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Hindi News ›   Chandigarh ›   2011 Triple Murder case of Bhiwani - Death Sentences of 4 turned to life imprisonment and 10 released

4 की फांसी उम्रकैद में तब्दील, 10 को माफी

Thu, 11 Dec 2014 01:50 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 11 Dec 2014 01:50 PM IST
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2011 Triple Murder case of Bhiwani - Death Sentences of 4 turned to life imprisonment and 10 released

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तिहरे हत्याकांड में बुधवार को चार आरोपियों की फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी है, जबकि एक ही परिवार के 10 सदस्यों की उम्रकैद की सजा माफ कर दी है। भिवानी में जमीन के पारिवारिक विवाद में महिला और उसके दो बेटों की हत्या के मामले में सजायाफ्ता अभियुक्तों को सेशन जज के फैसले के खिलाफ अपील में बड़ी राहत मिली है।

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भिवानी के गांव पतवान में आठ और नौ जुलाई, 2011 की रात सुप्तावस्था में विधवा संतोष (45) और उसके बेटों जसवंत (21) व राजेश (18) की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने संतोष के जेठ इंद्र व धूप सिंह समेत उनके बेटों और पुत्रवधुओं के अलावा शमशेर, कुलदीप सिंह, हरी सिंह और दलबीर केखिलाफ हत्या व आपराधिक जालसाजी का मामला दर्ज किया था।

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4 को फांसी, 10 सदस्यों को उम्रकैद

2011 Triple Murder case of Bhiwani - Death Sentences of 4 turned to life imprisonment and 10 released

भिवानी जिला अदालत ने छह अगस्त 2013 को हत्याकांड के आरोपियों को दोषी करार देते हुए शमशेर, कुलदीप सिंह, हरी सिंह और दलबीर को फांसी और इंद्र व धूप सिंह के परिवार के 10 सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

जिला अदालत से फांसी की तारीख तय करने के लिए मामला हाईकोर्ट को भेजा जा चुका था। इसी बीच दोषियों ने एडवोकेट विनोद घई के माध्यम से हाईकोर्ट में जिला अदालत के फैसले व फांसी की सिफारिश रद्द करने की मांग की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस एम. जियापाल और जस्टिस दर्शन सिंह की डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा था। बुधवार को सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने चार की फांसी को उम्रकैद में तब्दील कर दिया, जबकि 10 की उम्र कैद की सजा रद्द कर दी गई।

हाईकोर्ट में दी दलील

2011 Triple Murder case of Bhiwani - Death Sentences of 4 turned to life imprisonment and 10 released

एडवोकेट घई के मुताबिक हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पक्ष रखा गया कि पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ संतोष के रिश्तेदारों को ही गवाह बना लिया। हत्या से पहले जमीन विवाद के लिए पंचायत हुई और इस दौरान इंद्र व धूप सिंह ने संतोष से एक एकड़ जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को देख लेने की धमकी दी, जबकि खरीदार ने धमकी की पुष्टि नहीं की थी।

जिला अदालत में दाखिल दोष पत्र में कहा गया कि कत्ल से कुछ घंटे पहले इंद्र ने खेत में विजय नामक एक व्यक्ति कोे नजर रखने को कहा था। विजय ने फोन पर इंद्र को सूचना दी कि संतोष व उसके बेटे सो चुके हैं और इसके बाद ही इंद्र ने शमशेर, कुलदीप सिंह, हरी सिंह और दलबीर को फोन पर बताया और कत्ल हो गया।

घई के मुताबिक पुलिस ने जिला अदालत में मोबाइल फोन की डिटेल दी, लेकिन इसके साथ टेलिकॉम कंपनियों के काल डिटेल संबंधी सर्टिफिकेट नहीं लगाए। हाईकोर्ट को बताया गया कि सुप्रीमकोर्ट एक ताजा फैसले में कह चुका है कि पुलिस कॉल डिटेल का दुरुपयोग करती है, ऐसे में टेलीकाम कंपनियों के सर्टिफिकेट पेश करना जरूरी है। राहत मिलने में यह एक बड़ा तथ्य काम आया।

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