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टावर पर चढ़े शिक्षकों से हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा जरूर मिलेगा इंसाफ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 24 Nov 2016 12:44 AM IST
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नियुक्ति की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़े ईटीटी शिक्षकों के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान शिक्षकों के प्रतिनिधि को कोर्ट में बुलाकर आश्वासन दिया कि वे टावर पर चढ़े शिक्षकों को नीचे बुलाएं।
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कोर्ट ने कहा कि सिस्टम पर विश्वास रखें न्याय जरूर मिलेगा, हम न्याय देने के लिए ही बैठे हैं। साथ ही नाराजगी जताते हुए कहा कि इंसाफ पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लिया जाए, इस तरह से टावर पर चढ़कर इंसाफ नहीं मिलता है।
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जस्टिस दया चौधरी ने ईटीटी शिक्षकों के मोबाइल टावर पर चढ़ने की घटना को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इस पत्र पर मुख्य न्यायाधीश एसजे वजीफदार ने संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए पीआईएल बेंच को भेज दिया।
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बुधवार को इस जनहित याचिका पर सुबह सुनवाई आरंभ हुई। जस्टिस एसएस सरों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यूटी प्रशासन से वर्तमान की स्थिति और पंजाब सरकार से उनका पक्ष रखने को कहते हुए सुनवाई लंच के बाद करने का आदेश दिया।
'न हों जान जोखिम में डालने वाले प्रदर्शन'
टीचर
- फोटो : self
इस पर पंजाब सरकार की ओर से बताया गया कि यूनियन के लीडरों ने मुख्यमंत्री से मिलने के लिए 26 नवंबर की अप्वाइंटमेंट ली है, तभी इस बारे में बात हो सकेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि अभी इसमें तीन दिन बाकी हैं और शिक्षकों को ऐसे हालात में नहीं छोड़ा जा सकता है। ऐसे में उन्होंने शिक्षकों के प्रतिनिधि से कहा कि वे टावर पर चढ़े शिक्षकों को बताएं कि हाईकोर्ट ने इस मामले को सुनना आरंभ किया है और वे नीचे उतर आएं।
जान जोखिम में डालने वाले प्रदर्शन न हों
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि वे सुनिश्चित करें कि जान को जोखिम में डालने वाले विरोध प्रदर्शन न हों। विरोध प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी की जान की तर्ज पर ऐसी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
ऐसे में कानूनी एक्शन लेने और कानूनी प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं है, जो कार्रवाई बनती है वह की जाए। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन और पुलिस के पास शिक्षकों को टावर पर चढ़ने से रोकना ही एक काम नहीं है।
यह दिए विस्तृत आदेश
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नियुक्तियों के बारे में और यूनियन लीडरों की सीएम के साथ हुई बैठक के बारे में अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। यूटी प्रशासन को हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि अगली सुनवाई पर यह बताएं कि इस प्रकार के विरोध को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। यूनियन के लीडरों को भी अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहने को कहा गया है। साथ ही उनकी मांगों को लेकर पूरी व्यवस्थित रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने को कहा गया है।
जान जोखिम में डालने वाले प्रदर्शन न हों
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि वे सुनिश्चित करें कि जान को जोखिम में डालने वाले विरोध प्रदर्शन न हों। विरोध प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी की जान की तर्ज पर ऐसी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
ऐसे में कानूनी एक्शन लेने और कानूनी प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं है, जो कार्रवाई बनती है वह की जाए। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन और पुलिस के पास शिक्षकों को टावर पर चढ़ने से रोकना ही एक काम नहीं है।
यह दिए विस्तृत आदेश
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नियुक्तियों के बारे में और यूनियन लीडरों की सीएम के साथ हुई बैठक के बारे में अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। यूटी प्रशासन को हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि अगली सुनवाई पर यह बताएं कि इस प्रकार के विरोध को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। यूनियन के लीडरों को भी अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहने को कहा गया है। साथ ही उनकी मांगों को लेकर पूरी व्यवस्थित रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने को कहा गया है।