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Hindi News ›   Chandigarh ›   Corruption Cases Inquiry in Haryana

हरियाणा में भ्रष्टाचार की जांच में भी दिखाया जा रहा है शिष्टाचार, 110 मामलों की जांच लटकी

Wed, 02 Sep 2020 10:35 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 02 Sep 2020 10:35 AM IST
सार

  • 10 विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप
  • मुख्य सचिव ने 11 सितंबर को बुलाई मुख्य सतर्कता अधिकारियों की बैठक
  • कई मामले 2 से 5 साल पुराने हैं और उनकी जांच अभी तक पूरी नहीं हुई

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Corruption Cases Inquiry in Haryana
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

हरियाणा में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच भी बड़े शिष्टाचार से की जा रही है। 10 विभागों के 110 मामलों की जांच लंबे समय से लटकी है। मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने मामलों की जांच की धीमी रफ्तार को देखते हुए 11 सितंबर को सभी विभागों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों की बैठक बुलाई है।
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सरकार के आदेशानुसार इस बैठक में लंबित मामलों की जांच की समीक्षा की जाएगी। अनेक मामले 2 से 5 साल पुराने हैं और उनकी जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। जिससे सरकार नाखुश है। इसलिए जांच जल्द पूरी कराने के लिए समीक्षा बैठक करने जा रही है। जांच में विभाग भी सहयोग नहीं कर रहे। मुख्य सतर्कता अधिकारियों को आरोपों के बारे में विभागीय टिप्पणियां मुहैया नहीं कराई जा रही।
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इन विभागों के इतने केस लंबित

- एचएसआईआईडीसी, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग: 10 मामले
- स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान विभाग: 5 मामले
- सहकारिता विभाग: 12 मामले
- गृह विभाग: 3 मामले
- कृषि विभाग: 15 मामले
- ऊर्जा विभाग: 10 मामले
- खाद्य एवं आपूर्ति विभाग: 9 मामले
- विकास एवं पंचायत विभाग: 31 मामले
- सिंचाई विभाग: 4
- राजस्व विभाग: 2
- शहरी स्थानीय निकाय: 9

ये हैं भ्रष्टाचार के आरोप

- फर्म से मिलीभगत कर खदान क्षेत्र चलाने के लिए कोई काम न करने व रिश्वत लेने बारे
- एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा बिल्डर्स से मिलीभगत कर जमीन अधिग्रहण न करना
- एक ही परिवार के सदस्यों को प्लॉट आवंटन
- आय से अधिक संपत्ति, रिश्वत लेना व सरकारी वाहन का दुरुपयोग करना
- बिलों में 6 प्रतिशत जीएसटी घोटाला
- ई-नीलामी में कम दरों पर प्लॉट छोड़ना
- फर्जी उत्पादन दिखाना
- मरीजों को महंगी व बाहर की दवाई अपने फायदे के लिए लिखना
- सिविल निर्माण के कार्यों में अनियमितता
- फर्जी व झूठे टीए-डीए बिल लेना
- जनशिकायतों का रिकॉर्ड नष्ट करना
- फर्जी दस्तावेज के आधार पर 65 दुकानों की बिक्री
- नोट गिनने की मशीन खरीदने में घोटाला
- कर्मचारियों की गलत तरीके से नियुक्ति
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