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हरियाणाः लॉकडाउन से एनएचएम-ठेका कर्मियों के सामने रोटी का संकट, उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी
Fri, 03 Apr 2020 11:25 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 03 Apr 2020 11:25 AM IST
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कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे स्वास्थ्य विभाग के 14 हजार एनएचएम कर्मचारियों व पांच हजार से ज्यादा ठेका कर्मचारियों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इन्हें तीन महीने से वेतन ही नहीं मिला है। वेतन न मिलने से बंद के दौरान दुकानदार राशन भी उधार देने से मना कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को बार-बार आग्रह करने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए जा रहे हैं। एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने 30 मार्च को मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर जल्दी बकाया वेतन का भुगतान व सुरक्षा के आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की थी।
लेकिन, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने से इन बीस हजार से ज्यादा कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों की नारजगी को ध्यान में रखते हुए सर्व कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जल्दी से जल्दी बकाया वेतन का भुगतान करने व सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण देने की मांग की है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व राजेंद्र प्रसाद बाटू ने बताया कि एनएचएम कर्मचारी मरीजों की स्क्त्रस्ीनिंग, सैंपल कलेक्शन, आइसोलेशन वार्ड में देखभाल व उपचार, क्वारंटीन किए गए मरीजों की देखभाल, संभावित कोरोना मरीज को एम्बुलेंस से अस्पताल तक पहुंचाने से लेकर दवाई वितरण का काम कर रहे हैं।
इन कर्मचारियों को समय पर वेतन देना चाहिए। एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान रिहान रजा ने सकसं को बताया है कि एनएचएम कर्मचारियों का सेवा नियम अनुसार तीन महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। वेतन भी टुकड़ों में दिया जाता है। यह वेतन कभी भी समय पर नही मिलता। एनएचएम कर्मचारियों को कोरोना वायरस संक्त्रस्मण से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण तक नहीं दिए गए हैं। यह काफी गंभीर मामला है। एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा ने इन परेशानियों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर अवगत भी कराया था। लेकिन, अभी तक न तो बकाया वेतन मिला और न ही सुरक्षा किट मिली है।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री, उप महासचिव सबिता व उप प्रधान सीलक राम मलिक ने भी एनएचएम व ठेका कर्मचारियों को जल्दी वेतन देने की मांग की है ताकि वे संकट के समय परिवार का पालन पोषण कर सकें।
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लेकिन, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं होने से इन बीस हजार से ज्यादा कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों की नारजगी को ध्यान में रखते हुए सर्व कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जल्दी से जल्दी बकाया वेतन का भुगतान करने व सुरक्षा के पर्याप्त उपकरण देने की मांग की है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा, महासचिव सतीश सेठी व राजेंद्र प्रसाद बाटू ने बताया कि एनएचएम कर्मचारी मरीजों की स्क्त्रस्ीनिंग, सैंपल कलेक्शन, आइसोलेशन वार्ड में देखभाल व उपचार, क्वारंटीन किए गए मरीजों की देखभाल, संभावित कोरोना मरीज को एम्बुलेंस से अस्पताल तक पहुंचाने से लेकर दवाई वितरण का काम कर रहे हैं।
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इन कर्मचारियों को समय पर वेतन देना चाहिए। एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान रिहान रजा ने सकसं को बताया है कि एनएचएम कर्मचारियों का सेवा नियम अनुसार तीन महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। वेतन भी टुकड़ों में दिया जाता है। यह वेतन कभी भी समय पर नही मिलता। एनएचएम कर्मचारियों को कोरोना वायरस संक्त्रस्मण से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण तक नहीं दिए गए हैं। यह काफी गंभीर मामला है। एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा ने इन परेशानियों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर अवगत भी कराया था। लेकिन, अभी तक न तो बकाया वेतन मिला और न ही सुरक्षा किट मिली है।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री, उप महासचिव सबिता व उप प्रधान सीलक राम मलिक ने भी एनएचएम व ठेका कर्मचारियों को जल्दी वेतन देने की मांग की है ताकि वे संकट के समय परिवार का पालन पोषण कर सकें।
