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राजनीतिक आतंकवाद का शिकार हुए असीमानंद
Updated Tue, 17 Apr 2018 02:04 AM IST
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राजनीतिक आतंकवाद का शिकार हुए असीमानंद: राठी
- अजमेर और मक्का मस्जिद के बाद साल के अंत तक समझौता ब्लास्ट में भी आ सकता है फैसला
- यूपीए सरकार ने षड़यंत्र के तहत फंसाया गया साधु-संतों को
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में हैदराबाद स्थित एनआईए की अदालत में 11 साल बाद दिए फैसले में असीमानंद सहित अन्य आरोपियों को बरी करने को यूपीए सरकार के षड़यंत्र का पर्दाफाश करार दिया है। पंचकूला स्थित एनआईए की अदालत में समझौता ब्लास्ट मामले में चल रही सुनवाई के दौरान असीमानंद के वकील ने इसे राजनीतिक आतंकवाद तो विधायक ने यूपीए सरकार की साजिश का पर्दाफाश बताया है। समझौता ब्लास्ट मामले में आरोपी असीमानंद के वकील मनवीर राठी ने बताया कि हैदराबाद और इससे पहले अजमेर ब्लास्ट मामले में भी असीमानंद को बरी कर दिया गया है। सुबूतों के अभाव में अदालत ने यह फैसला सुनाया है और माना जा रहा है कि दोनों मामले में बरी होने के बाद समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई जल्द पूरी हो सकती है।
पंचकूला स्थित एनआईए की अदालत में समझौता ब्लास्ट मामले में अब तक 200 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। 20-21 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई के दौरान भी भारतीय गवाहों के बयान दर्ज होंगे। भारतीय गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद अगस्त में होने वाली सुनवाई के दौरान गवाही के लिए पाकिस्तानी गवाहों को भी समन किया जाएगा। इसके बाद इस मामले में अंतिम बहस और साल के अंत तक समझौता ब्लास्ट मामले में भी फैसला आ सकता है। सोमवार को बरी हुए असीमानंद सहित दो अन्य आरोपी राजिंद्र और लोकेश भी हैं, जिन्हें मक्का मस्जिद मामले में भी आरोपी बनाया गया था।
पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने असीमानंद को बरी किए जाने पर कहा कि हिन्दू साधु संतों को षडय़ंत्र के तहत यूपीए सरकार के कार्यकाल में फंसाया गया था। कांग्रेस ने जो कुकर्म किए हैं, इस फैसले से मुंह पर तमाचा लगा है। साधु संतों को झूठे केसों में फंसाया गया था, अदालत के फैसले से इसका पर्दाफाश हो गया है।
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एबीवीपी के जिला संयोजक मुकेश राणा ने कहा कि इतनी लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान साक्ष्य नहीं मिल सके। यानी स्वामी असीमानंद पर लगाए गए आरोप निराधार थे। अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। साधु-संत समाज के लिए भी यह बड़ी राहत मिली है।
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राजनीतिक आतंकवाद का शिकार हुए असीमानंद: राठी
- अजमेर और मक्का मस्जिद के बाद साल के अंत तक समझौता ब्लास्ट में भी आ सकता है फैसला
- यूपीए सरकार ने षड़यंत्र के तहत फंसाया गया साधु-संतों को
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में हैदराबाद स्थित एनआईए की अदालत में 11 साल बाद दिए फैसले में असीमानंद सहित अन्य आरोपियों को बरी करने को यूपीए सरकार के षड़यंत्र का पर्दाफाश करार दिया है। पंचकूला स्थित एनआईए की अदालत में समझौता ब्लास्ट मामले में चल रही सुनवाई के दौरान असीमानंद के वकील ने इसे राजनीतिक आतंकवाद तो विधायक ने यूपीए सरकार की साजिश का पर्दाफाश बताया है। समझौता ब्लास्ट मामले में आरोपी असीमानंद के वकील मनवीर राठी ने बताया कि हैदराबाद और इससे पहले अजमेर ब्लास्ट मामले में भी असीमानंद को बरी कर दिया गया है। सुबूतों के अभाव में अदालत ने यह फैसला सुनाया है और माना जा रहा है कि दोनों मामले में बरी होने के बाद समझौता ब्लास्ट मामले में सुनवाई जल्द पूरी हो सकती है।
पंचकूला स्थित एनआईए की अदालत में समझौता ब्लास्ट मामले में अब तक 200 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। 20-21 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई के दौरान भी भारतीय गवाहों के बयान दर्ज होंगे। भारतीय गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद अगस्त में होने वाली सुनवाई के दौरान गवाही के लिए पाकिस्तानी गवाहों को भी समन किया जाएगा। इसके बाद इस मामले में अंतिम बहस और साल के अंत तक समझौता ब्लास्ट मामले में भी फैसला आ सकता है। सोमवार को बरी हुए असीमानंद सहित दो अन्य आरोपी राजिंद्र और लोकेश भी हैं, जिन्हें मक्का मस्जिद मामले में भी आरोपी बनाया गया था।
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पंचकूला के विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने असीमानंद को बरी किए जाने पर कहा कि हिन्दू साधु संतों को षडय़ंत्र के तहत यूपीए सरकार के कार्यकाल में फंसाया गया था। कांग्रेस ने जो कुकर्म किए हैं, इस फैसले से मुंह पर तमाचा लगा है। साधु संतों को झूठे केसों में फंसाया गया था, अदालत के फैसले से इसका पर्दाफाश हो गया है।
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एबीवीपी के जिला संयोजक मुकेश राणा ने कहा कि इतनी लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान साक्ष्य नहीं मिल सके। यानी स्वामी असीमानंद पर लगाए गए आरोप निराधार थे। अदालत का फैसला स्वागत योग्य है। साधु-संत समाज के लिए भी यह बड़ी राहत मिली है।