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लॉकडाउन का असर: बाजारों में गिरने लगे शोरूमों के शटर, मुश्किल हो गया निकाल पाना किराया
Thu, 30 Jul 2020 12:26 PM IST
खुशबू गोयल
आशीष वर्मा, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 30 Jul 2020 12:26 PM IST
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सेक्टर 17 में शोरूम
- फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन ने व्यापारियों की कमर तोड़कर रख दी है। कारोबार पूरी तरह से ठप है। आगे भी उजाले की कोई उम्मीद नहीं दिख रही। इसका सबसे बुरा असर उन व्यापारियों पर पड़ा है, जो किराए के शोरूम पर बैठे हैं। किसी का किराया डेढ़ लाख रुपये प्रति महीना है तो किसी का आठ लाख रुपये। कर्मचारियों व बिजली का खर्च अलग। चार महीने से ग्राहक नहीं आए हैं।
ऐसे में व्यापारियों के लिए अपने शोरूम का किराया व अन्य खर्चे निकाल पाना मुश्किल हो गया है। कुछ व्यापारियों ने शोरूम मालिकों से संपर्क कर किराया माफी या राहत देने की बातचीत की। कुछ की बातचीत चल रही है तो कइयों की बात नहीं बन पाई। ऐसी स्थिति में कई व्यापारियों ने शोरूम खाली करने शुरू कर दिए हैं। सेक्टर-17 में पांच, सेक्टर-35 में सात से ज्यादा, सेक्टर-23 में दो और सेक्टर-40 में तीन से ज्यादा शोरूम खाली हो गए हैं।
इन शोरूमों पर टू लेट के बोर्ड भी लटक गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि हाल यह है कि पूरे दिन बैठे रहने के बाद भी बोहनी तो हो नहीं पा रही। किराया तो छोड़िए, लोन की किस्तें तक नहीं दे पा रहे हैं। सरकार की ओर से बड़े पैकेज की घोषणा हुई, मगर व्यापारियों को रत्ती भर फायदा नहीं हुआ। मकान मालिकों से बात हुई लेकिन किराया कम करने को तैयार नहीं हैं। जो समझदार हैं, वह हालात को समझ रहे हैं और किराए में राहत दे रहे हैं।
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ऐसे में व्यापारियों के लिए अपने शोरूम का किराया व अन्य खर्चे निकाल पाना मुश्किल हो गया है। कुछ व्यापारियों ने शोरूम मालिकों से संपर्क कर किराया माफी या राहत देने की बातचीत की। कुछ की बातचीत चल रही है तो कइयों की बात नहीं बन पाई। ऐसी स्थिति में कई व्यापारियों ने शोरूम खाली करने शुरू कर दिए हैं। सेक्टर-17 में पांच, सेक्टर-35 में सात से ज्यादा, सेक्टर-23 में दो और सेक्टर-40 में तीन से ज्यादा शोरूम खाली हो गए हैं।
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इन शोरूमों पर टू लेट के बोर्ड भी लटक गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि हाल यह है कि पूरे दिन बैठे रहने के बाद भी बोहनी तो हो नहीं पा रही। किराया तो छोड़िए, लोन की किस्तें तक नहीं दे पा रहे हैं। सरकार की ओर से बड़े पैकेज की घोषणा हुई, मगर व्यापारियों को रत्ती भर फायदा नहीं हुआ। मकान मालिकों से बात हुई लेकिन किराया कम करने को तैयार नहीं हैं। जो समझदार हैं, वह हालात को समझ रहे हैं और किराए में राहत दे रहे हैं।
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अगस्त में और खाली हो सकते हैं शोरूम
सेक्टर-17 मार्केट के कारोबारी व प्रापर्टी विशेषज्ञ जसपाल सिंह ने बताया कि अगस्त में कई और शोरूम खाली हो सकते हैं क्योंकि किराए माफी पर बात नहीं बन पा रही। मार्केट कब तक चलेगी, इस बारे में भी किसी को स्पष्ट नहीं पता। ऐसे में व्यापारी कर्ज का बोझ सहने के बजाए शोरूम छोड़ने को तैयार हैं।
