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हरियाणा में कोरोना महामारी घोषित, भारत का पहला राज्य बना, मंत्री अनिल विज ने किया ट्वीट
Thu, 12 Mar 2020 12:00 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 12 Mar 2020 12:00 PM IST
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हरियाणा में कोरोना को महामारी घोषित कर दिया गया है। ऐसा करके प्रदेश यह घोषणा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी। इससे पहले मंत्री विज ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी की। बता दें कि हरियाणा में कोरोना का एक पॉजीटिव मामला गुरुग्राम में सामने आ चुका है।
हरियाणा सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। सभी सरकारी, निजी अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से महामारी के संदिग्ध मामलों की जांच के लिए लू कॉर्नर बनाने होंगे। इस वायरस के प्रकोप और प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने महामारी अधिनियम 1897 की धारा 2, 3 और 4 का सहारा लिया है।
इसके तहत ‘हरियाणा महामारी सीओवीआईडी-19 विनियमन, 2020’ लागू किया गया है। राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है। यह अधिनियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और अधिसूचना जारी होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक मान्य रहेगा।
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संदिग्ध मामलों की जांच के दौरान सभी अस्पताल व्यक्ति की यात्रा का पूरा रिकॉर्ड दर्ज करेंगे। यदि वे कोरोना की रिपोर्ट वाले किसी भी देश या क्षेत्र से यात्रा करके आए हैं। कोरोना संदिग्ध या पुष्टि वाले व्यक्ति के संपर्क में आने वालों के इतिहास को भी दर्ज किया जाएगा। उन व्यक्तियों को भी संदिग्धों या पुष्टि वाले मरीज से मिलने के दिन से 14 दिन के लिए घर के भीतर ही अलग रखेंगे।
कोरोना की परिभाषा के अनुसार व्यक्ति रोगसूचक है तो उसे प्रोटोकॉल के अनुसार अस्पताल में अलग रखा जाएगा और वायरस के शिकार हैं या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए टेस्ट किए जाएंगे। सरकारी व निजी अस्पतालों को ऐसे सभी मामलों की जानकारी तुरंत सिविल सर्जन कार्यालय को देनी होगी।
यदि कोई व्यक्ति, संस्थान, संगठन अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करते हैं तो उसे भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 के तहत दंडित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और डीसी को किसी भी व्यक्ति, संस्था, संगठन को नियमों का उल्लंघन करने पर दंडित करने की शक्तियां दे दी गई हैं।
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हरियाणा सरकार ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है। सभी सरकारी, निजी अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से महामारी के संदिग्ध मामलों की जांच के लिए लू कॉर्नर बनाने होंगे। इस वायरस के प्रकोप और प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने महामारी अधिनियम 1897 की धारा 2, 3 और 4 का सहारा लिया है।
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इसके तहत ‘हरियाणा महामारी सीओवीआईडी-19 विनियमन, 2020’ लागू किया गया है। राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है। यह अधिनियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और अधिसूचना जारी होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि तक मान्य रहेगा।
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संदिग्ध मामलों की जांच के दौरान सभी अस्पताल व्यक्ति की यात्रा का पूरा रिकॉर्ड दर्ज करेंगे। यदि वे कोरोना की रिपोर्ट वाले किसी भी देश या क्षेत्र से यात्रा करके आए हैं। कोरोना संदिग्ध या पुष्टि वाले व्यक्ति के संपर्क में आने वालों के इतिहास को भी दर्ज किया जाएगा। उन व्यक्तियों को भी संदिग्धों या पुष्टि वाले मरीज से मिलने के दिन से 14 दिन के लिए घर के भीतर ही अलग रखेंगे।
कोरोना की परिभाषा के अनुसार व्यक्ति रोगसूचक है तो उसे प्रोटोकॉल के अनुसार अस्पताल में अलग रखा जाएगा और वायरस के शिकार हैं या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए टेस्ट किए जाएंगे। सरकारी व निजी अस्पतालों को ऐसे सभी मामलों की जानकारी तुरंत सिविल सर्जन कार्यालय को देनी होगी।
यदि कोई व्यक्ति, संस्थान, संगठन अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करते हैं तो उसे भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 188 के तहत दंडित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और डीसी को किसी भी व्यक्ति, संस्था, संगठन को नियमों का उल्लंघन करने पर दंडित करने की शक्तियां दे दी गई हैं।
