निजी स्कूलों के आगे झुका प्रशासन, आदेश वापस लेकर अभिभावकों को 31 मई तक फीस जमा कराने को कहा
- पेरेंट्स एसोसिएशन बोला- स्कूलों से बैलेंस शीट और अब तक जमा हुई फीस की डिटेल मांगे प्रशासन
- नए आदेश के अनुसार अब हर महीने की 15 तारीख को जमा करवानी होगी फीस
विस्तार
शिक्षा विभाग ने मंगलवार को अपने पुराने आदेशों को वापस लेते माता-पिता को अप्रैल-मई माह की फीस 31 मई से पहले जमा करवाने के आदेश दिए हैं। चंडीगढ़ में 23 मार्च को कोविड-19 के कारण कर्फ्यू लगाया गया और 30 मार्च को प्रशासन ने आदेश दिए कि स्कूलों के दोबारा खुलने के एक महीने के बाद परिजनों को स्कूल फीस जमा करवाना होगा।
इसके बाद इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन की फीस जमा करवाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका के बाद प्रशासन ने अपना फैसला वापस लेकर स्कूलों के हित में फैसला दिया है। शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता ने पत्र जारी कर आदेश दिए कि सभी परिजनों को 31 मई तक अप्रैल-मई महीने की फीस जमा करवाना होगा।
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साथ ही जून से हर महीने की 15 तारीख को परिजनों को अपने बच्चों की फीस जमा करवाना होगा। आदेशों के अनुसार 31 मई तक फीस जमा करवाने पर किसी भी प्रकार की लेट फीस नहीं लगाई जाएगी। पत्र में यह भी लिखा है कि अगर कोई अभिभावक आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण फीस नहीं भर पा रहा तो छात्र को स्कूल से नहीं निकाला जाएगा।
वहीं स्कूल प्रशासन को सभी टीचरों की सैलरी पूरी देनी होगी। निजी स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस लेने कि अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोई भी निजी स्कूल लाइब्रेरी, बस, स्पोर्ट्स समेत किसी भी प्रकार की फीस नहीं वसूल सकते हैं।
स्कूलों की बैलेंस शीट अपलोड करने के मामले को इस फीस वाले केस के साथ नहीं जोड़ा जाए। पंजाब और हरियाणा ने भी अपने पुराने आदेशों में बदलाव कर स्कूल फीस जमा करवाने को कहा है। - अरुण कुमार गुप्ता, प्रिंसिपल सेक्रेटरी एजुकेशन
क्या कहते हैं अभिभावक
अभी तक लोग पूरी तरह से अपने काम पर भी नहीं लौटे हैं। प्रशासन ने पहले खुद परिजनों को थोड़ी राहत दी थी। लेकिन प्रशासन प्राइवेट स्कूलों के आगे झुक गया है। यह मिडिल क्लास पर इस कठिन समय में बोझ डालने वाला फैसला है। प्रशासन को परिजनों के बारे में भी सोचना चाहिए। -प्रवीण
मैं अपनी बेटी का तीन माह ही फीस जमा करा चुका हूं। हालांकि उनका काम अभी तक बंद है। प्रशासन ने शिक्षा के अधिकार का मजाक बनाया हुआ हैं। वह हमेशा स्कूलों की तरफ से की जाती मनमानी पर कार्रवाई करने की बजाय परिजनों पर ही बोझ डालते हैं। -इमाम जफ्फर
प्रशासन को पहले स्कूलों की बैलेंस शीट चेक करना चाहिए था
चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने कहा कि प्रशासन को पहले स्कूलों की बैलेंस शीट चेक करना चाहिए था। कई आदेशों के बाद भी सभी स्कूलों ने अपना खर्चा नहीं दिखाया है। वहीं अप्रैल तक परिजनों की ओर से जमा फीस का की डिटेल भी देखनी चाहिए थी कि वाकई में स्कूल के पास स्टाफ को सैलरी देने का बजट है या नहीं। लगभग 60 प्रतिशत परिजन बच्चों की तीन महीने एडवांस फीस जमा करवा चुके हैं।