सबसे ज्यादा वे शोरूम खाली होंगे, जिनमें ब्रांडेड स्टोर खुले हैं। इन शोरूमों का किराया दो लाख से नौ लाख के बीच है। इनमें भी वह खाली होंगे, जो पिछले चार से पांच सालों के बीच खुले होंगे। पुराने शोरूमों के किराए ज्यादा नहीं हैं। जसपाल सिंह ने बताया कि शोरूम खाली होने से मालिकों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दरअसल, इस समय बाजार मंदा पड़ा है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। डिमांड जीरो है। भविष्य की भी कोई उजाले की उम्मीद नहीं दिख रही। यदि कोई शोरूम खाली होता है तो उसी कीमत पर दोबारा से चढ़ना मुश्किल होगा। इस समय कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहेगा। ऐसी स्थिति में शोरूम मालिक को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सबसे ज्यादा वे शोरूम खाली होंगे, जिनमें ब्रांडेड स्टोर खुले हैं। इन शोरूमों का किराया दो लाख से नौ लाख के बीच है। इनमें भी वह खाली होंगे, जो पिछले चार से पांच सालों के बीच खुले होंगे। पुराने शोरूमों के किराए ज्यादा नहीं हैं। जसपाल सिंह ने बताया कि शोरूम खाली होने से मालिकों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दरअसल, इस समय बाजार मंदा पड़ा है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। डिमांड जीरो है। भविष्य की भी कोई उजाले की उम्मीद नहीं दिख रही। यदि कोई शोरूम खाली होता है तो उसी कीमत पर दोबारा से चढ़ना मुश्किल होगा। इस समय कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहेगा। ऐसी स्थिति में शोरूम मालिक को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सिर्फ बातचीत ही विकल्प है, कानून में कोई क्लॉज नहीं
मार्केट से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि बातचीत के अलावा इसके हल होने का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। शोरूम मालिक व किराएदारों को बैठकर बातचीत करनी होगी, तभी इसका कोई रास्ता निकल सकता है। मालिकों को समझना चाहिए कि धंधा इस समय चल नहीं रहा है।
ऐसे में उन्हें किराया आधा कर देना चाहिए। इसी में दोनों की भलाई है। इसका हल में कानून में भी नहीं है। इसी मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले किराएदारों की याचिका खारिज कर दी थी। उसमें उन्होंने किराए माफी व छूट की गुहार लगाई थी।
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि अप्रत्याशित आपदा का क्लॉज इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट 1872 के तहत मान्य है। कोर्ट ने सीधे-सीधे कहा कि मूलभूत सिद्धांत यही है कि यदि कॉन्ट्रैक्ट में किराये से छूट की बात देने वाला कोई क्लॉज है, तभी एक किरायेदार को उसके लिए दावा करने का हक है।
अगर वह किरायेदार वहीं बना रहना चाहता है तो उसे मकान मालिक को उसके मासिक किराये का भुगतान करना ही होगा।
ऐसे में उन्हें किराया आधा कर देना चाहिए। इसी में दोनों की भलाई है। इसका हल में कानून में भी नहीं है। इसी मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ दिन पहले किराएदारों की याचिका खारिज कर दी थी। उसमें उन्होंने किराए माफी व छूट की गुहार लगाई थी।
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि अप्रत्याशित आपदा का क्लॉज इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट 1872 के तहत मान्य है। कोर्ट ने सीधे-सीधे कहा कि मूलभूत सिद्धांत यही है कि यदि कॉन्ट्रैक्ट में किराये से छूट की बात देने वाला कोई क्लॉज है, तभी एक किरायेदार को उसके लिए दावा करने का हक है।
अगर वह किरायेदार वहीं बना रहना चाहता है तो उसे मकान मालिक को उसके मासिक किराये का भुगतान करना ही होगा।
बाजार कब उठेगा, कुछ तय नहीं
बाजार में काम धंधा है नहीं। सेक्टर-17 में ही पांच से अधिक शोरूम खाली हो चुके हैं। आगे भी कुछ ऐसी खबरें आ सकती हैं। बाजार कब तक उठेगा, इस बारे में भी कुछ नहीं पता है। इसलिए लोग चाहते हैं कि कर्ज चढ़ने से अच्छा है कि शोरूम छोड़ दिए जाए। जब कुछ हालात सामान्य होंगे, तब देखा जाएगा।
