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कबड्डी पर कोरोना की मार, खेतों में काम करने को मजबूर कोच, 20 साल तक कबड्डी के खिलाड़ी रहे कर्मजीत
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चंडीगढ़। कोरोना के कहर से खेल भी प्रभावित है। स्वीमिंग पूल बंद हैं और कबड्डी के खेल पर बुरी मार पड़ी है। हालत यह हो चुकी है कि सर्किल कबड्डी अकादमी चलाने वाले कोच और रेफरी को परिवार का खर्चा उठाने के लिए खेतों में काम करना पड़ रहा है।
जी हां! हम बात कर रहे हैं कर्मजीत सिंह की। 20 साल तक कबड्डी के खिलाड़ी रहे कर्मजीत खरड़ के पास अपने गांव बजहेडी में कबड्डी की अकादमी चलाते थे। साथ ही सर्किल कबड्डी के चंडीगढ़, मोहाली, पंजाब में होने वाले टूर्नामेंट में रेफरी का काम किया करते थे। लेकिन कोरोना महामारी से उनका रोजगार छिन गया। हालत यह है कि उन्हें परिवार का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो गया है।
हर मैच में 1500 रुपये कमा लेते थे कर्मजीत
कर्मजीत सिंह ने बताया कि वह बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग देते थे। घर का खर्चा चलाने के लिए सर्किल कबड्डी के मुकाबलों में रेफरी का काम करते थे। महीने में 15-20 मैच होते थे। हर मैच से 1500 रुपये की आमदनी होती थी। लेकिन कोरोना के कारण मैच बंद होने से उनका रोजगार छिन गया।
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शादी नहीं हुई, मां और बड़े भाई के बच्चों के पालन-पोषण की उठा रहे जिम्मेदारी
कर्मजीत सिंह ने बताया कि उनकी शादी नहीं हुई है। पिता और बड़े भाई का देहांत हो चुका है। उनके बच्चों और मां का पालन-पोषण रेफरी के तौर पर कमाए गए पैसों से होता था। टूर्नामेंट बंद होने के बाद गांव में खेत पर काम करने के लिए मजबूर हैं।
स्वीमिंग पूल में लटके पड़े हैं ताले
कोरोना के चलते प्रशासन ने स्वीमिंग पूलों को खोलने की इजाजत नहीं दी है। इन पर ताले लटके हैं। इस वजह से तैराकी के खिलाड़ियों और सीखने वालों में मायूसी छाई है। ट्राइसिटी में कई स्वीमिंग पूल हैं, जो ओपन और स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बने हुए हैं, लेकिन यहां पर वीरानी छाई हुई है।
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जी हां! हम बात कर रहे हैं कर्मजीत सिंह की। 20 साल तक कबड्डी के खिलाड़ी रहे कर्मजीत खरड़ के पास अपने गांव बजहेडी में कबड्डी की अकादमी चलाते थे। साथ ही सर्किल कबड्डी के चंडीगढ़, मोहाली, पंजाब में होने वाले टूर्नामेंट में रेफरी का काम किया करते थे। लेकिन कोरोना महामारी से उनका रोजगार छिन गया। हालत यह है कि उन्हें परिवार का खर्चा चलाना भी मुश्किल हो गया है।
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हर मैच में 1500 रुपये कमा लेते थे कर्मजीत
कर्मजीत सिंह ने बताया कि वह बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग देते थे। घर का खर्चा चलाने के लिए सर्किल कबड्डी के मुकाबलों में रेफरी का काम करते थे। महीने में 15-20 मैच होते थे। हर मैच से 1500 रुपये की आमदनी होती थी। लेकिन कोरोना के कारण मैच बंद होने से उनका रोजगार छिन गया।
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शादी नहीं हुई, मां और बड़े भाई के बच्चों के पालन-पोषण की उठा रहे जिम्मेदारी
कर्मजीत सिंह ने बताया कि उनकी शादी नहीं हुई है। पिता और बड़े भाई का देहांत हो चुका है। उनके बच्चों और मां का पालन-पोषण रेफरी के तौर पर कमाए गए पैसों से होता था। टूर्नामेंट बंद होने के बाद गांव में खेत पर काम करने के लिए मजबूर हैं।
स्वीमिंग पूल में लटके पड़े हैं ताले
कोरोना के चलते प्रशासन ने स्वीमिंग पूलों को खोलने की इजाजत नहीं दी है। इन पर ताले लटके हैं। इस वजह से तैराकी के खिलाड़ियों और सीखने वालों में मायूसी छाई है। ट्राइसिटी में कई स्वीमिंग पूल हैं, जो ओपन और स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में बने हुए हैं, लेकिन यहां पर वीरानी छाई हुई है।