बहिबल गोलीकांडः राइफल बनी पूर्व एसएसपी के गले की फांस, तीन दिन और बढ़ा रिमांड
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बहिबल कलां गोलीकांड के मामले में गिरफ्तार मोगा के पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा का पुलिस रिमांड अदालत ने सोमवार को तीन दिन के लिए और बढ़ा दिया। आठ दिन के रिमांड के बाद पूर्व एसएसपी को जेएमआईसी चेतन शर्मा की अदालत में पेश किया गया। पेशी के दौरान चरणजीत सिंह के तर्क ही उनके लिए मुश्किल बन गए। उनका दावा था कि घटना वाले दिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी जिप्सी पर 12 बोर की राइफल से फायरिंग की थी।
इस पर एसआईटी ने तर्क दिया कि यदि एसएसपी की जिप्सी पर राइफल से फायरिंग हुई थी तो पुलिस वह राइफल बरामद क्यों नहीं कर पाई। इसके अलावा एसएसपी के ड्राइवर ने एसआईटी के पास दिए बयान में जिप्सी पर किसी भी तरह की फायरिंग होने का उल्लेख नहीं किया था। इसके बाद एसआईटी ने इस 12 बोर की राइफल के बारे में पूछताछ करने के लिए पूर्व एसएसपी का पांच दिन का पुलिस रिमांड मांगा लिया।
इस पर बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि चरणजीत शर्मा पिछले 8 दिन से एसआईटी की हिरासत में है और उनसे काफी पूछताछ हो चुकी है। ह्रदय रोग से पीड़ित होने के कारण उन्हें राहत दी जानी चाहिए। इस पर सरकारी पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि पुलिस द्वारा उनका नियमित मेडिकल चेकअप करवाया जा रहा है। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने उनका रिमांड तीन दिन के लिए बढ़ा दिया।
बहिबल गोलीकांड में वायरल ऑडियो की जांच जारी : एसआईटी
बहिबल कलां गोलीकांड में एसआईटी के सदस्य व एसएसपी कपूरथला सतिंदरपाल सिंह ने कहा कि मामले की पूरी निष्पक्षता और पारदर्शी ढंग से जांच हो रही है। इसमें कानून के तहत ही कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल बहिबल गोलीकांड की घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों की बातचीत वाली ऑडियो की भी जांच की जा रही है।
एसएसपी के दुर्व्यवहार से भड़का था मामला
वहीं इस मामले में एसआईटी ने अदालत में कहा कि उनकी जांच में सामने आया है कि घटना के समय एसएसपी चरणजीत सिंह व उनके रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह द्वारा लोगों से दुर्व्यवहार किए जाने के बाद मामला भड़का था।
प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस बनेगा गले की फांस
बहिबल गोलीकांड में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज इरादा ए कत्ल की एफआईआर ही आरोपी पुलिस अफसरों के गले की फांस बनती दिखाई देने लगी है। घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को थाना बाजाखाना में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर नंबर 129 दर्ज की गई थी। इसमें एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, एसपी बिक्रमजीत सिंह, इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह आदि के धारा 161 के दर्ज बयान का उल्लेख करते हुए एसआईटी ने कहा कि उस दिन पुलिस ने अपने बचाव में गोलियां चलाई थीं।
एसआईटी की पड़ताल के दौरान सामने आया है कि ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिस अधिकारियों व कर्मियों ने अपने हथियारों के साथ सारे कारतूस भी जमा करवा दिए थे। यदि पुलिस ने कोई गोली ही नहीं चलाई तो किसकी गोलियों से दो नौजवानों की मौत हुई और इतने लोग जख्मी हुए।