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कोरोना से जंग में खुद को अपनों के बीच बेगाना बना दिया

Wed, 01 Jul 2020 09:03 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 09:03 PM IST
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Corona made herself warless among the loved ones at war
चंडीगढ़। जीएमएसएच- 16 मेडिकल ऑफिसर डॉ. दविन्दर 14 मार्च से लगातार अस्पताल के कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं। उनके जिम्मे अस्पताल में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में भर्ती होने वाले कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के इलाज, देखभाल और उनसे जुड़ी व्यवस्था का जिम्मा है।
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डॉ. दविंदर अपनी जिम्मेदारी को लेकर बेहद सजग हैं। डॉ. दविंदर पिछले 3 महीनों से परिवार के बीच रहकर भी बेगानों की जिंदगी जी रहे हैं। कारण उनका मानना है कि उनकी वजह से उनके परिवार में अगर किसी को संक्रमण हो गया तो कोरोना महामारी से जारी इस जंग में खुद को हारा हुआ मान लेंगे। इसलिए उन्होंने अपने परिवार के बीच रहते हुए एक अलग कमरा बना लिया है। जहां वह हॉस्पिटल से ड्यूटी करने के बाद घर लौटने पर रहते हैं। इस दौरान वह अपने पत्नी और दोनों बच्चों के संपर्क में नहीं आते । कोरोना के इस योद्धा का मानना है कि देश हित और फर्ज के लिए परिवार से की गई कुछ दिन की दूरी उन्हें थोड़ा दुख तो जरूर देती है, लेकिन मरीजों के ठीक होने का क्रम और कोरोना पर मिलती विजय उनके इस दुख को दूर कर देती है।
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पत्नी और बच्चों का मिल रहा सहयोग
डॉ. दविंदर का पूरा परिवार उनके फर्ज की इस राह में हर पल सहयोग कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी अवनिंदर कौर के साथ ही बेटी तान्या व बेटा तेजस उन्हें हर पल आगे बढ़कर मजबूती से डटे रहने कि सीख देते हैं। डॉ दविंदर अपने परिवार से मिलने वाले सहयोग और प्यार के बल पर ही इस जंग में बिना थके लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। उनके लिए उनके दोनों बच्चों और पत्नी के साथ ही उनके हॉस्पिटल के सीनियर और सहयोगियों का साथ और प्यार बेहद महत्वपूर्ण है।
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मेडिटेशन से मिलती है ताकत
डॉ. दविंदर ने बताया कि कोरोना के मरीजों के बीच लगातार ड्यूटी करने के दौरान उन्होंने अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए खानपान पर विशेष ध्यान दिया है। इसके साथ ही वह तनाव प्रबंधन और मानसिक मजबूती के लिए मेडिटेशन करते हैं। मेडिटेशन से उन्हें बहुत ताकत मिलती है। वह खुद के साथ कोरोना के पॉजिटिव मरीजों को मेडिटेशन करने की सलाह देते हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी के कारण मरीजों का मानसिक तनाव काफी बढ़ा होता है। ऐसे में उनके तनाव प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, क्योंकि तनाव के कारण बीमारी ज्यादा बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में उन्हें इलाज के साथ मानसिक संतुष्टि देना भी जरूरी होता है।
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