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चंडीगढ़ः घोषणा होने के एक महीने बाद भी गेहूं-दाल के लिए इंतजार कर रहे हैं 27 हजार परिवार
Mon, 27 Apr 2020 11:28 AM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 27 Apr 2020 11:28 AM IST
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राशन के लिए लाइन में लगे लोग
- फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन की वजह से घर बैठे गरीबों तक मदद पहुंचाने के लिए 26 मार्च को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) की घोषणा की थी। 3 मई आने वाला है और लॉकडाउन का दूसरा फेज भी खत्म होने को है, लेकिन अभी तक शहर के सभी परिवारों तक राशन नहीं पहुंचा है। शहर में अभी भी करीब 27 हजार परिवार गेहूं और दाल से वंचित हैं। शहर के विभिन्न कालोनियों और झुग्गियों में रहने वाले परिवार मुफ्त में मिलने वाले इस राशन के इंतजार में बैठे हैं।
गरीब परिवारों तक राशन पहुंचने में एक-एक दिन की देरी उनकी मुसीबतों को बढ़ा रहा है। शहर की सबसे बड़ी कालोनी नंबर-4 में अभी तक प्रशासन की तरफ से गेहूं और दाल बांटने का काम नहीं शुरू किया गया है। इसके अलावा मलोया में जहां 2300 परिवार रहते हैं, वहां भी सिर्फ कुछ ही परिवारों को राशन दिया गया है। बड़ा वर्ग अभी भी राशन से वंचित हैं। यही स्थिति हल्लोमाजरा, विकास नगर और सेक्टर-49 के कुछ हिस्सों आदि जगहों की है।
शहर के 63,459 परिवारों को इस योजना के तहत मुफ्त में तीन महीने के लिए प्रति सदस्य 5 किलो गेहूं और प्रति परिवार एक किलो दाल मिलना है। इसके अलावा एक समस्या यह भी है कि अगर किसी परिवार में पांच सदस्य हैं तो उसे योजना के तहत 75 किलो गेहूं और 3 किलो दाल मिलेगा। प्रशासन की तरफ से राशन को घर जाकर नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में बिना किसी गाड़ी के राशन को घर तक पहुंचाना बहुत मुश्किल है। हालांकि शहर के कुछ हिस्सों में पुलिस ने लोगों की मदद की है।
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गरीब परिवारों तक राशन पहुंचने में एक-एक दिन की देरी उनकी मुसीबतों को बढ़ा रहा है। शहर की सबसे बड़ी कालोनी नंबर-4 में अभी तक प्रशासन की तरफ से गेहूं और दाल बांटने का काम नहीं शुरू किया गया है। इसके अलावा मलोया में जहां 2300 परिवार रहते हैं, वहां भी सिर्फ कुछ ही परिवारों को राशन दिया गया है। बड़ा वर्ग अभी भी राशन से वंचित हैं। यही स्थिति हल्लोमाजरा, विकास नगर और सेक्टर-49 के कुछ हिस्सों आदि जगहों की है।
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शहर के 63,459 परिवारों को इस योजना के तहत मुफ्त में तीन महीने के लिए प्रति सदस्य 5 किलो गेहूं और प्रति परिवार एक किलो दाल मिलना है। इसके अलावा एक समस्या यह भी है कि अगर किसी परिवार में पांच सदस्य हैं तो उसे योजना के तहत 75 किलो गेहूं और 3 किलो दाल मिलेगा। प्रशासन की तरफ से राशन को घर जाकर नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में बिना किसी गाड़ी के राशन को घर तक पहुंचाना बहुत मुश्किल है। हालांकि शहर के कुछ हिस्सों में पुलिस ने लोगों की मदद की है।
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वितरण की प्रक्रिया के धीमे होने के कई कारण
वितरण की प्रक्रिया के धीमी होने के कई कारण है। सबसे बड़ा कारण है कि प्रशासन ने पास लोगों की संख्या ज्यादा है और टीमें कम बनाई गई हैं। जानकारी के अनुसार प्रशासन ने सिर्फ 12 टीमें बनाई हैं, जो पूरे शहर में गेहूं और दाल का वितरण कर रही हैं। इसके मुताबिक, अगर एक टीम एक हिस्से में जाती है तो बाकी के कई जगह वंचित रह जाते हैं। इन समस्याओं को लेकर भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष हरिशंकर मिश्रा ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और एडवाइजर मनोज परिदा को पत्र भी लिखा है। उन्होंने वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है।
एक परिवार के लिए क्या एक किलो दाल पर्याप्त?
