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भाजपा विधायक के भाई, मां, पिता की सजा बरकरार

Tue, 23 Dec 2014 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा) Updated Tue, 23 Dec 2014 11:32 AM IST
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conviction intact of BJP MLA's brother, mother and father

दहेज प्रताड़ना के मामले में अंबाला शहर की अदालत ने फरीदाबाद के बड़खल विधानसभा क्षेत्र की भाजपा विधायक सीमा त्रिखा के भाई मनोज, मां निर्मल मल्होत्रा, पिता कैलाश मल्होत्रा की अपील याचिका खारिज करते हुए उनकी सजा को बरकरार रखा है।

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तीनों दोषियों को अदालत ने जेल भेज दिया है। जबकि इस मामले विधायक व उसके पति पहले ही केस में जांच के दौरान बाहर हो चुके हैं। पुलिस के मुताबिक इस मामले में विधायक व उनके पति का कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन विधायक के भाई, मां और पिता को इस मामले में दोषी पाया गया है।
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इंसाफ के लिए 13 साल इंतजार
शहजादपुर की रहने वाली सोनिया की शादी फरीदाबाद के भाजपा की विधायक के भाई मनोज मल्होत्रा के साथ नवंबर 1999 में हुई थी। पीड़ित की वकील रितु सिंह मान ने बताया कि शादी में महिला के परिजनों ने अपनी हैसियत से ज्यादा बढ़कर दहेज दिया था। लेकिन शादी के कुछ माह बाद ही महिला के ससुराल वाले महिला सोनिया को दहेज के खातिर तंग करने लगे।
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इसी बीच महिला के मायके पक्ष ने अपनी बेटी का घर बसाने के लिए बीच-बीच में कई बार दहेज की कुछ मांगे भी पूरी की। मगर उसके बाद भी दहेज के खातिर तंग करने व मारपीट का सिलसिला जारी रहा। उसके बाद विवाहिता ने अपने  पति व अन्य ससुरालियों पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करवा दिया।

सजा बरकरार रख जेल भेज दिया

conviction intact of BJP MLA's brother, mother and father

एडवोकेट रितु सिंह मान ने बताया कि इस मामले में भाजपा की विधायक और उसका पति का नाम भी शिकायत में शामिल था। लेकिन पुलिस जांच के दौरान दोनों को बाहर कर दिया गया था। बाद में पुलिस ने तफ्तीश के बाद महिला सोनिया के पति मनोज मल्होत्रा, सास निर्मल मल्होत्रा और ससुर कैलाश मल्होत्रा के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी।

इसी मामले में नारायणगढ़ की अदालत ने जनवरी 2012 में तीनों को दोषी करार देते हुए एक-एक साल की सजा व एक-एक लाख रूपए जुर्माना लगाया था। मगर अदालत के फैसले के बाद आरोपियों ने अंबाला में ऊपरी अदालत में अपील दायर की थी।

एडवोकेट के अनुसार ये मामला भी यहां तीन साल चला और अब अदालत ने इस मामले में तीनों दोषियों की अपील खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा और उन्हे जेल भेज दिया है।

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