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कोरोना का असर.. पीयू फिलहाल नहीं करेगी अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी फिलहाल अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां नहीं करेगी, क्योंकि कोरोना के बढ़ते केसों के चलते कैंपस अभी नहीं खुलेगा। सभी विभागों की ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में स्थायी शिक्षक ही छात्रों को पढ़ा रहे हैं। अब इंतजार है कि कैंपस खुले तो इनकी सेवाएं ली जाएं।
कोरोना से पहले पीयू के पास लगभग 700 स्थायी शिक्षक थे। इनके अलावा 140 के आसपास अतिथि संकाय का सहारा लिया जा रहा था। अनुबंध शिक्षकों की संख्या भी लगभग 50 के आसपास थी। ये शिक्षक पीयू के लगभग 15 हजार विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। कोरोना जैसे ही आया तो अतिथि संकाय व अनुबंध के शिक्षकों से काम लेना बंद कर दिया गया। इसके कुछ माह बाद पीयू ने 21 अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां निकाल दीं। इसके बाद इन भर्तियों का विरोध तेज हो गया और इन पर रोक लगा दी गई। उम्मीद थी कि जनवरी में कैंपस खुलेगा तो अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां होंगी, लेकिन अब कैंपस खुलने की उम्मीद कम हो गई। इसी के साथ इन अस्थायी शिक्षकों की भर्तियों पर भी ब्रेक लग गया।
यूजीसी तक पहुंची थीं शिकायतें
अस्थायी शिक्षकों की भर्ती जब निकाली गई तो इसकी शिकायत यूजीसी तक पहुंची। कहा गया था कि यह बैकडोर इंट्री का रास्ता है। बाद में इन लोगों को स्थायी कर दिया जाएगा। हालांकि पीयू ने एक साल के लिए रिक्तियां निकाली थी, जिनको विरोध के बाद रोक दिया गया।
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अतिथि संकाय का सहारा ले पीयू
पीयू के कुछ शिक्षकों ने कहा है कि अस्थायी भर्तियां करने के बदले पीयू अतिथि संकाय के शिक्षकों की सहायता ले सकती है। उनका कहना है कि जिन लोगों को नौकरी से हटाया गया है, उनके सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा है। ऐसे में पीयू उन्हें दोबारा काम पर बुलाए। उनका कहना है कि वे ऑनलाइन शिक्षा भी बेहतर देंगे। पीयू यह इंतजार न करे कि कैंपस खुलने पर ही उनको बुलाएंगे। कैंपस खुलने की संभावनाएं फिलहाल नजर नहीं आ रही हैं।
इनसेट
26 स्थायी भर्तियां करने पर निर्णय नहीं हो पाया
पीयू की ओर से एक साल पहले 26 शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसके लिए एक हजार से अधिक आवेदन आए भी थे, लेकिन इन पर सिंडिकेट ने अड़ंगा लगा दिया, जो अब तक चला आ रहा है। फरवरी-मार्च में इन भर्तियों पर कार्रवाई शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं की गई। इन भर्तियों पर पीयू को निर्णय लेना चाहिए। साथ ही शिक्षकों के अन्य खाली पदों को भी भरा जाए। हालांकि, पीयू खाली पदों की संख्या का पता लगा रही है।
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कोरोना से पहले पीयू के पास लगभग 700 स्थायी शिक्षक थे। इनके अलावा 140 के आसपास अतिथि संकाय का सहारा लिया जा रहा था। अनुबंध शिक्षकों की संख्या भी लगभग 50 के आसपास थी। ये शिक्षक पीयू के लगभग 15 हजार विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। कोरोना जैसे ही आया तो अतिथि संकाय व अनुबंध के शिक्षकों से काम लेना बंद कर दिया गया। इसके कुछ माह बाद पीयू ने 21 अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां निकाल दीं। इसके बाद इन भर्तियों का विरोध तेज हो गया और इन पर रोक लगा दी गई। उम्मीद थी कि जनवरी में कैंपस खुलेगा तो अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां होंगी, लेकिन अब कैंपस खुलने की उम्मीद कम हो गई। इसी के साथ इन अस्थायी शिक्षकों की भर्तियों पर भी ब्रेक लग गया।
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यूजीसी तक पहुंची थीं शिकायतें
अस्थायी शिक्षकों की भर्ती जब निकाली गई तो इसकी शिकायत यूजीसी तक पहुंची। कहा गया था कि यह बैकडोर इंट्री का रास्ता है। बाद में इन लोगों को स्थायी कर दिया जाएगा। हालांकि पीयू ने एक साल के लिए रिक्तियां निकाली थी, जिनको विरोध के बाद रोक दिया गया।
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अतिथि संकाय का सहारा ले पीयू
पीयू के कुछ शिक्षकों ने कहा है कि अस्थायी भर्तियां करने के बदले पीयू अतिथि संकाय के शिक्षकों की सहायता ले सकती है। उनका कहना है कि जिन लोगों को नौकरी से हटाया गया है, उनके सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा है। ऐसे में पीयू उन्हें दोबारा काम पर बुलाए। उनका कहना है कि वे ऑनलाइन शिक्षा भी बेहतर देंगे। पीयू यह इंतजार न करे कि कैंपस खुलने पर ही उनको बुलाएंगे। कैंपस खुलने की संभावनाएं फिलहाल नजर नहीं आ रही हैं।
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26 स्थायी भर्तियां करने पर निर्णय नहीं हो पाया
पीयू की ओर से एक साल पहले 26 शिक्षकों की भर्तियां करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसके लिए एक हजार से अधिक आवेदन आए भी थे, लेकिन इन पर सिंडिकेट ने अड़ंगा लगा दिया, जो अब तक चला आ रहा है। फरवरी-मार्च में इन भर्तियों पर कार्रवाई शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन अभी तक नहीं की गई। इन भर्तियों पर पीयू को निर्णय लेना चाहिए। साथ ही शिक्षकों के अन्य खाली पदों को भी भरा जाए। हालांकि, पीयू खाली पदों की संख्या का पता लगा रही है।