केंद्र सरकार की योजना के तहत जिन परिवारों के पास राशन कार्ड हैं और उनके खाते में सरकार की तरफ से सब्सिडी मिल रही है, उन्हें प्रत्येक सदस्य 5 किलो गेहूं और प्रत्येक परिवार एक किलो दाल दी जाएगी। प्रशासन लोगों को चने की दाल मुहैया करा रहा है। लोगों और जानकारों का कहना है कि सरकार जिस मात्रा में दाल दे रही है, वो बहुत कम है क्योंकि भारत में एक परिवार में औसतन पांच लोग होते हैं और एक राशन कार्ड पर एक किलो दाल का मतलब है कि प्रति व्यक्ति को एक महीने के लिए सिर्फ 200 ग्राम दाल मिलेगी। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या एक व्यक्ति को एक महीने के लिए 200 ग्राम दाल पर्याप्त है।
एक परिवार के लिए क्या एक किलो दाल पर्याप्त?
केंद्र सरकार की योजना के तहत जिन परिवारों के पास राशन कार्ड हैं और उनके खाते में सरकार की तरफ से सब्सिडी मिल रही है, उन्हें प्रत्येक सदस्य 5 किलो गेहूं और प्रत्येक परिवार एक किलो दाल दी जाएगी। प्रशासन लोगों को चने की दाल मुहैया करा रहा है। लोगों और जानकारों का कहना है कि सरकार जिस मात्रा में दाल दे रही है, वो बहुत कम है क्योंकि भारत में एक परिवार में औसतन पांच लोग होते हैं और एक राशन कार्ड पर एक किलो दाल का मतलब है कि प्रति व्यक्ति को एक महीने के लिए सिर्फ 200 ग्राम दाल मिलेगी। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या एक व्यक्ति को एक महीने के लिए 200 ग्राम दाल पर्याप्त है।
लोगों से बातचीत....
हम कई दिनों से सुन रहे हैं कि सरकार मदद के लिए गेहूं और दाल बांट रही है लेकिन अभी तक हमें राशन नहीं मिला है। हमारे खाते में सब्सिडी आती है और कार्ड भी है। बीते एक महीने से काफी समस्या झेल रहे हैं। राशन जल्द मिल जाता तो कुछ राहत जरूर मिलेगा।
- मालती देवी, स्थानीय निवासी
3 मई भी आने वाला है, कब देंगे राशन
कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के चलते कोई भी राशन के लिए परेशान न हो, इसके लिए सरकार ने नि:शुल्क राशन की व्यवस्था की लेकिन जब वह मिलेगा ही नहीं तो फायदा क्या। दूसरा लॉकडाउन खत्म होने वाला है, 3 मई भी आने वाला है। अब राशन नहीं देंगे तो कब देंगे।
- अखिलेश मौर्य, स्थानीय निवासी
किस घटना का इंतजार कर रहा है प्रशासन
शहर की सबसे बड़ी कॉलोनी नंबर-4 में अधिकतर मजदूर वर्ग रहता है। इन सभी को सबसे अधिक राशन की आवश्यकता है, लेकिन लॉकडाउन को एक महीना से अधिक गुजर जाने के बाद भी अभी तक किसी भी कालोनी वासी को राशन नहीं मिला। प्रशासन न जाने किस घटना का इंतजार कर रहा है। बिना देरी यहां राशन उपलब्ध कराना चाहिए।
- राजिंदर यादव, स्थानीय निवासी
चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से सभी परिवारों तक राशन पहुंचाने का काम चल रहा है। 36,600 परिवारों तक राशन पहुंचा दिया गया है। इस योजना के तहत मिले राशन को पहुंचाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रशासन कोशिश कर रहा है।
- विनोद पी कावले, सेक्रेटरी, फूड एंड सप्लाई विभाग
- मालती देवी, स्थानीय निवासी
3 मई भी आने वाला है, कब देंगे राशन
कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के चलते कोई भी राशन के लिए परेशान न हो, इसके लिए सरकार ने नि:शुल्क राशन की व्यवस्था की लेकिन जब वह मिलेगा ही नहीं तो फायदा क्या। दूसरा लॉकडाउन खत्म होने वाला है, 3 मई भी आने वाला है। अब राशन नहीं देंगे तो कब देंगे।
- अखिलेश मौर्य, स्थानीय निवासी
किस घटना का इंतजार कर रहा है प्रशासन
शहर की सबसे बड़ी कॉलोनी नंबर-4 में अधिकतर मजदूर वर्ग रहता है। इन सभी को सबसे अधिक राशन की आवश्यकता है, लेकिन लॉकडाउन को एक महीना से अधिक गुजर जाने के बाद भी अभी तक किसी भी कालोनी वासी को राशन नहीं मिला। प्रशासन न जाने किस घटना का इंतजार कर रहा है। बिना देरी यहां राशन उपलब्ध कराना चाहिए।
- राजिंदर यादव, स्थानीय निवासी
चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से सभी परिवारों तक राशन पहुंचाने का काम चल रहा है। 36,600 परिवारों तक राशन पहुंचा दिया गया है। इस योजना के तहत मिले राशन को पहुंचाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रशासन कोशिश कर रहा है।
- विनोद पी कावले, सेक्रेटरी, फूड एंड सप्लाई विभाग