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कोरोना और लॉकडाउनः हाईकोर्ट ने मां के अंतिम संस्कार के लिए बेटे को दी 15 दिनों की अंतरिम जमानत
Sat, 28 Mar 2020 12:10 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 28 Mar 2020 12:10 PM IST
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कोरोना के चलते देशभर में लॉकडाउन है, जिसके चलते हाईकोर्ट के जज अब अपने घर पर बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बेहद महत्वपूर्ण केसों की सुनवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को जस्टिस ललित बत्रा ने हत्या की कोशिश के दोषी को मृत मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी है।
जस्टिस ललित बत्रा ने दोषी याचिकाकर्ता की ओर से उसके एडवोकेट द्वारा दाखिल की गई याचिका पर अपने घर बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनते हुए उसे यह राहत दी है। करण कठपालिया के खिलाफ 19 दिसंबर 2018 को आईपीसी की धारा-186,279,307,332,353 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
मामले में गुरुग्राम ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दोषी करार दे पांच वर्ष की सजा सुनाई थी और वह अभी जेल में है। सजा के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की हुई है। 24 मार्च को याचिकाकर्ता की माता की मृत्यु हो गई और शुक्रवार को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग की है तांकि वह अपनी मृत मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सके।
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जस्टिस ललित बत्रा ने अपने घर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार कर उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है और उसे 15 दिनों बाद 11 अप्रैल को सुबह 10 बजे भोंडसी गुरुग्राम जेल में समर्पण कर बाकी की सजा पूरी किए जाने के निर्देश दे दिए हैं।
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जस्टिस ललित बत्रा ने दोषी याचिकाकर्ता की ओर से उसके एडवोकेट द्वारा दाखिल की गई याचिका पर अपने घर बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनते हुए उसे यह राहत दी है। करण कठपालिया के खिलाफ 19 दिसंबर 2018 को आईपीसी की धारा-186,279,307,332,353 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
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मामले में गुरुग्राम ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दोषी करार दे पांच वर्ष की सजा सुनाई थी और वह अभी जेल में है। सजा के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की हुई है। 24 मार्च को याचिकाकर्ता की माता की मृत्यु हो गई और शुक्रवार को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग की है तांकि वह अपनी मृत मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सके।
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जस्टिस ललित बत्रा ने अपने घर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार कर उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है और उसे 15 दिनों बाद 11 अप्रैल को सुबह 10 बजे भोंडसी गुरुग्राम जेल में समर्पण कर बाकी की सजा पूरी किए जाने के निर्देश दे दिए हैं।