उद्योगों पर कार्रवाई की तैयारी, हटाए गए श्रमिकों का रिकॉर्ड तलब
कोरोना के कारण बंद में श्रमिकों को हटाने वाले उद्योगों पर सरकार कार्रवाई की तैयारी में है। सरकार ने सभी जिला श्रमायुक्तों व विभाग के उप-निदेशकों को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में उद्योगों से से हटाए गए श्रमिकों, बिना वेतन व दिहाड़ी के श्रमिकों, ड्राई राशन न मिलने वाले श्रमिकों व आश्रय गृहों में ठहराए गए मजदूरों की सूची तैयार कर 72 घंटों के अंदर को मुख्यालय को भिजवाने के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने वीरवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग से फील्ड अधिकारियों के साथ श्रमिकों की स्थिति की समीक्षा की।
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अधिकारी ईट-भट्ठों, क्रशर जोन, निर्माण स्थलों व अधिक जनसंख्या वाले पानीपत, गुरुग्राम व फरीदाबाद शहरों में रह रहे श्रमिकों की जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से स्थलों को दौरा करें। वीडियो क्लीपिंग के साथ फोटो मुख्यालय को भेजे जाएं। लॉकडाउन अवधि के दौरान कोई भी उद्योग या नियोक्ता अपने संस्थानों से किसी भी श्रमिक को जबरन निकाल नहीं सकता और यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस अवधि के दौरान उद्योग व नियोक्ता को अपने स्तर पर या जिला प्रशासन, रेडक्रॉस व सामाजिक संगठनों के सहयोग से श्रमिकों के खाने पीने व ठहरने की व्यवस्था करनी होगी।
दुष्यंत चौटाला ने अधिकारियों को कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का विनिर्माण करने वाली कंपनियों का संचालन आवश्यक रूप से सुनिश्चित करें। वे इस बात का भी ध्यान रखें कि कोई भी लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमी अपने श्रमिकों को जबरन अवकाश पर न भेजें। क्योंकि बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान व उत्तर-पूर्वी राज्यों के मजदूर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व हरियाणा के उद्योगों में कार्यरत हैं। सभी जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे थोक एवं खुदरा व्यापारियों की दुकानों पर रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं राशन, किरयाना व सब्जी के भाव की सूची सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों के अनुरूप चिपकाना सुनिश्चित करें ताकि दुकानदार ग्राहकों से अधिक मूल्य न वसूल सके।
उन्होंने कहा कि अगर दुकानदार अधिक मूल्य वसूलते हैं तो उनके खिलाफ महामारी अधिनियम के उल्लघंन के अनुरूप सख्त कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जाने वाले अप्रैल का राशन का कोटा 5 अप्रैल तक व मई माह में वितरित किए जाने वाला कोटा 15 अप्रैल से पहले डिपो होल्डर के पास पहुंच जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अधिकारी ईट-भट्ठों, क्रशर जोन, निर्माण स्थलों व अधिक जनसंख्या वाले पानीपत, गुरुग्राम व फरीदाबाद शहरों में रह रहे श्रमिकों की जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से स्थलों को दौरा करें। वीडियो क्लीपिंग के साथ फोटो मुख्यालय को भेजे जाएं। लॉकडाउन अवधि के दौरान कोई भी उद्योग या नियोक्ता अपने संस्थानों से किसी भी श्रमिक को जबरन निकाल नहीं सकता और यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस अवधि के दौरान उद्योग व नियोक्ता को अपने स्तर पर या जिला प्रशासन, रेडक्रॉस व सामाजिक संगठनों के सहयोग से श्रमिकों के खाने पीने व ठहरने की व्यवस्था करनी होगी।
दुष्यंत चौटाला ने अधिकारियों को कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं का विनिर्माण करने वाली कंपनियों का संचालन आवश्यक रूप से सुनिश्चित करें। वे इस बात का भी ध्यान रखें कि कोई भी लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम श्रेणी के उद्यमी अपने श्रमिकों को जबरन अवकाश पर न भेजें। क्योंकि बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान व उत्तर-पूर्वी राज्यों के मजदूर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र व हरियाणा के उद्योगों में कार्यरत हैं। सभी जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे थोक एवं खुदरा व्यापारियों की दुकानों पर रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं राशन, किरयाना व सब्जी के भाव की सूची सरकार द्वारा निर्धारित मूल्यों के अनुरूप चिपकाना सुनिश्चित करें ताकि दुकानदार ग्राहकों से अधिक मूल्य न वसूल सके।
उन्होंने कहा कि अगर दुकानदार अधिक मूल्य वसूलते हैं तो उनके खिलाफ महामारी अधिनियम के उल्लघंन के अनुरूप सख्त कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जाने वाले अप्रैल का राशन का कोटा 5 अप्रैल तक व मई माह में वितरित किए जाने वाला कोटा 15 अप्रैल से पहले डिपो होल्डर के पास पहुंच जाएगा।