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मकान निर्माण के बाद बचे अपशिष्ट सामग्री को खरीदेगा निगम, नीति का ड्राफ्ट तैयार
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चंडीगढ़। शहर में पुराने मकान को तोड़ने या नए मकान के निर्माण के बाद बचे मलबे को शहरवासी अब नगर निगम को दे सकेंगे। बदले में उन्हें अच्छी खासी प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) मिलेगी। यूटी प्रशासन ने इसके लिए कंस्ट्रक्शन व डिमॉलिशन वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। पॉलिसी के लागू होने के बाद मलबे को फेंकने पर मनाही होगी और ऐसा करने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। बुधवार को प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल के सुझाव को बाद ड्राफ्ट को तैयार किया गया। अब मंजूरी के लिए उसे प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेजा जाएगा।
प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि इस नीति को लाने का मकसद है कि मकान को तोड़ने के बाद जो भी मलबा निकलता है, उसका 100 फीसदी निपटारा किया जाए। मलबे को इधर-उधर फेंकने की बजाय उसे री-साइकिल कर अन्य चीजों का निर्माण किया जाएगा। यह नीति आम नागरिकों, निजी ठेकेदार और सरकारी विभागों के लिए एक समान होगी।
धर्मपाल ने बताया कि ड्राफ्ट को तय करने के लिए बुधवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई थी। सभी के सुझाव लेने के बाद ड्राफ्ट बना लिया गया है। अब मंजूरी के लिए उसे प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेजा जाएगा। अगर प्रशासक की मंजूरी मिल जाती है तो इस पर जनता के सुझाव मांगे जाएंगे और जो भी लोगों की तरफ से सुझाव आएंगे उन सभी पर काम करके इस नीति की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक जो लोग मलबे को इधर-उधर फेंक देते थे, इस नीति के आने से उन पर लगाम लगेगी। ये शहर के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है।
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लोगों के सामने होंगे दो विकल्प, निगम को बेचें या खुद करें निपटारा
नीति के ड्राफ्ट के अनुसार, पुराने मकान को तोड़कर नया मकान बनाते समय लोगों को दो विकल्प दिए जाएंगे। पहला विकल्प मलबे को नगर निगम को दे दें और दूसरा खुद निपटारा करें। बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के साथ ही दोनों में से एक विकल्प को चुनना होगा। अगर वह खुद निपटारे की बात को कबूल करते हैं तो बताना होगा कि कैसे और कहां मलबे का इस्तेमाल करेंगे। अगर वह निगम को देना चाहेंगे तो उसके लिए लोगों को बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के शुल्क के साथ इसके लिए एक अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा। नंबर पर कॉल कर लोग निगम की गाड़ी को मंगवा सकेंगे। हालांकि इसमें लोगों को फायदा ये होगा कि उनकी तरफ से जो भी मलबा (जैसे मकान निर्माण बाद बची ईंट, गिट्टी, रेत आदि) निगम को देते हैं तो बदले में उन्हें री-साइकिल सामग्री का 50 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
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प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि इस नीति को लाने का मकसद है कि मकान को तोड़ने के बाद जो भी मलबा निकलता है, उसका 100 फीसदी निपटारा किया जाए। मलबे को इधर-उधर फेंकने की बजाय उसे री-साइकिल कर अन्य चीजों का निर्माण किया जाएगा। यह नीति आम नागरिकों, निजी ठेकेदार और सरकारी विभागों के लिए एक समान होगी।
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धर्मपाल ने बताया कि ड्राफ्ट को तय करने के लिए बुधवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई थी। सभी के सुझाव लेने के बाद ड्राफ्ट बना लिया गया है। अब मंजूरी के लिए उसे प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेजा जाएगा। अगर प्रशासक की मंजूरी मिल जाती है तो इस पर जनता के सुझाव मांगे जाएंगे और जो भी लोगों की तरफ से सुझाव आएंगे उन सभी पर काम करके इस नीति की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक जो लोग मलबे को इधर-उधर फेंक देते थे, इस नीति के आने से उन पर लगाम लगेगी। ये शहर के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है।
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लोगों के सामने होंगे दो विकल्प, निगम को बेचें या खुद करें निपटारा
नीति के ड्राफ्ट के अनुसार, पुराने मकान को तोड़कर नया मकान बनाते समय लोगों को दो विकल्प दिए जाएंगे। पहला विकल्प मलबे को नगर निगम को दे दें और दूसरा खुद निपटारा करें। बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के साथ ही दोनों में से एक विकल्प को चुनना होगा। अगर वह खुद निपटारे की बात को कबूल करते हैं तो बताना होगा कि कैसे और कहां मलबे का इस्तेमाल करेंगे। अगर वह निगम को देना चाहेंगे तो उसके लिए लोगों को बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के शुल्क के साथ इसके लिए एक अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा। नंबर पर कॉल कर लोग निगम की गाड़ी को मंगवा सकेंगे। हालांकि इसमें लोगों को फायदा ये होगा कि उनकी तरफ से जो भी मलबा (जैसे मकान निर्माण बाद बची ईंट, गिट्टी, रेत आदि) निगम को देते हैं तो बदले में उन्हें री-साइकिल सामग्री का 50 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि मिलेगी।