कर रहा है। उसका कहना था कि वो इस केस में गवाही के समन के इंतजार में था, लेकिन बीते दिनों उसने अखबारों में पढ़ा तो पता चला कि केस में फाइनल ऑर्गयूमेंट शुरू हो गए हैं।
हीरानंद मिश्रा ने अपने बयान में कहा है कि उसकी ड्यूटी बुड़ैल जेल के गुरुद्वारा बैरक में थी। इस बैरक में जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भ्योरा और जगतार सिंह हवारा बंद थे। 2003 के अंत में उसने तारा, हवारा और भ्योरा को बैरक में बंद शेर सिंह, सुबेग सिंह और नंद सिंह को पूरी सुरंग खोदने की जानकारी दी। उसने यह बात सुन ली थी। इसके बाद उसने इसकी जानकारी तत्कालीन जेल सुपरिंटेंडेंट और सहायक सुपरिंटेंडेंट पीएस राणा को दी थी।
हीरानंद का दावा है कि उन्होंने उसे चुप रहने और अपने काम पर ध्यान देने को कहा गया। इसके कुछ दिन बाद जगतार सिंह हवारा की डीएस राणा से बातचीत हुई थी। उसी दिन उसे वॉयरलेस मैसेज से राणा ने मिलने को कहा था। राणा से जब उसकी मुलाकात हुई तो उसने सवाल किया कि क्यों जगतार सिंह हवारा तुम्हारी बैरक में ड्यूटी को लेकर शिकायत कर रहा हैं? इसके बाद उसे गुरुद्वारा बैरक से हटाकर लंगर ड्यूटी पर लगा दिया गया था। इसके कुछ दिन बाद ही सभी आरोपी सुरंग के रास्ते फरार हो गए थे।