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घर चले हम: अपने गृह राज्य जाते प्रवासी मजदूर बोले- थैक्यू चंडीगढ़, मौका मिला तो हम फिर लौटेंगे
Thu, 14 May 2020 02:31 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 14 May 2020 02:31 PM IST
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प्रवासी मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ से दो श्रमिक स्पेशल ट्रेन बिहार और उत्तर प्रदेश जाने के लिए रवाना हुईं। बिहार के जिला पूर्णिया के लिए 1412 श्रमिकों को लेकर स्पेशल ट्रेन दोपहर 2 बजे चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से निकली। वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर के लिए चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से ही 1212 श्रमिकों को लेकर शाम 7 बजे रवाना हुई। 24 कोच वाली इस ट्रेन के प्रत्येक कोच में 54 यात्री सवार थे। इनमें ज्यादातर लोग देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज समेत आसपास के जिलों के रहने वाले शामिल थे।
श्रमिक हाथ हिलाकर बोले... थैक्यू चंडीगढ़
सिटी ब्यूटीफुल में आने के बाद, यहां से कोई जाना नहीं चाहता। यह राय दूसरे राज्यों से चंडीगढ़ में आकर काम करने वाले श्रमिकों ही हमेशा रही है। अगर दिल्ली और चंडीगढ़ की बात करें तो यूपी और बिहार सहित दूसरे राज्यों से आकर यहां काम करने वाले श्रमिकों की पहली पसंद चंडीगढ़ है। यह अनुभव चंडीगढ़ से गोरखपुर और बिहार के पूर्णिया जाने वाले श्रमिकों ने साझा किए।
इन श्रमिकों का कहना है कि वे यहां से जाना नहीं चाहते थे, लेकिन यहां लॉकडान के चलते बिना काम खाली कब तक बैठते। जो श्रमिकों ने कमाया था, वे पैसे कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान खर्च हो गए हैं। इसलिए उन्हें मजबूरी में चंडीगढ़ से जाना पड़ रहा है। यहां से गोरखपुर जाने वाले श्रमिकों ने ट्रेन में बैठकर खिड़की से हाथ निकालकर चंडीगढ़ को थैक्यू कहा।
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जम्मू और कारगिल के लिए रवाना हुए 223 लोग
लॉकडाउन में चंडीगढ़ में कारगिल और जम्मू के फंसे 223 लोगों को घर के लिए रवाना किया गया। सेक्टर 17 से 10 बसों के जरिए उन्हें घर भेज गया। लॉकडाउन में चंडीगढ़ में जम्मू और कारगिल के विद्यार्थी और अन्य लोग फंसे हुए थे। यूटी प्रशासन और जम्मू प्रशासन के संयुक्त प्रयास से बुधवार को 10 बसें सेक्टर 17 पहुंचीं। जहां से 223 लोगों को जम्मू और कारगिल के लिए रवाना किया गया।
नोडल अधिकारी अमजद ने बताया कि चार बसों को कारगिल रवाना किया गया और छह बसों को जम्मू भेज गया है। एक बस 20 से 25 लोगों को भेजा गया है। वीरवार को नयागांव से बसों के जरिए बच्चों को भेज जाएगा। देर रात तक बसों के जरिए बच्चों को भेजने का सिलसिला जारी रहा।
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श्रमिक हाथ हिलाकर बोले... थैक्यू चंडीगढ़
सिटी ब्यूटीफुल में आने के बाद, यहां से कोई जाना नहीं चाहता। यह राय दूसरे राज्यों से चंडीगढ़ में आकर काम करने वाले श्रमिकों ही हमेशा रही है। अगर दिल्ली और चंडीगढ़ की बात करें तो यूपी और बिहार सहित दूसरे राज्यों से आकर यहां काम करने वाले श्रमिकों की पहली पसंद चंडीगढ़ है। यह अनुभव चंडीगढ़ से गोरखपुर और बिहार के पूर्णिया जाने वाले श्रमिकों ने साझा किए।
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इन श्रमिकों का कहना है कि वे यहां से जाना नहीं चाहते थे, लेकिन यहां लॉकडान के चलते बिना काम खाली कब तक बैठते। जो श्रमिकों ने कमाया था, वे पैसे कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान खर्च हो गए हैं। इसलिए उन्हें मजबूरी में चंडीगढ़ से जाना पड़ रहा है। यहां से गोरखपुर जाने वाले श्रमिकों ने ट्रेन में बैठकर खिड़की से हाथ निकालकर चंडीगढ़ को थैक्यू कहा।
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जम्मू और कारगिल के लिए रवाना हुए 223 लोग
लॉकडाउन में चंडीगढ़ में कारगिल और जम्मू के फंसे 223 लोगों को घर के लिए रवाना किया गया। सेक्टर 17 से 10 बसों के जरिए उन्हें घर भेज गया। लॉकडाउन में चंडीगढ़ में जम्मू और कारगिल के विद्यार्थी और अन्य लोग फंसे हुए थे। यूटी प्रशासन और जम्मू प्रशासन के संयुक्त प्रयास से बुधवार को 10 बसें सेक्टर 17 पहुंचीं। जहां से 223 लोगों को जम्मू और कारगिल के लिए रवाना किया गया।
नोडल अधिकारी अमजद ने बताया कि चार बसों को कारगिल रवाना किया गया और छह बसों को जम्मू भेज गया है। एक बस 20 से 25 लोगों को भेजा गया है। वीरवार को नयागांव से बसों के जरिए बच्चों को भेज जाएगा। देर रात तक बसों के जरिए बच्चों को भेजने का सिलसिला जारी रहा।