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जहरीले वातावरण में काम करने को मजबूर हैं पीजीआई चंडीगढ़ के कर्मी, यूनियन कर चुकी प्रदर्शन
Thu, 19 Mar 2020 10:50 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 19 Mar 2020 10:50 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
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एक ओर पूरा चंडीगढ़ कोरोना से बचाव के लिए हर संभव एहतियात बरत रहा है। वहीं, दूसरी ओर पीजीआई चंडीगढ़ में कार्यरत कर्मचारी बायो-मेडिकल वेस्ट के जहरीले प्रदूषण के बीच नौकरी करने को मजबूर हैं। पीजीआई परिसर में बनाए गए डंपिंग ग्राउंड के सामने स्थित लांड्री में कार्यरत 110 कर्मचारियों की सेहत खतरे में है। इसे लेकर उन कर्मचारियों ने पीजीआई प्रशासन से कई बार खुद की रक्षा के लिए गुहार लगाई है।
स्थिति यह है पीजीआई में तैनात कोई भी कर्मचारी लांड्री और डंपिंग ग्राउंड में ड्यूटी नहीं करना चाहता, लेकिन नौकरी जाने के डर से उन्हें जान जोखिम में डालकर बायो मेडिकल वेस्ट के बीच नौकरी करनी पड़ रही है। इस मामले पर पीजीआई इंप्लाई यूनियन के अध्यक्ष अश्विनी कुमार मुंजाल का कहना है कि कोरोना का खतरा तो अभी मंडरा रहा है, लेकिन पीजीआई में काम करने वाले 12 महीने बायो मेडिकल के जहरीले वातावरण में ड्यूटी कर रहे हैं।
इस ओर पीजीआई के डायरेक्ट गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे जिसका नतीजा यहां आने वाले लाखों मरीजों और यहां तैनात हजारों कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। इसे लेकर चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग भी अनदेखी का रवैये अपनाए हुए हैं, जिसका फायदा पीजीआई जैसे संस्थान उठा रहे हैं।
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बिना योजना के लगाया इंसीनरेटर हुआ बंद
बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए सालों पहले पीजीआई परिसर में इंसीनरेटर लगाया गया था जिससे बायो मेडिकल का निस्तारण परिसर में ही किया जा रहा था जो मानकों के विपरीत था। जिसे कोर्ट के आदेश पर दो साल पहले बंद कर दिया गया है। दो करोड़ की लागत से तैयार ये इंसीनरेटर शोपीस बनकर रह गया है।
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स्थिति यह है पीजीआई में तैनात कोई भी कर्मचारी लांड्री और डंपिंग ग्राउंड में ड्यूटी नहीं करना चाहता, लेकिन नौकरी जाने के डर से उन्हें जान जोखिम में डालकर बायो मेडिकल वेस्ट के बीच नौकरी करनी पड़ रही है। इस मामले पर पीजीआई इंप्लाई यूनियन के अध्यक्ष अश्विनी कुमार मुंजाल का कहना है कि कोरोना का खतरा तो अभी मंडरा रहा है, लेकिन पीजीआई में काम करने वाले 12 महीने बायो मेडिकल के जहरीले वातावरण में ड्यूटी कर रहे हैं।
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इस ओर पीजीआई के डायरेक्ट गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे जिसका नतीजा यहां आने वाले लाखों मरीजों और यहां तैनात हजारों कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। इसे लेकर चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग भी अनदेखी का रवैये अपनाए हुए हैं, जिसका फायदा पीजीआई जैसे संस्थान उठा रहे हैं।
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बिना योजना के लगाया इंसीनरेटर हुआ बंद
बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए सालों पहले पीजीआई परिसर में इंसीनरेटर लगाया गया था जिससे बायो मेडिकल का निस्तारण परिसर में ही किया जा रहा था जो मानकों के विपरीत था। जिसे कोर्ट के आदेश पर दो साल पहले बंद कर दिया गया है। दो करोड़ की लागत से तैयार ये इंसीनरेटर शोपीस बनकर रह गया है।