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शराब माफिया के खिलाफ मंत्री विज ने खोला मोर्चा, बोले- बिना रपट के पुलिस कैसे करे कार्रवाई
Fri, 08 May 2020 10:02 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 08 May 2020 10:02 AM IST
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गृह मंत्री अनिल विज
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सोनीपत के खरखौदा में शराब माफिया द्वारा की जा रही शराब तस्करी में हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बड़ा खुलासा किया है। विज ने कहा कि गोदामों से शराब चोरी के मामले में गृह मंत्री होने के नाते मैंने पुलिस पर कार्रवाई कर दी है, लेकिन आबकारी विभाग अभी चुप्पी साधे बैठा है। जबकि यह तस्करी आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत से हो रही थी। उन्होंने कहा कि बिना पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत के एक भी शराब की बोतल इधर से उधर करना संभव नहीं है।
पत्रकारों के साथ वीडियो कांफ्रेंस में मंत्री अनिल विज ने कहा कि आबकारी विभाग की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई रपट नहीं लिखवाई गई है, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा सके। हमने इस मामले में कुछ भी नहीं छुपाया है। जो कुछ है सब जनता के सामने है। मंत्री अनिल विज ने कहा कि शराब आबकारी विभाग की संपत्ति होती है। इसका हिसाब आबकारी विभाग के पास होता है। जब तक आबकारी विभाग इस मामले में रपट नहीं लिखवाता, हम कुछ नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा है कि हमे जानकारी मिली है कि शराब के गोदामों से वह ब्रांड भी मिले हैं जो हरियाणा में बनते ही नहीं है। इस बात पर संज्ञान तो आबकारी विभाग को लेना चाहिए। विज ने कहा कि गोदाम में पांच हजार पेटियां कम है। जिस तरह से यहां पर बाहरी शराब मिली है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाहर से शराब लाकर यहां बेची जाती थी। यह भी जांच कर रहे हैं कि कहीं यहां पर ट्रांजिट कैंप न बना रखा हो। लॉकडाउन के दौरान दो लाख बोतलें पकड़ी गई हैं। यह जानना जरूरी है कि यह बोतलें कहां से आईं। लिहाजा ठेकों के स्टाक की जांच भी जरूरी है।
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जांच होगी
मैने गृह सचिव विजयवर्धन से कहा है कि आबकारी विभाग के एसीएस से बात करके इस मामले में एसआईटी गठित कर आबकारी विभाग के भी किसी वरिष्ठ अधिकारी को एसआईटी में शामिल किया जाए। जिससे इस मामले में संलिप्त आबकारी विभाग के बड़े सफेदपोशों के नाम भी सामने आ सकें।
- अनिल विज, गृह मंत्री
मुख्यमंत्री करेंगे फैसला कौन सा एसीएस करेगा जांच
शराब माफिया के खेल को लेकर अब मुख्यमंत्री मनेाहर लाल किसी सीनियर आईएएस की ड्यूटी लगाएंगे। यह ड़यूटी किसी एसीएस अधिकारी की होगी। गृह विभाग के एसीएस के पास एसआईटी में शामिल करने के लिए आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम आ गया है। चूंकि यह मामला बड़ा है इसलिए यह एसआईटी एससीएस स्तर के अधिकारी के अधीन काम करेगी। ऐसे में एसीएस नियुक्त करने का अधिकार मुख्यमंत्री के ही पास है। लिहाजा फाइल सुबह सीएम के पास पहुंच जाएगी। यह निर्णय सीएम लेंगे कि कौन सा अधिकारी मामले की जांच करेगा।
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पत्रकारों के साथ वीडियो कांफ्रेंस में मंत्री अनिल विज ने कहा कि आबकारी विभाग की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई रपट नहीं लिखवाई गई है, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा सके। हमने इस मामले में कुछ भी नहीं छुपाया है। जो कुछ है सब जनता के सामने है। मंत्री अनिल विज ने कहा कि शराब आबकारी विभाग की संपत्ति होती है। इसका हिसाब आबकारी विभाग के पास होता है। जब तक आबकारी विभाग इस मामले में रपट नहीं लिखवाता, हम कुछ नहीं कर सकते।
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उन्होंने कहा है कि हमे जानकारी मिली है कि शराब के गोदामों से वह ब्रांड भी मिले हैं जो हरियाणा में बनते ही नहीं है। इस बात पर संज्ञान तो आबकारी विभाग को लेना चाहिए। विज ने कहा कि गोदाम में पांच हजार पेटियां कम है। जिस तरह से यहां पर बाहरी शराब मिली है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बाहर से शराब लाकर यहां बेची जाती थी। यह भी जांच कर रहे हैं कि कहीं यहां पर ट्रांजिट कैंप न बना रखा हो। लॉकडाउन के दौरान दो लाख बोतलें पकड़ी गई हैं। यह जानना जरूरी है कि यह बोतलें कहां से आईं। लिहाजा ठेकों के स्टाक की जांच भी जरूरी है।
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जांच होगी
मैने गृह सचिव विजयवर्धन से कहा है कि आबकारी विभाग के एसीएस से बात करके इस मामले में एसआईटी गठित कर आबकारी विभाग के भी किसी वरिष्ठ अधिकारी को एसआईटी में शामिल किया जाए। जिससे इस मामले में संलिप्त आबकारी विभाग के बड़े सफेदपोशों के नाम भी सामने आ सकें।
- अनिल विज, गृह मंत्री
मुख्यमंत्री करेंगे फैसला कौन सा एसीएस करेगा जांच
शराब माफिया के खेल को लेकर अब मुख्यमंत्री मनेाहर लाल किसी सीनियर आईएएस की ड्यूटी लगाएंगे। यह ड़यूटी किसी एसीएस अधिकारी की होगी। गृह विभाग के एसीएस के पास एसआईटी में शामिल करने के लिए आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम आ गया है। चूंकि यह मामला बड़ा है इसलिए यह एसआईटी एससीएस स्तर के अधिकारी के अधीन काम करेगी। ऐसे में एसीएस नियुक्त करने का अधिकार मुख्यमंत्री के ही पास है। लिहाजा फाइल सुबह सीएम के पास पहुंच जाएगी। यह निर्णय सीएम लेंगे कि कौन सा अधिकारी मामले की जांच करेगा।