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कोरोना ने चंडीगढ़ की माताओं को बता दी मां के दूध की अहमियत

Sun, 19 Dec 2021 02:06 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 02:06 AM IST
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Corona told the mothers of Chandigarh the importance of mother's milk
चंडीगढ़। कोरोना के रूप में आई महामारी ने स्वास्थ्य के प्रति लोगों का नजरिया बदल दिया है। अब लोग अपनों की सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहे हैं। माताओं में भी नवजात की सुरक्षा को लेकर बदलाव आया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, जन्म के पहले एक घंटे के दौरान मां का दूध पीने वाले नवजातों की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा इजाफा दर्ज किया गया है। इससे पता चलता है कि चंडीगढ़ की माताएं अपने फिगर की चिंता किए बगैर बच्चों को अपना दूध पिला रही हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए अमृत माने जाने वाले मां के दूध को लेकर पुरानी प्रवृति में बदलाव होना सुखद संकेत है। क्योंकि मां के दूध में वे सारे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद हैं, जो बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास के साथ ही बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए जरूरी हैं। डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात को स्तनपान करवाना बेहद जरूरी है। डब्ल्यूएचओ के पूर्व परामर्शदाता डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि नवजात के जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला मां का पहला दूध कोलोस्ट्रम कहलाता है। बीटा-कैरोटीन की उच्च मात्रा के कारण इसका रंग पीला या संतरी होता है। इस दूध से बच्चे को प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। ये बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने वाली कोशिकाओं का निर्माण करता है, साथ ही बच्चे के शरीर से बिलरुबिन को निकालकर पीलिया होने से रोकता है।
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शारीरिक ताकत के साथ आईक्यू भी बढ़ाता है
भारतीय बाल अकादमी की चंडीगढ़ शाखा की डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि मां का दूध बच्चे को यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट इन्फेक्शन बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण और डायरिया जैसी समस्याओं से बचाता है। इसके साथ ही मां का दूध कोलेस्ट्रॉल, टॉरिन और डीएचए का बेहतर सोर्स है। ये तीनों पोषक तत्व मानसिक विकास के लिए बेहतर माने जाते हैं। ये माना जाता है कि मां के दूध से बच्चे का आईक्यू भी विकसित होता है।
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इन स्थितियों में नहीं कराएं स्तनपान
अगर मां एचआईवी पॉजिटिव, टीबी या कैंसर की मरीज है, कीमोथैरेपी ले रही है तो उसे स्तनपान नहीं कराना चाहिए।
बच्चे को गैलेक्टोसीमिया नाम की बीमारी है, तो भी उसे स्तनपान न कराएं। क्योंकि इस बीमारी के चलते बच्चा दूध में मौजूद शुगर को पचा नहीं पाता।
बच्चों को मिला संपूर्ण आहार भी
नेशनल फैमिली हेल्थ की इस वर्ष के सर्वे में चंडीगढ़ में मां का दूध पीने के साथ ही 6 माह से 23 माह के दौरान संपूर्ण आहार लेने वाले बच्चों की भी संख्या सामने आई है। यह पिछले सर्वे में नहीं थी। इस बार यह संख्या 22.9 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

जन्म के एक घंटे के बाद इतनों को मिला मां का दूध
2019-21 2015-16
63.7 प्रतिशत 33.5 प्रतिशत
शोध से भी यह बात साबित हो चुकी है कि मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है। यह शिशु के लिए तो संपूर्ण आहार है ही साथ ही दूध पिलाने वाली माता की सेहत के लिए भी वरदान के समान है।
-मनीषा अरोड़ा, आहार विशेषज्ञ जीएमएसएच 16
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