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बैंक का सहायक मैनेजर ही निकला लुटेरा, लोगों को पैसे देने की बजाए खुद उड़ाए
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
Updated Tue, 27 Dec 2016 01:23 AM IST
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सहायक बैंक मैनेजर ही निकला पांच लाख की लूट का सरगना
- फोटो : अमर उजाला
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मामला हरियाणा के कुरुक्षेत्र का है। यहां के गांव सिंहपुरा के पास एचडीएफसी बैंक के पांच लाख रुपये की लूट करने वाले गिरोह का सरगना खुद बैंक का सहायक मैनेजर ही निकला। उसने 40 हजार रुपये उधार चुकता करने के लिए यह योजना तैयार की और गांव कोलापुर निवासी दो युवकों के माध्यम से घटना को अंजाम दिया।
पुलिस ने शक के आधार पर जब उससे पूछताछ की तो उसने पूरी सच्चाई पुलिस के समक्ष रख दी। पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सहायक मैनेजर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले का खुलासा एसपी अभिषेक गर्ग ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में किया।
एसपी ने बताया कि सीआईए-2 के अधिकारियों के प्रयासों से गत 22 दिसंबर को झांसा रोड पर गांव सिंहुपरा के पास से दो लोगों द्वारा देसी कट्टे के बल पर बैंक कर्मचारियों से पांच लाख रुपये की राशि लूटने के मामले को सुलझा लिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को पहले ही बैंक के सहायक मैनेजर रविंद्र कुमार निवासी गांव किरमच पर आशंका उसके हाव-भाव व घटना को अंजाम देने के तरीके से हो गई थी। जब पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की और जब उसने पूरी सच्चाई बयां कर दी।
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पुलिस ने शक के आधार पर जब उससे पूछताछ की तो उसने पूरी सच्चाई पुलिस के समक्ष रख दी। पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सहायक मैनेजर सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले का खुलासा एसपी अभिषेक गर्ग ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में किया।
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एसपी ने बताया कि सीआईए-2 के अधिकारियों के प्रयासों से गत 22 दिसंबर को झांसा रोड पर गांव सिंहुपरा के पास से दो लोगों द्वारा देसी कट्टे के बल पर बैंक कर्मचारियों से पांच लाख रुपये की राशि लूटने के मामले को सुलझा लिया गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को पहले ही बैंक के सहायक मैनेजर रविंद्र कुमार निवासी गांव किरमच पर आशंका उसके हाव-भाव व घटना को अंजाम देने के तरीके से हो गई थी। जब पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की और जब उसने पूरी सच्चाई बयां कर दी।
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अपने हिस्से के एक लाख पहले ही जेब में डाल लिए
सहायक बैंक मैनेजर ही निकला पांच लाख की लूट का सरगना
- फोटो : अमर उजाला
बैंक के सहायक मैनेजर ने स्वीकार किया कि इसी बैंक की कोलापुर शाखा में पोस्टिंग के दौरान गांव कोलापुर के अवतार सिंह के साथ लेन-देन करता था। इसके चलते वह अवतार सिंह के 40 हजार रुपये चुकता नहीं कर पाया। इस राशि को लेकर अवतार सिंह काफी तंग करने लगा। इस दौरान रविंद्र का तबादला गांव धुराला की शाखा में होने पर भी अवतार सिंह का आना-जाना लगा रहा। तभी उसने उसका भुगतान करने के लिए लूट की योजना बनाई और उसने अवतार को जानकारी दी कि वह अकसर बैंक के कैश को लेकर झांसा रोड पर दूसरी शाखा में जाता है। उस दौरान इस वारदात को अंजाम दिया जा सकता है।
इसी योजना के अनुसार ही 22 दिसंबर को गांव सिंहपुरा के पास रविंद्र बैंक के गार्ड परमजीत सिंह के साथ पांच लाख रुपये लेकर अपनी निजी अपनी कार से पहुंचा। उसी समय अवतार सिंह व राजदीप ने योजना के अनुसार रविंद्र व गार्ड की आंखों में मिर्च डालकर पांच लाख लूट कर फरार हो गए और पुलिस बैंक कर्मी रविंद्र की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया था। उन्होंने बताया कि आरोपी रविंद्र द्वारा लूट स्वीकार के बाद आरोपी अवतार सिंह को गांव कोलापुर और राजदीप को गांव काहनगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है।