कोरोना को लेकर अफवाह फैलाने वाले नपेंगे
स्वास्थ्य विभाग की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति, संस्था एवं संगठन कोरोना के बारे में किसी भी माध्यम से कोई जानकारी नहीं देगा। ऐसा अफवाह या अनौपचारिक जानकारी के प्रसार से बचने के लिए किया गया है। यदि कोई व्यक्ति, संस्था या संगठन ऐसी गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है तो उन्हें नियमों के तहत दंडित किया जाएगा।
नमूने लेने के लिए कोई निजी प्रयोगशाला अधिकृत नहीं
हरियाणा में कोरोना परीक्षण के नमूने लेने के लिए किसी भी निजी प्रयोगशाला को अधिकृत नहीं किया गया है। ऐसे सभी नमूने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार एकत्र किए जाएंगे और उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्त जिला नोडल अधिकारी द्वारा नामित प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा।
कोरोना की पुष्टि होने पर नोडल अधिकारी निकटतम सरकारी अस्पताल को सूचित करेंगे या फिर टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 108 पर कॉल करनी होगी। कोरोना को रोकने के लिए निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, डीसी, एसडीएम, सिविल सर्जन, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के अधिकृत अधिकारी जरूरी कदम उठाएंगे।
संदिग्ध को बलपूर्वक कर सकेंगे भर्ती, क्षेत्र सील करने की भी पावर
कोरोना का संदिग्ध व्यक्ति अगर दाखिल होने या अलग रहने से इनकार करता है तो अधिकृत अधिकारी उसे बलपूर्वक भर्ती कर सकते हैं। रिपोर्ट नेगेटिव आने और 14 दिन पूरा होने के बाद ही उसे घर भेजा जाएगा। किसी गांव, कस्बे, वार्ड, कॉलोनी, बस्ती में संदिग्ध की सूचना मिलने पर भौगोलिक क्षेत्र को सील कर सकेंगे। प्रतिबंधित क्षेत्र से आबादी को बाहर निकालने, प्रवेश रोकने, स्कूलों एवं कार्यालयों को बंद करना, सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाना, क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध की शक्तियां भी सक्षम अधिकारियों के पास रहेंगी।
डीसी की अध्यक्षता में बनेंगी जिला आपदा प्रबंधन समितियां
सभी सरकारी विभागों का स्टाफ कोरोना के रोकथाम की ड्यूटी के लिए जिला प्रशासन के अधीन रहेगा। डीसी की अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन समिति अपने संबंधित जिलों में रोकथाम उपायों के बारे में योजना बनाने के लिए अधिकृत हैं। वे कार्य को सिरे चढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों से और अधिकारी ले सकते हैं।
नमूने लेने के लिए कोई निजी प्रयोगशाला अधिकृत नहीं
हरियाणा में कोरोना परीक्षण के नमूने लेने के लिए किसी भी निजी प्रयोगशाला को अधिकृत नहीं किया गया है। ऐसे सभी नमूने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार एकत्र किए जाएंगे और उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्त जिला नोडल अधिकारी द्वारा नामित प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा।
कोरोना की पुष्टि होने पर नोडल अधिकारी निकटतम सरकारी अस्पताल को सूचित करेंगे या फिर टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 108 पर कॉल करनी होगी। कोरोना को रोकने के लिए निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, डीसी, एसडीएम, सिविल सर्जन, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी व स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के अधिकृत अधिकारी जरूरी कदम उठाएंगे।
संदिग्ध को बलपूर्वक कर सकेंगे भर्ती, क्षेत्र सील करने की भी पावर
कोरोना का संदिग्ध व्यक्ति अगर दाखिल होने या अलग रहने से इनकार करता है तो अधिकृत अधिकारी उसे बलपूर्वक भर्ती कर सकते हैं। रिपोर्ट नेगेटिव आने और 14 दिन पूरा होने के बाद ही उसे घर भेजा जाएगा। किसी गांव, कस्बे, वार्ड, कॉलोनी, बस्ती में संदिग्ध की सूचना मिलने पर भौगोलिक क्षेत्र को सील कर सकेंगे। प्रतिबंधित क्षेत्र से आबादी को बाहर निकालने, प्रवेश रोकने, स्कूलों एवं कार्यालयों को बंद करना, सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगाना, क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध की शक्तियां भी सक्षम अधिकारियों के पास रहेंगी।
डीसी की अध्यक्षता में बनेंगी जिला आपदा प्रबंधन समितियां
सभी सरकारी विभागों का स्टाफ कोरोना के रोकथाम की ड्यूटी के लिए जिला प्रशासन के अधीन रहेगा। डीसी की अध्यक्षता में जिला आपदा प्रबंधन समिति अपने संबंधित जिलों में रोकथाम उपायों के बारे में योजना बनाने के लिए अधिकृत हैं। वे कार्य को सिरे चढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों से और अधिकारी ले सकते हैं।