- जसपाल सिंह, प्रापर्टी डीलर व व्यापारी, सेक्टर-17 मार्केट
कर्ज चढ़ने से अच्छा है कि शोरूम को खाली कर दिया जाए
लॉकडाउन के बाद सबसे ज्यादा दिक्कत किराए की आई है। स्थिति यह है कि जो किराए का शोरूम लेकर बैठे हैं व किराए देने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में व्यापारियों की सोच है कि कर्ज चढ़ने से अच्छा है कि शोरूम को खाली कर दिया जाए। इसलिए कुछ व्यापारियों ने शोरूम खाली कर दिए हैं और उनके आगे टू लेट के बोर्ड टंग गया है।
- राजीव सहदेव, प्रधान मार्केट एकता वेलफेयर एसोसिएशन 35 डी
- जसपाल सिंह, प्रापर्टी डीलर व व्यापारी, सेक्टर-17 मार्केट
कर्ज चढ़ने से अच्छा है कि शोरूम को खाली कर दिया जाए
लॉकडाउन के बाद सबसे ज्यादा दिक्कत किराए की आई है। स्थिति यह है कि जो किराए का शोरूम लेकर बैठे हैं व किराए देने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में व्यापारियों की सोच है कि कर्ज चढ़ने से अच्छा है कि शोरूम को खाली कर दिया जाए। इसलिए कुछ व्यापारियों ने शोरूम खाली कर दिए हैं और उनके आगे टू लेट के बोर्ड टंग गया है।
- राजीव सहदेव, प्रधान मार्केट एकता वेलफेयर एसोसिएशन 35 डी
हालात नहीं सुधरे तो आगे स्थिति और खराब होगी
सेक्टर-22 शास्त्री मार्केट में कुछ दुकानें खाली हो र्गईं थीं। बाद में मालिक से बात हुई तो वे आधे किराए पर मान गए हैं इसलिए शास्त्री मार्केट की कोई दुकान खाली नहीं हुई है। लेकिन आगे स्थिति यही रही तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दुकानदार आधा किराया भी नहीं निकाल पा रहे। बाजार में ग्राहक ही नहीं हैं। ऐसे में कैसे दुकानदारी हो सकती है।
- जसविंदर सिंह, प्रधान, सेक्टर-22 शास्त्री मार्केट
सरकार ने कुछ नहीं किया
सरकार ने व्यापारियों के लिए कुछ नहीं किया। कोरोना काल में भी जीएसटी भरते रहे हैं। इस विपत्ति में सरकार को कुछ रियायत देनी चाहिए थी। कम से कम बिजली बिल, लोन की किस्तों के ब्याज और प्रापर्टी टैक्स में राहत दे सकते थे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सेक्टर-23 में भी दुकानें खाली हुईं हैं।
- परमजीत सिंह, व्यापारी, सेक्टर-23 मार्केट
खर्च नहीं उठा पा रहा था, इसलिए खाली किया
मैंने आठ साल सेक्टर-17 में शोरूम चलाया। सब खर्च मिलाकर तीन से चार लाख का शोरूम पड़ रहा था। मगर कोरोना ने सब कुछ खत्म कर दिया। आमदनी बिल्कुल नहीं हो रही थी। ऐसे में मेरे सामने शोरूम को खाली करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। सरकार या चंडीगढ़ प्रशासन को इस मुद्दे पर कुछ बातचीत करनी चाहिए थी।
- सुशील बंसल, व्यापारी, सेक्टर-17 मार्केट
- जसविंदर सिंह, प्रधान, सेक्टर-22 शास्त्री मार्केट
सरकार ने कुछ नहीं किया
सरकार ने व्यापारियों के लिए कुछ नहीं किया। कोरोना काल में भी जीएसटी भरते रहे हैं। इस विपत्ति में सरकार को कुछ रियायत देनी चाहिए थी। कम से कम बिजली बिल, लोन की किस्तों के ब्याज और प्रापर्टी टैक्स में राहत दे सकते थे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सेक्टर-23 में भी दुकानें खाली हुईं हैं।
- परमजीत सिंह, व्यापारी, सेक्टर-23 मार्केट
खर्च नहीं उठा पा रहा था, इसलिए खाली किया
मैंने आठ साल सेक्टर-17 में शोरूम चलाया। सब खर्च मिलाकर तीन से चार लाख का शोरूम पड़ रहा था। मगर कोरोना ने सब कुछ खत्म कर दिया। आमदनी बिल्कुल नहीं हो रही थी। ऐसे में मेरे सामने शोरूम को खाली करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। सरकार या चंडीगढ़ प्रशासन को इस मुद्दे पर कुछ बातचीत करनी चाहिए थी।
- सुशील बंसल, व्यापारी, सेक्टर-17 मार्केट