चंडीगढ़ः कोरोना से जिंदगी की जंग हारी छह माह की बच्ची, बेटी को सीने से भी न लगा सकी मां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव छह माह की बच्ची आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, गुरुवार दोपहर 12.45 बजे बच्ची ने आखिरी सांस ली। बच्ची का अंतिम संस्कार प्रशासन की देखरेख में सेक्टर-25 के श्मशान घाट में दोपहर 2.30 बजे किया गया गया।
पीजीआई के डॉक्टरों ने बच्ची की मौत का कारण रेफ़्रेक्टरी शॉक, पल्मोनरी आर्टरी हाइपरटेंशन और कोरोना को बताया है। बुधवार को आईसीयू में भर्ती होने के बाद बच्ची को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। वेंटिलेटर पर होने के बावजूद उसकी स्थिति बिगड़ती जा रही थी।
इस बीच राहत की बात यह है कि बच्ची के संपर्क में आने के बाद होम क्वारंटीन किए गए पीजीआई के 18 डॉक्टरों समेत सभी 54 स्टाफ और बच्ची के परिजनों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। हालांकि यह जांच का विषय है कि बच्ची जब पीजीआई में भर्ती हुई थी तब वह कोरोना पॉजिटिव थी या पीजीआई में इलाज के दौरान कोरोना की चपेट में आई।
एमओएच डॉ. एपी सिंह ने बताया कि बच्ची के दाह संस्कार में कमिश्नर के निर्देशानुसार सभी नियमों का पालन किया गया है। सभी मौजूद लोगों को पीपीई किट पहनाई गई। कोई चूक न हो इसलिए पूरे दाह संस्कार की वीडियोग्राफी कराई गई। दाह संस्कार से पूर्व और बाद में श्मशान घाट को पूरी तरह से सैनेटाइज किया गया।
साथ ही जिस एंबुलेंस में शव को ले जाया गया था, उसे व साथ गई गाड़ी को भी सैनिटाइज किया गया। बच्ची के माता-पिता और अन्य परिजनों को भी सैनिटाइज किया गया। पीपीई किट पहनाकर उन्हें एक किनारे खड़ा रहने को कहा गया। पूरी प्रक्रिया के बारे में एडवाइजर मनोज परिदा को भी जानकारी दी गई। एमओएच का कहना है कि दाह संस्कार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, इसलिए वीडियोग्राफी करवाई जाती है।
कलेजे के टुकड़े को अंतिम बार छाती से भी न लगा सकी मां
सेक्टर-25 के श्मशान घाट में गुरुवार दोपहर अंतिम संस्कार के दौरान बच्ची को एक बंद पैकेट में लाया गया। मौके पर मौजूद बच्ची की मां का रो-रोकर बुरा हाल था। बच्ची की मां अपने कलेजे के टुकड़े को आखिरी बार छाती से लगाकर जीभर रोना चाहती थी लेकिन वह आखिरी बार उसे देख भी न सकी। वहीं, जिस पिता ने अपनी गोद में बच्ची को खिलाया वह अपनी बेटी को छू तक न सका। इस गम की घड़ी में नाना-नानी भी अपनी नातिन को न देख सके। सभी का रो-रो कर बुरा हाल था।
बड़ा सवाल: बच्ची पीजीआई आने से पहले संक्रमित हुई या पीजीआई में
इस समय यह बड़ा सवाल है कि बच्ची पीजीआई आने से पहले कि संक्रमित थी या पीजीआई में कोरोना की चपेट में आई। चौंकाने वाली बात यह है कि कोरोना को लेकर पीजीआई में एक के बाद एक पॉजिटिव केस सामने आने के बावजूद पीजीआई प्रशासन इसकी प्रारंभिक स्क्रीनिंग की व्यवस्था नहीं कर रहा है।
इस चूक के कारण ही छह माह की बच्ची के साथ पीजीआई के 54 लोगों पर कोरोना का खतरा मंडराने लगा था। अब भी पीजीआई के जिन डिपार्टमेंट में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं चल रही हैं, वहां आने वाले मरीजों की कोई जांच नहीं हो रही है। इसके कारण यह मरीज सीधे पीजीआई के डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में पीजीआई प्रशासन अगर जल्द सतर्क नहीं हुआ तो मामला गंभीर हो सकता है।
जालंधर से रेफर होकर पीजीआई आई थी बच्ची
फगवाड़ा (पंजाब) निवासी बच्ची के दिल में छेद था। परिजन उसे बीते 9 अप्रैल को पीजीआई लेकर पहुंचे, जिसके बाद बच्ची की ओपन हार्ट सर्जरी हुई। हालांकि इससे पहले उसे जालंधर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्ची को वहीं से पीजीआई रेफर किया गया था। जांच के बाद बच्ची को 9 अप्रैल को पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में भर्ती किया गया था।
सर्जरी के बाद बच्ची बिल्कुल स्वस्थ थी लेकिन अचानक बच्ची को इंफेक्शन होने लगा। शक होने पर डॉक्टरों ने बीते मंगलवार दोपहर बच्ची का कोरोना टेस्ट कराया। जांच रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाई गई। बुधवार सुबह रिपोर्ट आने के बाद पीजीआई में हड़कंप मच गया।
बच्ची को तत्काल एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर पीजीआई के कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। आनन-फानन में बच्ची के संपर्क में आने वाले 18 डॉक्टरों समेत पीजीआई के 54 स्टाफ को होम क्वारंटीन कर दिया गया। इसके बाद सभी नमूने लिए गए। वहीं पीडियाट्रिक सेंटर के वार्ड नंबर 4 सी में भी दहशत फैल गई।
बच्ची को डॉ. अरुण कुमार भारनवाल ने देखा था इसलिए उनकी पूरी टीम, उस वार्ड में काम करने वाले स्वीपर, वार्ड ब्वॉय और अन्य कर्मचारियों को भी होम क्वारंटीन कर सभी के नमूने लिए गए। साथ ही परिवार के सदस्यों के भी नमूने लिए गए। गुरुवार सुबह ही सभी लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आने से पीजीआई प्रबंधन ने राहत की सांस ली, लेकिन दोपहर होते-होते बच्ची की मौत हो गई।