HSSC भर्ती घोटालाः एसआईटी जांच से कोर्ट नाखुश, 3 आईपीएस अफसरों को केस सौंपने के आदेश
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हरियाणा राज्य चयन आयोग (एचएसएससी) भर्ती घोटाले की मंगलवार को सुनवाई के दौरान पंचकूला कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर बनी एसआईटी की जांच पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले की जांच तीन आईपीएस अधिकारी करेंगे। अधिकारियों की इस टीम को दो महीने में मामले की जांच कर रिपोर्ट फाइल करने के भी निर्देश दिए।
एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजे) नरेंद्र सूरा ने कहा कि हैरानी की बात है कि मामले की जांच कर रही पुलिस की एसआईटी ने कॉल ट्रांसक्रिप्शन की पूरी डीवीडी तक नहीं सुनी। साथ ही आरोपियों के मोबाइल से दो हजार से ज्यादा हुईं कॉल की जांच भी पूरी तरह से नहीं कर पाई। पंचकूला पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को कोर्ट में पेश किया।
एक आरोपी सुभाष के नाम को लेकर बचाव पक्ष के वकील समीर सेठी ने कहा कि पुलिस ने जिस सुभाष नामक कर्मचारी को मोबाइल फोन टैपिंग के आधार पर गिरफ्तार किया है, दरअसल वह मोबाइल नंबर किसी और सुभाष का है। वह एचएसएससी में ही कार्यरत है। उधर, पुलिस ने रिमांड पेपर में दर्ज फोन नंबर को क्लेरिकल मिस्टेक माना। पुलिस ने यह भी बताया कि एचएसएससी में सुभाष नाम के तीन कर्मचारी हैं।
गिरफ्तार किए गए सुभाष शर्मा के पास आयोग की परीक्षाओं से संबंधित ब्योरा था, जिसे लीक कर यह पूरा गोरखधंधा चलाया जा रहा था। पुलिस ने कोर्ट में आरोपी सुभाष की गिरफ्तारी से संबंधित कुछ सबूत भी दिखाए। साथ ही कहा कि जांच में अभी सभी सबूतों का खुलासा नहीं किया जा सकता। इस दलील के बाद कोर्ट ने आरोपी सुभाष को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया।
वहीं हरियाणा सीएम फ्लाइंग स्क्वाड के एसपी धीरज सेतिया ने कहा कि बचाव पक्ष ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की। हमने कोर्ट में सुभाष की गिरफ्तारी से संबंधित जरूरी सबूत पेश किए। सभी सबूत अंतिम चार्जशीट के साथ कोर्ट में दाखिल किए जाएंगे। अभी जांच चल रही है।
यह है मामला:
शिकायत के मुताबिक एचएसएससी के माध्यम से हरियाणा में विभिन्न पदों के लिए जो भी नौकरियां निकलती थीं, उसके लिए हरियाणा समेत निकटवर्ती राज्यों हिमाचल, पंजाब व राजस्थान के युवक भी आवेदन करते थे। इसके बाद शुरू होता था दलालों का काम। दलाल ऐसे युवकों की तलाश करते थे, जो नौकरी की चाह में नोट देने को तैयार हो जाते थे।
उसके बाद दलाल इन युवकों का संपर्क आरोपियों से करवाते थे। इसके बाद इन युवकों का इंटरव्यू क्लीयर करवाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी। इस मामले की शिकायत लगातार सरकार तक पहुंच रही थी। तत्कालीन नेता विपक्ष अभय चौटाला ने इस मामले को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू कराई। इसके बाद सीएम फ्लाइंग स्क्वाड ने हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमेटी के कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था।
एचएसएससी भर्ती घोटाला
. अप्रैल 2018 में सीएम उड़नदस्ते ने छापामार कर किया भंडाफोड़
.जांच में कदम-कदम पर उजागर हुई एसआईटी की लापरवाही, सरकार ने जांच अधिकारी को कुछ समय बाद पद से हटाया।
मामले में गिरफ्तार सभी 8 लोगों आरोपियों के बैंक खाते और प्रॉपर्टी की हुई जांच
. एसआईटी ने तीन आरोपियों के यहां छापा मारकर लाखों रुपये कैश, दो लैपटॉप, एक डायरी व कुछ बिल बरामद किए
. पंचकूला से कुछ डाटा बरामद किया है जिसमें कुछ पेपर्स की डिटेल है। ये वो पेपर और रिजल्ट हैं जो पिछले छह महीने में हुए हैं। - कुल 22 से ज्यादा हार्ड डिस्क के डाटा को एक जगह इकट्ठा किया गया, इनमें पिछले डेढ़ साल की भर्तियों का डाटा मौजूद
ये थे भर्ती रेट
. 4 लाख से 5 लाख क्लर्क (जनरल)
. 10 लाख ग्रिड ऑपरेटर
. 6 लाख टाइपिंग टेस्ट
. 7 लाख रुपए कंडक्टर भर्ती
आरोपी सुपरिंटेंडेंट का बेटा रहा था भर्ती में टॉपर
आरोपी सुभाष पराशर का बेटा अंकुश म्युनिसिपल कमेटी में सचिव बना है। रिजल्ट में वह टॉपर रहा था। उसे लिखित परीक्षा में सबसे ज्यादा 174 नंबर मिले थे। इंटरव्यू में भी 25 में से 17 नंबर दिए गए। हालांकि इंटरव्यू में दो उम्मीदवारों को अंकुश से ज्यादा 21-21 नंबर मिले, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ।