तो ये है 60 लोगों की आंखों की रोशनी जाने का सच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरदासपुर के गांव घुमाण में सीमांत गांवों के आंखों के आपरेशन कैंप ने प्रशासन और सेहत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोगियों की जांच कर रहे ईएनटी अस्पताल अमृतसर के एसोसिएट प्रोफेसर डा. कर्मजीत सिंह ने बताया कि बहुत से रोगियों की आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद नहीं के बराबर है। आपरेशन के बाद रोगियों की आंखों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश, देखरेख और दवाओं का ध्यान नहीं रखा गया, इसलिए संक्रमण हुआ और रोशनी चली गई।
अमृतसर के डीसी रवि भगत ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए सरकार को लिख दिया है। वहीं सिविल सर्जन डॉ राजीव भल्ला ने कहा कि एनजीओ ने जिला प्रशासन और सेहत विभाग की बिना किसी स्वीकृति के आपरेशन गैरकानूनी ढंग से कर दिए। यह अपराध है।
उनके विभाग की ओर से जिला प्रशासन को सिफारिश की गई है कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। दूसरी ओर मेडिकल एजुकेशन मंत्री अनिल जोशी भी सरकारी ईएनटी अस्पताल में दाखिल पीडि़तों का हाल जानने पहुंचे। उन्होंने कहा कि सभी रोगियों का इलाज निशुल्क होगा और सरकार मामले की जांच कराएगी।
किसान संघर्ष कमेटी ने दी पहली शिकायत
किसान संघर्ष कमेटी के गगोमहाल एरिया के अध्यक्ष गुरदेव सिंह और वरिष्ठ नेता रणजीत सिंह ने बताया कि उनको पता चला है कि मंजीत जोशी नाम के व्यक्ति ने सीमांत क्षेत्र के लोगों से संपर्क किया कि उनका संगठन आंखों के निशुल्क आपरेशन कराता है।
जोशी ने पहले गांव गगोमहाल के गुरुद्वारा साहिब के पास आंखों का फ्री मेडिकल चेकअप कैंप आयोजित किया। इस कैंप में कुछ मरीजों की पहचान मुफ्त आपरेशन के लिए की गई।
इन मरीजों के आपरेशन के लिए एनजीओ की ओर से गुरदासपुर जिले की एक अन्य संस्था गुरु नानक मिशन सोसाइटी से संपर्क करके गांव घुमाण में रोगियों के ऑपरेशन की बात तय की गई। इस जगह पर अमृतसर के सीमांत गांवों, जालंधर, गुरदासपुर, टांडा क्षेत्रों से रोगियों को लाकर आपरेशन किए गए।
रोगियों की गलते आपरेशन की सूचना पहले किसान संघर्ष कमेटी ने डीसी को दी थी। कोई सुनवाई न होने पर क्षेत्र के सभी रोगियों का इकट्ठा किया और बस से लाकर वीरवार देर शाम अस्पताल में दाखिल कराया गया।
फिर डीसी को सूचित करके मीडिया को बताया गया। इसके बाद सरकार और प्रशासन हरकत में आया। उन्होंने कहा कि अगर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हुई और रोगियों का इलाज सहीं ढंग से न हुआ तो किसान राज्य भर में संघर्ष शुरू कर देंगे।