अपने हिस्से के एक लाख पहले ही जेब में डाल लिए
एसपी के मुताबिक आरोपी सहायक बैंक मैनेजर को उक्त दोनों आरोपियों पर भी पूरा भरोसा नहीं था। हालांकि लूटी गई राशि सभी आरोपियों ने बराबर बांटनी थी, लेकिन उसे अवतार सिंह व राजदीप पर उसका हिस्सा न दिए जाने की आशंका थी। इसी के चलते उसने कुल पांच लाख रुपये में से पांच में से एक लाख रुपये की राशि रास्ते में झांसा चुंगी के पास गार्ड परमजीत को किसी बहाने कार से उतार कर लूट से पहले ही अपनी जेब में डाल ली थी।
इसी योजना के अनुसार ही 22 दिसंबर को गांव सिंहपुरा के पास रविंद्र बैंक के गार्ड परमजीत सिंह के साथ पांच लाख रुपये लेकर अपनी निजी अपनी कार से पहुंचा। उसी समय अवतार सिंह व राजदीप ने योजना के अनुसार रविंद्र व गार्ड की आंखों में मिर्च डालकर पांच लाख लूट कर फरार हो गए और पुलिस बैंक कर्मी रविंद्र की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया था। उन्होंने बताया कि आरोपी रविंद्र द्वारा लूट स्वीकार के बाद आरोपी अवतार सिंह को गांव कोलापुर और राजदीप को गांव काहनगढ़ से गिरफ्तार कर लिया है।
अपने हिस्से के एक लाख पहले ही जेब में डाल लिए
एसपी के मुताबिक आरोपी सहायक बैंक मैनेजर को उक्त दोनों आरोपियों पर भी पूरा भरोसा नहीं था। हालांकि लूटी गई राशि सभी आरोपियों ने बराबर बांटनी थी, लेकिन उसे अवतार सिंह व राजदीप पर उसका हिस्सा न दिए जाने की आशंका थी। इसी के चलते उसने कुल पांच लाख रुपये में से पांच में से एक लाख रुपये की राशि रास्ते में झांसा चुंगी के पास गार्ड परमजीत को किसी बहाने कार से उतार कर लूट से पहले ही अपनी जेब में डाल ली थी।
अन्य बैंक कर्मियों पर भी पुलिस को शक
सहायक बैंक मैनेजर ही निकला पांच लाख की लूट का सरगना
- फोटो : अमर उजाला
19 दिसंबर को नहीं दे पाए थे वारदात को अंजाम
सहायक बैंक मैनेजर ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि उन्हें 19 दिसंबर को ही लूट की इस योजना को अंजाम देना था, जिसके लिए पूरी योजना भी तय कर ली थी। लेकिन वह उस समय डर गया और लूट की घटना को अंजाम नहीं दे पाए। इसके बाद उसने फिर उक्त अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई और 22 दिसंबर को घटना को अंजाम दिया।
अन्य बैंक कर्मियों पर भी पुलिस को शक
लूट की इस घटना में उक्त बैंक शाखा के अन्य कर्मियों के मिले होने की भी पुलिस को आशंका है। एसपी के मुताबिक आरोपी सहायक बैंक मैनेजर रविंद्र कुमार ने लूट से पहले एक लाख रुपये अपनी जेब में डाल लिए, जो बाद में उसने बैंक जाकर वहां कर्मियों को दे दिए। लूट की घटना होने के बावजूद बैंक कर्मियों ने इस राशि को रविंद्र कुमार द्वारा दिए जाने की बात छुपाई और यह राशि फिर से रविंद्र को ही दे दी गई। यहीं नहीं सहायक मैनेजर ने बैंक के चतुर्थ श्रेणी कर्मी का भी नाम उजागर किया है। पुलिस इस आशंका के चलते अभी जांच में जुटी है।
सहायक बैंक मैनेजर ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि उन्हें 19 दिसंबर को ही लूट की इस योजना को अंजाम देना था, जिसके लिए पूरी योजना भी तय कर ली थी। लेकिन वह उस समय डर गया और लूट की घटना को अंजाम नहीं दे पाए। इसके बाद उसने फिर उक्त अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई और 22 दिसंबर को घटना को अंजाम दिया।
अन्य बैंक कर्मियों पर भी पुलिस को शक
लूट की इस घटना में उक्त बैंक शाखा के अन्य कर्मियों के मिले होने की भी पुलिस को आशंका है। एसपी के मुताबिक आरोपी सहायक बैंक मैनेजर रविंद्र कुमार ने लूट से पहले एक लाख रुपये अपनी जेब में डाल लिए, जो बाद में उसने बैंक जाकर वहां कर्मियों को दे दिए। लूट की घटना होने के बावजूद बैंक कर्मियों ने इस राशि को रविंद्र कुमार द्वारा दिए जाने की बात छुपाई और यह राशि फिर से रविंद्र को ही दे दी गई। यहीं नहीं सहायक मैनेजर ने बैंक के चतुर्थ श्रेणी कर्मी का भी नाम उजागर किया है। पुलिस इस आशंका के चलते अभी जांच में जुटी है।