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मई में होगी सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के वन्यजीवों की गणना
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चंडीगढ़। शहर की सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में वन्यजीवों की गणना मई महीने के पहले सप्ताह में होगी। गणना पांच दिन चलेगी। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान से जवाब मिलने के बाद यूटी प्रशासन के पर्यावरण विभाग ने इस गणना की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
यूटी प्रशासन के वन विभाग की तरफ से यह गणना करवाई जाएगी। इसके चलते 22 से 24 अप्रैल तक वन विभाग अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान की तरफ से विभाग को तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। वही विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी करेंगे। इस संबंध में वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वन्यजीवों की दूसरी गणना का रास्ता साफ हो गया है, जिसके लिए वह पिछले कुछ महीनों से प्रयासरत थे।
पर्यावरण विभाग ने पिछले साल भी गणना कराने का प्रयास किया था लेकिन लॉकडाउन के चलते गणना नहीं हो सकी। बीते दिनों ही विभाग ने देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान को रिमाइंडर भेजा गया था। सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में वन्यजीवों की पहली गणना वर्ष 2010 में की गई थी। वर्ष 2010 में तीन दिन चली गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों और अन्य एनजीओ के सहयोग से करवाई गई थी। उस समय गणना में अधिकतर वन्यजीव आसानी से दिख गए थे। हालांकि तेंदुए नहीं दिखे थे, लेकिन उनके पंजों के निशान जरूर मिले थे। पहली गणना रिपोर्ट के अनुसार, सांभर की संख्या लगभग 1000 से 1200 के करीब बताई गई थी, वहीं मोर 900 से 1100 के करीब पाए गए थे। यूटी के वन विभाग की तरफ से पिछले वर्ष अप्रैल माह में दूसरी बार ये गणना की जानी थी, लेकिन कोरोना के चलते विभाग का ये प्लान सिरे नहीं चढ़ पाया।
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यूटी प्रशासन के वन विभाग की तरफ से यह गणना करवाई जाएगी। इसके चलते 22 से 24 अप्रैल तक वन विभाग अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देगा। भारतीय वन्यजीव संस्थान की तरफ से विभाग को तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी। वही विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षित भी करेंगे। इस संबंध में वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वन्यजीवों की दूसरी गणना का रास्ता साफ हो गया है, जिसके लिए वह पिछले कुछ महीनों से प्रयासरत थे।
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पर्यावरण विभाग ने पिछले साल भी गणना कराने का प्रयास किया था लेकिन लॉकडाउन के चलते गणना नहीं हो सकी। बीते दिनों ही विभाग ने देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान को रिमाइंडर भेजा गया था। सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में वन्यजीवों की पहली गणना वर्ष 2010 में की गई थी। वर्ष 2010 में तीन दिन चली गणना भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ, पर्यावरणविद, पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों और अन्य एनजीओ के सहयोग से करवाई गई थी। उस समय गणना में अधिकतर वन्यजीव आसानी से दिख गए थे। हालांकि तेंदुए नहीं दिखे थे, लेकिन उनके पंजों के निशान जरूर मिले थे। पहली गणना रिपोर्ट के अनुसार, सांभर की संख्या लगभग 1000 से 1200 के करीब बताई गई थी, वहीं मोर 900 से 1100 के करीब पाए गए थे। यूटी के वन विभाग की तरफ से पिछले वर्ष अप्रैल माह में दूसरी बार ये गणना की जानी थी, लेकिन कोरोना के चलते विभाग का ये प्लान सिरे नहीं चढ़ पाया।
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