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आर्मी के ट्रक ने एक्टिवा सवार को कुचला, मौत
अमर उजाला, पंचकूला
Updated Tue, 26 Nov 2013 09:10 AM IST
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पुराना पंचकूला के नजदीक हाईवे पर आर्मी के ट्रक ने एक्टिवा सवार एक एकाउंटेंट को कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
वह परवाणू स्थित एक फर्म में नौकरी करते थे और हर सोमवार की तरह सकेतड़ी मंदिर में माथा टेककर अपने घर कालका लौट रहे थे। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
पुलिस के मुताबिक, कालका के कुराड़ी मोहल्ला निवासी वीरेंद्र गुप्ता (50) एक्टिवा से सकेतड़ी मंदिर आए थे और माथा टेककर लौटते वक्त ट्रक की चपेट में आ गए।
इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रक सवारों ने ही उन्हें कमांड अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को सेक्टर-6 पंचकूला स्थित जनरल अस्पताल की मोर्चरी में लाया गया।
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मौके से मिले दस्तावेजों के आधार पर उनकी पहचान हुई। इसके बाद परिजनों को सूचित किया गया।
इस बार बहन से भी नहीं मिल सके वीरेंद्र
वीरेंद्र गुप्ता की मौत के बाद उनके कई रिश्तेदार और परिजन जनरल अस्पताल पहुंचे। एक रिश्तेदार ने बताया कि वीरेंद्र हर सोमवार को कालका से पंचकूला सकेतड़ी मंदिर में पूजा करने आते थे।
यहीं सेक्टर-8 में उनकी एक बहन भी रहती है और अक्सर सोमवार को वह बहन से भी मिलकर जाते थे, लेकिन इस सोमवार वह बहन के घर नहीं गए। वीरेंद्र के दो बेटे हैं।
हाल ही में एक बेटे ने इंजीनियर की डिग्री ली है और उसे अगले महीने नौकरी ज्वाइन करनी है।
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वह परवाणू स्थित एक फर्म में नौकरी करते थे और हर सोमवार की तरह सकेतड़ी मंदिर में माथा टेककर अपने घर कालका लौट रहे थे। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
पुलिस के मुताबिक, कालका के कुराड़ी मोहल्ला निवासी वीरेंद्र गुप्ता (50) एक्टिवा से सकेतड़ी मंदिर आए थे और माथा टेककर लौटते वक्त ट्रक की चपेट में आ गए।
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इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रक सवारों ने ही उन्हें कमांड अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को सेक्टर-6 पंचकूला स्थित जनरल अस्पताल की मोर्चरी में लाया गया।
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मौके से मिले दस्तावेजों के आधार पर उनकी पहचान हुई। इसके बाद परिजनों को सूचित किया गया।
इस बार बहन से भी नहीं मिल सके वीरेंद्र
वीरेंद्र गुप्ता की मौत के बाद उनके कई रिश्तेदार और परिजन जनरल अस्पताल पहुंचे। एक रिश्तेदार ने बताया कि वीरेंद्र हर सोमवार को कालका से पंचकूला सकेतड़ी मंदिर में पूजा करने आते थे।
यहीं सेक्टर-8 में उनकी एक बहन भी रहती है और अक्सर सोमवार को वह बहन से भी मिलकर जाते थे, लेकिन इस सोमवार वह बहन के घर नहीं गए। वीरेंद्र के दो बेटे हैं।
हाल ही में एक बेटे ने इंजीनियर की डिग्री ली है और उसे अगले महीने नौकरी ज्वाइन करनी है।