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Hindi News ›   Chandigarh ›   Corona Infection prevention standards are being openly ignored in Chandigarh GMSH-16 premises

अमर उजाला पड़ताल: जीएमएसएच-16 के कोविड वार्ड में बिना पीपीई किट के ड्यूटी कर रहा स्टाफ, किसी के आने पर मनाही भी नहीं

Tue, 19 Jul 2022 02:54 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 19 Jul 2022 02:54 PM IST
सार

अस्पताल की इमरजेंसी में बनाए गए कोविड वार्ड में पांच मरीज भर्ती हैं। इस वार्ड में आने-जाने वालों पर कोई रोक नहीं है। ड्यूटी करने वाला स्टाफ सिर्फ सर्जिकल मास्क लगाकर वहां ड्यूटी कर रहा है।

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Corona Infection prevention standards are being openly ignored in Chandigarh GMSH-16 premises
सेक्टर 16 अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 में चार कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो गए हैं, बावजूद इसके अस्पताल परिसर में संक्रमण से बचाव के मानकों की अनदेखी खुलेआम की जा रही है। कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों के पास ड्यूटी कर रहे डॉक्टर और अन्य कर्मचारी बचाव के मानकों का पालन करने में लापरवाही बरत रहे हैं। ड्यूटी के दौरान न तो वे एन 95 मास्क पहन रहे हैं न हीं पीपीई किट जबकि बचाव के लिए इन दो चीजों को कारगर और अनिवार्य बताया गया है। 

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चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल की इमरजेंसी में बनाए गए कोविड वार्ड में पांच मरीज भर्ती हैं। इस वार्ड में आने-जाने वालों पर कोई रोक नहीं है। ड्यूटी करने वाला स्टाफ सिर्फ सर्जिकल मास्क लगाकर वहां ड्यूटी कर रहा है। इससे अस्पताल में काम करने वाले अन्य कर्मचारी डरे हुए हैं। उनका कहना है कि चंद लोगों की लापरवाही के कारण अन्य लोगों पर संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। 
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गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने पर प्रशासन ने पाबंदियों पर राहत दे दी है। बाजार, स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों में दी गई पाबंदियों को अस्पतालों में भी लागू मान लिया गया है। परिणामत: संक्रमित मरीज के पास जाने में भी बचाव के मानकों की अनदेखी की जा रही है। 

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पीपीई किट न पहनने का कहीं ये कारण तो नहीं 

पीपीई किट पहनने के बाद लगातार आठ घंटे तक व्यक्ति खाने या पीने की चीजों से दूर रहता है। शौचालय भी नहीं जा पाता है। मोबाइल समेत अन्य रोजाना के उपकरणों का भी प्रयोग नहीं कर पाता है। जब ड्यूटी पूरी होती है, तब वह सैनिटाइजेशन रूम में जाकर पीपीई किट को उतारकर कचरे के डब्बे में फेंकता है और फिर सामान्य दिनचर्या कर पाता है। 

इसलिए जरूरी है मानकों का पालन 

पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट प्रोटेक्टिव गियर्स हैं जिन्हें कोरोना वायरस पीड़ितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों और नर्स को सुरक्षित रखने के लिए डिजाइन किया गया है। इन गियर्स को पहनने से डॉक्टर्स वायरस के संपर्क में आने से खुद को अधिक से अधिक बचा पाते हैं। पीपीई किट में चश्मे, फेस शील्ड, मास्क, ग्लव्स, गाउन, हेड कवर और शू कवर शामिल होते हैं जिससे सिर से पैर तक का प्रत्येक हिस्सा सुरक्षित हो जाता है। 
 

कोविड वार्ड में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर और सभी अन्य कर्मचारी अब भी बचाव के सभी मानकों का शत प्रतिशत पालन करते हुए वहां ड्यूटी कर रहे हैं। - डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य 


लगभग ढाई साल से यह लगातार देखने में आ रहा है कि कभी कोविड केस बढ़ने लगते हैं तो कभी कम हो जाते हैं। यह मानना कि संक्रमण का खतरा टल गया है, पूरी तरह से गलत है। मेरा मानना है कि कोरोना योद्धा कहे जाने वाले डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को एन-95 मास्क, पीपीई किट और बचाव के अन्य मानकों के पालन में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए। एक छोटी सी लापरवाही से उनका और उनके परिवार का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।  - डॉ. विवेक मल्होत्रा, सचिव आईएमए 

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