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Chandigarh News: खुड्डा अलीशेर के स्कूल की बिल्डिंग में आ रहीं दरारें, न खेल ग्राउंड न ही दिव्यांगों के लिए रैंप

Sat, 02 Aug 2025 12:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Aug 2025 12:14 AM IST
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Cracks are appearing in the school building of Khudda Alisher, there is neither a playground nor a ramp for the disabled
चंडीगढ़। यूटी के टॉप 10 में आने वाला खुड्डा अलीशेर के सरकारी स्कूल में बच्चों पर खतरा मंडरा रहा है। यह बिल्डिंग पुराने डिजाइन में बनी है। इसमें दरारें आ रही हैं। डिजास्टर फ्रेंडली न होने के कारण इस बिल्डिंग से हादसे का खतरा है। इतना ही नहीं है स्कूल बिल्डिंग के साथ-साथ टीचरों की कमी भी झेल रहा है। यहां न तो खेल ग्राउंड हैं और न ही दिव्यांगों के लिए रैंप। यहां कमरे इतने छोटे हैं कि इसमें केवल 16 बेंच ही लग पाते हैं। टीचर के घूमने तक ही जगह कमरों में नहीं है। राजस्थान में स्कूल गिरने की घटना के बाद यहां अगले दिन ही जेई और एसडीओ पहुंचे। सभी अधिकारियों को इस बिल्डिंग की जानकारी होने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। विभाग ने दरारों को भरने के बजाय उसे लोहे की चादर से ढक दिया।
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स्कूल में 1400 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इसमें केवल 32 रूम है। कमरे में वेंटिलेशन नहीं है। जो बच्चा एक बार पीछे जाकर बैठ गया उसके बाद वापस आने की जगह नहीं है। लाइट जाने पर इन कमरों में अंधेरा छा जाता है। गर्मी के कारण बच्चे परेशान होते हैं क्योंकि कहीं से हवा नहीं लगती। 1964 में यहां प्राइमरी स्कूल खोला गया था तब एक ब्लॉक बनाया गया था। 1981 में इसको इस मिडिल स्कूल बना दिया गया और एक ब्लॉक और खड़ा कर दिया गया। 2011 में यहां 11वीं और 12वीं के बच्चे भी जोड़ दिए गए।
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नियमों के मुताबिक बच्चों की संख्या के हिसाब से बिल्डिंग होनी चाहिए लेकिन यह स्कूल केवल 1.23 एकड़ में बना है। क्लासरूम इतने छोटे हैं कि उनमें टीचर के घूमने फिरने तक की जगह नहीं है। ऐसे में टीचर पीछे बैठे विद्यार्थियों को देख ही नहीं पाते। बिल्डिंग में सीढ़ियां इतनी कम जगह में बनी हैं कि केवल एक ही लाइन में बच्चे नीचे आ सकते हैं। अगर भूकंप या अन्य किसी आपदा की स्थिति हो जाए तो इन सीढि़यों से सभी बच्चों के उतरने के समय भगदड़ मच सकती है। दिव्यांगों के लिए स्कूल में रैंप की कोई सुविधा नहीं है। नैरो सीढि़यां होने के कारण भी काफी समस्या आती है। यहां पर कुल 55 के करीब टीचर हैं और कई मुख्य सब्जेक्ट जैसे पीजीटी इंग्लिश और टीजीटी पंजाबी का शिक्षक नहीं है। जहां सफाईकर्मी और चौकीदार की पोस्ट खाली है। यहां जगह न होने के कारण बच्चे खेल नहीं सकते। थोड़ी जगह में ही खेलकर गर्ल्स बॉयज की टीम ने कबड्डी में गोल्ड मेडल जीता है। जगह कम होने के कारण कोई भी एक्टिविटी नहीं करवाई जा सकती। यहां फायर और एंबुलेंस के आने की जगह भी नहीं है। यह जगह भी यहां की पंचायत ने डोनेट की थी।
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बारिश में बिल्डिंग से टपकता है पानी
1965 में इसी स्कूल में पढ़ाई शुरू की थी। आज भी यह स्कूल इसी डिजाइन में बना है। यहां बिल्डिंग की हालत इतनी जर्जर है कि हर समय डर लगता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। बारिश में यहां पानी टपकता है। सीवरेज सिस्टम पुराना होने और स्कूल नीचा होने के कारण अंदर भी पानी भर जाता है।
-अंगद सिंह, खुड्डा अलीशेर निवासी

एक कक्षा में बिठाए जा रहे 50 बच्चे
यह पूरा स्कूल नए सिरे से बनना चाहिए। इतने छोटे कमरों में बच्चों को बिठाना खतरे से खाली नहीं है। एक कमरे में 30 बच्चों की जगह 50 बच्चे बिठाए जा रहे हैं। ऐसे में वह सही तरीके से बाहर नहीं निकल सकते। चोट का खतरा रहता है। आपदा की स्थिति में उन्हें निकलने में समय लग जाएगा।

-त्रिलोचन सिंह, निवासी खुड्डा अलीशेर

कार्रवाई नहीं हुई तो अधिकारियों को देंगे लेटर
जो घटना राजस्थान में हुई, यहां वह घटना किसी भी समय हो सकती है। यहां तो विभाग सोया हुआ है। उन्हें बच्चों की सुरक्षा का बिलकुल ख्याल नहीं है। यदि विभाग ने जल्द कुछ नहीं किया तो गांव की तरफ से अधिकारियों को मांगपत्र दिया जाएगा।
-जरनैल सिंह, निवासी खुड्डा अलीशेर
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