फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   9 employee of UT Administration cleared in fraud case

धोखाधड़ी मामले में यूटी प्रशासन के 9 कर्मचारी बरी

Sat, 12 Mar 2016 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 12 Mar 2016 12:49 AM IST
विज्ञापन
9 employee of UT Administration cleared in fraud case
अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo

पंजाब सरकार की एक नोटिफिकेशन दिखाकर बढ़ा हुआ पे स्केल हासिल करने के मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नवजीत कलेर की कोर्ट ने आरोपी चंडीगढ़ प्रशासन के सभी 9 कर्मचारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। सितंबर 2004 में विजिलेंस ने चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के तरसेम लाल, कंवरपाल, रामकंवर, निर्मल, अमरीक सिंह, शमशेर सिंह, अशोक कुमार, छत्रपाल सिंह, राम कुमार और गौतम कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इनमें से शमशेर सिंह के केस का ट्रायल शुरू होने से पहले ही मौत हो गई थी। इसके बाद मामले में 9 आरोपी रह गए थे।

विज्ञापन


मामला 2004 का है। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग में सर्वेयर वर्कर्स यूनियन का एक पत्र आया। यह विभाग में बतौर सर्वेयर के पद पर कार्यरत कर्मचारियों के पे स्केल से संबंधित था। साथ ही इसमें पंजाब सरकार की नोटिफिकेशन थी, जिसमें सर्वेयर के तौर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के आदेश थे। इस पर इंजीनियरिंग विभाग की ओर से बिना पंजाब सरकार से क्रॉस चेक किए सर्वेयर के पद पर कार्यरत सभी कर्मचारियों का वेतन बढ़ा दिया और नए पे स्केल के फायदे दे दिए गए।
विज्ञापन


कुछ समय बाद विभाग के अधिकारियों को पता चला कि पंजाब सरकार खुद यूटी के नोटिफिकेशन लागू करती है, तो ऐसे में विभाग के पास पंजाब सरकार की नई नोटिफिकेशन कहां से आ गई। इसके बाद विभाग स्तर पर जांच की गई तो पता चला कि वह लेटर और नोटिफिकेशन गलत थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद विभाग ने पुलिस में केस दर्ज कराया गया। मामले की जांच विजिलेंस को दी गई। विजिलेंस की जांच में कहीं से भी पता नहीं चला कि वह लेटर कहां से आया और किसने भेजा। इसके बाद विजिलेंस ने नोटिफिकेशन के बाद फायदा पाने वाले सभी 10 कर्मचारियों के खिलाफ 10 सितंबर 2004 को केस दर्ज किया था। शुक्रवार को अदालत ने सभी को बरी कर दिया।


बचाव पक्ष के एडवोकेट हरीश भारद्वाज के अनुसार विजिलेंस ने बिना जांच किए केवल नोटिफिकेशन के तहत लाभ पाने वाले सभी 10 कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया था। जबकि, विजिलेंस के पास किसी के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे। इसके बाद उक्त सभी कर्मचारियों के प्रमोशन, रिटायरमेंट सहित अन्य लाभ रोक दिए गए थे। विजिलेंस अदालत में यह साबित नहीं कर सकी कि वह लेटर किसने भेजा था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed